शासन से IGRS शिकायत निस्तारण में जिले को खराब रैंकिंग मिलने पर डीएम नाराज
IGRS पर होने वाली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण न हुआ तो होगी सख्त कार्रवाई-पवन अग्रवाल
अम्बुज भार्गव
बलरामपुर। जिले में IGRS शिकायत निस्तारण में अनदेखी और सतही कार्रवाई को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने शिकायतों के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में लापरवाही बरतने पर जिले के 37 वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई IGRS शिकायत निस्तारण की समीक्षा बैठक में सामने आई खामियों के बाद की गई।
डीएम ने कहा कि IGRS शिकायत निस्तारण उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और इसे लेकर शासन स्तर से स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि नागरिकों की शिकायतों को तय समयसीमा में, पूरी गुणवत्ता के साथ निस्तारित किया जाए। इसके बावजूद कई अधिकारी या तो शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे या बिना उचित जांच के उन्हें बंद कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिलाधिकारी द्वारा IGRS की नियमित समीक्षा में यह तथ्य सामने आया कि शिकायतों का समाधान न केवल समय पर नहीं किया जा रहा, बल्कि कई मामलों में शिकायतकर्ताओं से संपर्क भी नहीं किया गया। कई विभागों के अधिकारियों ने शिकायतों का सिर्फ औपचारिक निस्तारण किया और न तो उसका स्थायी समाधान निकाला गया और न ही शिकायतकर्ता से प्रतिक्रिया ली गई।
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इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड, विद्युत, नलकूप तथा बाढ़ खंड के साथ-साथ नगर पंचायत और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न बाल विकास परियोजना अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, पूर्ति निरीक्षक, स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी चिकित्साधिकारी, चकबंदी अधिकारी, तहसीलदार और डूडा परियोजना अधिकारी भी इस सूची में शामिल हैं।
डीएम पवन अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि इन सभी अधिकारियों को तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा। यदि संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा संचालित IGRS पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों को हल्के में लेना आम नागरिकों के विश्वास के साथ धोखा है और ऐसी लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि शिकायतों के निस्तारण के लिए पहले से ही एक SOP (Standard Operating Procedure) निर्धारित है, जिसमें यह आवश्यक है कि अधिकारी शिकायतकर्ता से बात करें, आवश्यक दस्तावेज देखें और स्थलीय निरीक्षण करें। इसके बाद ही मामले को बंद किया जा सकता है। लेकिन कई अधिकारियों ने इन मानकों की अनदेखी की और सिर्फ ‘फॉर्मेलिटी’ पूरी कर शिकायतें बंद कर दीं।
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इस कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल है। अधिकारियों का कहना है कि जिलाधिकारी की यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश है कि शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में कोताही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कुछ विभागों में यह भी कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में शिकायतों के निस्तारण को लेकर उच्चाधिकारियों की ओर से और भी कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।
ज्ञात हो कि IGRS (Integrated Grievance Redressal System) उत्तर प्रदेश सरकार की एक ऑनलाइन प्रणाली है, जिसके माध्यम से नागरिक प्रशासनिक शिकायतें दर्ज कर सकते हैं। इसका उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों का पारदर्शी, त्वरित और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करना है। शासन ने इस प्रणाली को ‘अतिमहत्वपूर्ण कार्यक्रम’ घोषित कर रखा है और सभी जिलाधिकारियों को इसके तहत समय-समय पर समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
डीएम की इस कार्रवाई को न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से, बल्कि जनविश्वास की बहाली की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह स्पष्ट संकेत है कि जिला प्रशासन अब ‘कागजी निस्तारण’ की नीति को खत्म कर हर शिकायत के वास्तविक समाधान की ओर बढ़ रहा है।
इस बीच, यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि इस चेतावनी के बाद अन्य अधिकारी भी IGRS शिकायतों की जांच और समाधान को गंभीरता से लेंगे तथा भविष्य में किसी भी तरह की कोताही से बचेंगे। डीएम ने यह भी निर्देशित किया है कि संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी प्रत्येक शिकायत की मॉनिटरिंग करें और उसका निस्तारण एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुनिश्चित कराएं।
यदि अगले तीन दिनों में कोई अधिकारी स्पष्टीकरण नहीं देता या दिया गया जवाब असंतोषजनक पाया जाता है, तो शासन को ऐसे सभी मामलों की रिपोर्ट भेजी जाएगी, जिससे कि उनके विरुद्ध विभागीय अथवा कानूनी कार्रवाई की जा सके।

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