Sunday, February 8, 2026
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हिस्ट्रीशीटर को लेकर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश

कहा-हिस्ट्रीशीटर के घर भी आधी रात को पुलिस जबरन नहीं घुस सकती

लीगल डेस्क

कोच्चि (केरल)। हिस्ट्रीशीटर के घर में भी घुसना अब पुलिस के लिए आसान नहीं होगा। केरल हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और मानवाधिकारों की रक्षा करने वाला फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पुलिस अधिकारी निगरानी की आड़ में रात के समय किसी भी व्यक्ति, चाहे वह हिस्ट्रीशीटर हो या नहीं, के घर में जबरन प्रवेश नहीं कर सकते। यह फैसला न केवल संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों को बल देता है बल्कि पुलिसिया दखल पर गंभीर प्रश्नचिह्न भी खड़ा करता है।

हाई कोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दी, जिसमें एक कथित हिस्ट्रीशीटर ने आधी रात को घर में घुसने और धमकाने पर पुलिस के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने की मांग की थी। जस्टिस एजी वरुण की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि घर किसी व्यक्ति के जीवन की पवित्र और निजी सीमा है, जिसे अनावश्यक दखल से संरक्षित रखा जाना चाहिए।

हिस्ट्रीशीटर घर में घुसनाः पुलिस की कार्रवाई पर कोर्ट की सख्त नजर
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने उसके खिलाफ केरल पुलिस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया और आधी रात को उसके घर पहुंचकर दरवाजा खटखटाया। जब उसने पुलिस के निर्देशों को मानने से इनकार किया, तो उस पर पुलिसकर्मियों को धमकाने और गाली देने का आरोप लगाया गया।

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील को गंभीरता से लेते हुए कहा कि किसी भी पुलिसकर्मी को यह अधिकार नहीं कि वह रात के समय किसी व्यक्ति के निवास में जबरन घुसकर उसकी निजता भंग करे। हिस्ट्रीशीटर घर में घुसना कोई तात्कालिक आपात स्थिति नहीं है, जो ऐसे प्रवेश को जायज ठहरा सके।

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’घर मंदिर के समान’: कोर्ट ने कहा, सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार सर्वोपरि
जस्टिस वरुण ने कहा कि जीवन के अधिकार में सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार निहित है, और घर उसी अधिकार का केंद्र है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पुलिस की निगरानी का मतलब यह नहीं कि वह लोगों की गोपनीयता और अधिकारों को कुचल दे।

उन्होंने कहा कि “घर सिर्फ एक भवन नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति के अस्तित्व, भावनाओं और सामाजिक सुरक्षा का गढ़ होता है।“ हिस्ट्रीशीटर घर में घुसना यदि रात के समय हुआ तो यह केवल निजता का उल्लंघन नहीं, बल्कि मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

हाई कोर्ट ने रद्द की एफआईआर, दिया चेतावनी भरा संदेश
याचिका पर विचार करते हुए हाई कोर्ट ने हिस्ट्रीशीटर घर में घुसना मामले में दर्ज प्राथमिकी और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया। साथ ही केरल पुलिस को निर्देश दिया कि वे ऐसी परिस्थितियों में कानून के दायरे में रहकर ही कार्य करें। यह निर्णय पुलिसिया कार्यप्रणाली को मानवीय दृष्टिकोण से देखने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

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