Tuesday, January 13, 2026
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गुरु पूर्णिमा 2025: जानें पूजा विधि व संपूर्ण विवरण

धर्म-कर्म डेस्क

भारतीय परंपरा में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है! गुरु को परमात्मा से भी श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि गुरु ही शिष्य को ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक होता है। ऐसे में हर साल आषाढ़ पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला गुरु पूर्णिमा 2025 का पर्व न केवल श्रद्धा, बल्कि आत्मिक उन्नति का अवसर भी होता है।

इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 2025 की तिथि 10 जुलाई को तय की गई है। इस दिन पूरे देश में श्रद्धालु अपने गुरुओं की पूजा-अर्चना कर उनके प्रति आभार प्रकट करेंगे। धार्मिक दृष्टि से यह दिन महर्षि वेदव्यास जी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, जिनके योगदान से वेद, पुराण और महाभारत जैसे ज्ञान-ग्रंथ अस्तित्व में आए।

गुरु पूर्णिमा 2025: तारीख, मुहूर्त और पूजन समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि 10 जुलाई 2025 को रात 01:36 बजे प्रारंभ होकर 11 जुलाई की रात 02:06 बजे तक रहेगी। अतः धर्मशास्त्रों के अनुसार गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को ही मनाई जाएगी। इस दिन व्रत, स्नान-दान और विशेष रूप से गुरु पूजन का विशेष महत्व होता है। ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु स्नान कर, स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजन की तैयारी में लग जाते हैं।

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गुरु पूर्णिमा 2025 के दिन पूजन विधि
गुरु पूर्णिमा 2025 पर श्रद्धा और विधि से किया गया पूजन जीवन में आध्यात्मिक शांति और सफलता दोनों लाता है। पूजा विधि इस प्रकार है:
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
घर के मंदिर को साफ कर वेदी पर गुरु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

घी का दीपक जलाएं और सफेद चंदन, अक्षत, फूल, जनेऊ, फल आदि अर्पित करें।
गुरु मंत्र या वेद मंत्रों का जाप करें, जैसे – ‘ॐ परमतत्त्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः’, ‘ॐ ब्रह्म बृहस्पतये नमः’।
आरती कर आशीर्वाद प्राप्त करें और अपने जीवन की गलतियों के लिए क्षमा याचना करें।
इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या शिक्षा से जुड़ी सामग्री का दान अवश्य करें।

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गुरु पूर्णिमा 2025 के दिन वेदव्यास की पूजा करते श्रद्धालु
गुरु पूर्णिमा 2025 के दिन वेदव्यास की पूजा करते श्रद्धालु

गुरु पूर्णिमा 2025 का महत्व
गुरु पूर्णिमा 2025 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, यह आत्मिक मार्गदर्शन और ज्ञान की पुर्नप्राप्ति का दिन है। इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं, क्योंकि वेदव्यास जी का जन्म इसी दिन हुआ था। उन्होंने वेदों को चार भागों में विभाजित किया और पुराण, उपनिषदों की रचना कर भारतीय ज्ञान परंपरा को संरचित किया। इस कारण उन्हें ‘आदि गुरु’ भी कहा जाता है। इसलिए इस दिन न केवल वर्तमान गुरुओं का सम्मान किया जाता है, बल्कि आदिगुरुओं की स्मृति में वेद पाठ, यज्ञ और सत्संग जैसे आयोजनों का आयोजन भी होता है।

गुरु पूर्णिमा 2025 से जुड़ी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभाएं
पूजा-पाठ के साथ गुरु पूर्णिमा 2025 का एक और पहलू यह भी है कि इस दिन समाज के प्रति जिम्मेदारी का निर्वहन भी आवश्यक है। गुरु का मार्गदर्शन केवल आत्मोन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के लिए कर्म का उदाहरण बनना भी उसका उद्देश्य होता है। इस दिन छात्रों, शिक्षकों और आध्यात्मिक साधकों को दान, सेवा और समाज में ज्ञान के प्रचार का भी संकल्प लेना चाहिए।

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