Thursday, September 24, 2026
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Gonda News: सजायाफ्ता कैदी को भी मिलते हैं कई संवैधानिक अधिकार

जिला कारागार में साक्षरता शिविर लगाकर दी गई जानकारी

जानकी शरण द्विवेदी

गोण्डा। उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण व जनपद न्यायाधीश मयंक कुमार जैन के निर्देश के अनुपालन में जिला कारागार में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन एवं निरीक्षण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कृष्ण प्रताप सिंह द्वारा कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए किया गया। विधिक साक्षरता शिविर में सचिव द्वारा ‘विचाराधीन बन्दियों के शिकायतों के निराकरण‘ के बावत जानकारी देते हुए बताया गया कि जेल में निरुद्ध विचाराधीन बन्दियों के अधिकारों की बात प्रत्येक स्तर पर होती रही है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति गणों ने अपने कई निर्णयों में सजायफ्ता और विचाराधीन कैदियों के अधिकारों के बारे में उल्लेख किया है। विचाराधीन कैदी या फिर सजायाफ्ता कैदी के अधिकार जेल में भी बने रहते हैं और कानून के हिसाब से ही उनके अधिकारों पर अंकुश लगाया जा सकता है। आपराधिक विधि के अन्तर्गत किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नही माना जा सकता, जब तक कि न्यायालय आरोपी को दोषी नही मानता। जब भी किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई आरोप लगाया जाता है तो वह मात्र आरोपी होता है। ऐसे में उसे यह संवैधानिक अधिकार है कि उसे अपने बचाव का मौका मिले। इस सन्दर्भ में संविधान के अनुच्छेद-22 में मूल अधिकार है कि प्रत्येक आरोपी को बचाव का मौका दिया जाए। इसके तहत अदालत का कर्तव्य है कि जब भी कोई आरोपी अदालत में पेश हो तो वह उससे पूछे कि क्या उसे वकील चाहिए ? वकील न होने पर अदालत आरोपी को सरकारी खर्चे से वकील मुहैया कराती है। सचिव द्वारा कारागार अस्पताल का निरीक्षण करते समय इलाज हेतु भर्ती बंदीगण के स्वास्थ्य आदि के बारे में पूंछताछ किया गया। बन्दीगण के समुचित इलाज हेतु संबंधित को निर्देशित किया गया। भोजनालय का निरीक्षण कर साफ-सफाई हेतु आवश्यक निर्देश दिया गया। महिला बैरक के बावत महिला बन्दियों को उनके खान-पान, रहन-सहन एवं शुद्ध पेयजल सम्बन्धित सुविधाओं एवं उनकी उचित सुरक्षा के सम्बन्ध में निर्देषित किया गया। इस साक्षरता शिविर में सचिव, श्री सिंह द्वारा आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत (आगामी 11 दिसंबर) में दीवानी लघु दाण्डिक वाद, फौजदारी, राजस्व चकबन्दी, बिजली चोरी, 125 गुजारा भत्ता, बैंक वाद, वैवाहिक तथा मोटर दुर्घटना प्रतिकर, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र एवं धारा 138 एन.आई.एक्ट से सम्बन्धित प्रकरणों को सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित कराने हेतु जानकारी प्रदान की गयी। इस अवसर पर जिला कारागार के जेलर दीपांकर भारती, उप कारापाल विवेक सिंह तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक मुकेश कुमार वर्मा व पराविधिक स्वयं सेवक संजय कुमार दूबे आदि अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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जानकी शरण द्विवेदी
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