जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। बसपा से निष्कासन के बाद पूर्व विधायक रमेश गौतम और मसूद आलम खां के समर्थन में पार्टी के ही कई पदाधिकारी आ गए हैं। बुधवार को 95 पार्टी पदाधिकारियों ने निष्कासित किए गए पार्टी नेताओं के साथ जाने का फैसला लेते हुए बसपा से इस्तीफा दे दिया है। मसूद आलम के आवास पर आज पार्टी के अनेक पदाधिकारियों ने दोंनो नेताओं से मुलाकात की और कहा कि पार्टी का यह फैसला गलत है, वह लोग उनके साथ हैं। एक प्रकार से बसपा के जिला इकाई में विद्रोह की स्थिति पैदा हो गई है। माना जा रहा है कि पार्टी से बाहर किए गए दोनां दिग्गज किसी और दल में भी जा सकते हैं। दूसरी तरफ पार्टी पर दबाव बनाने के लिए पदाधिकारियों द्वारा खोले गए मोर्चे से उनकी पार्टी में वापसी की आस भी जगी है। कई पदाधिकारियों ने तो इन दोनों नेताआें को पार्टी से निकालने का फैसला लेने वाले मण्डल कोआर्डीनेटर को ही पार्टी से निकालने की मांग की। कहा गया कि पार्टी नेतृत्व को गुमराह करके कुछ लोग नुकसान करने में लगे हैं।
अपने आवास पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में मसूद आलम ने अपनी व्यथा बयां की। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों का विरोध करते हुए न्होंने किसानों के समर्थन में अपने आवास पर भूख हड़ताल की थी। हमारे इस कृत्य को पार्टी विरोधी कहा गया, जबकि पार्टी सुप्रीमो स्वयं अपने ट्विटर एकाउण्ट के माध्यम से किसानों के आन्दोलन का समर्थन कर चुकी हैं। पूर्व विधायक रमेश गौतम ने कहा कि उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ पार्टी की 30 साल से सेवा की। कभी पार्टी विरोधी कार्य करने का इल्जाम नहीं लगा। देवीपाटन मण्डल का भी कोआर्डीनेटर होने के कारण मसूद आलम के बुलावे पर मैं भी थोड़ी देर के लिए उनके भूख हड़ताल कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर समर्थन दिया था। इसके बदले मुझे पार्टी से निकाल दिया गया। जिला उपाध्यक्ष मो. इरफान ने कहा कि जिला इकाई के वरिष्ठ पदाधिकारी होने के बावजूद उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई। सोशल मीडिया पर पत्र वायरल होने के बाद उन्हें दूसरे लोगों ने बताया। जिलाध्यक्ष से पूछने पर उन्होंने कहा कि कोआर्डीनेटर के निर्देश पर मैंने पत्र बनाकर मीडिया को भेज दिया है। उन्होंने कहा कि पूरी जिला इकाई अपने को इस फैसले से अलग करती है। कटरा बाजार और मनकापुर विधानसभा की सभी इकाईयों के पदाधिकारियों के अलावा अनेक जिला, विधानसभा व सेक्टर इकाई के प्रभारी इस फैसले के खिलाफ हैं और आज अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं।
पूर्व विधायक रमेश गौतम तो पार्टी के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं और मौजूदा समय में बस्ती व देवीपाटन मंडल के मुख्य सेक्टर प्रभारी थे। वह पार्टी के बड़े नेताओं के करीबी माने जाते रहे हैं और पार्टी के समर्पित नेताओं में माने जाते थे। इसी तरह बसपा से कटरा बाजार से विधानसभा व गोंडा से लोस प्रत्याशी रह चुके मसूद आलम खां की भी पार्टी में गहरी पैठ मानी जाती थी। पार्टी ने तो दोनो को बाहर कर दिया लेकिन बुधवार को दोनो नेताओं ने पार्टी पदाधिकारियों को अपने पक्ष में दिखाकर पलटवार भी किया। बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष लाल चंद्र गौतम, सेक्टर प्रभारी खुशीराम पासवान, जिला उपाध्यक्ष मो. इरफान खां, जिला महासचिव अयोध्या चौहान, जिला सचिव प्रदीप गौतम, डा. यार मोहम्मद, गोंडा विस अध्यक्ष विक्रम शर्मा, पूर्व विस अध्यक्ष कटरा रामनाथ कनौजिया, पूर्व मंडल कोऑर्डीनेटर अनिल चौधरी, पूर्व जिला उपाध्यक्ष योग्यजीत सिंह, अजय कुमार पांडे समेत 95 प्रमुख नेताओं ने बसपा छोड़कर निष्कासित नेताओं के समर्थन में आ गए हैं।
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