Tuesday, January 13, 2026
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झूठा रेप केस में सनोज मिश्रा को राहत, अदालत ने दी बेल

लीगल डेस्क

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक चर्चित रेप केस में फिल्म निर्देशक सनोज कुमार मिश्रा को जमानत दे दी है। यह मामला न केवल न्यायिक दृष्टिकोण से अहम रहा, बल्कि इसने देशभर में झूठे यौन उत्पीड़न के आरोपों की बढ़ती प्रवृत्ति पर बहस छेड़ दी है। सनोज मिश्रा के खिलाफ दर्ज रेप केस में शिकायतकर्ता महिला ने बाद में अदालत में यह स्वीकार किया कि न तो उसके साथ रेप हुआ और न ही सनोज मिश्रा ने कोई अपराध किया। यह केस झूठे रेप केस के मामलों में एक नया उदाहरण बनकर सामने आया है।

किसी के उकसावे पर की थी शिकायत
दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने 30 मई को एक रेप केस की सुनवाई करने के बाद दिए आदेश में कहा कि महिला द्वारा दायर हलफनामे में यह स्पष्ट है कि मामला सहमति से बने संबंधों का है और आरोपी को जेल में रखने का अब कोई औचित्य नहीं बनता। अदालत ने 10,000 रुपये के निजी बॉन्ड और इतनी ही राशि की एक जमानती पर मिश्रा को रिहा करने का निर्देश दिया। शिकायतकर्ता महिला ने अपने हलफनामे में यह स्वीकार किया कि वह मिश्रा के साथ पांच वर्षों से रिलेशनशिप में थी और उसने कुछ विरोधियों के उकसावे पर रेप की शिकायत दर्ज कराई थी। उसने यह भी कहा कि यदि आरोपी को बेल मिलती है तो उसे कोई आपत्ति नहीं है।

इस प्रकरण ने देश में चल रही एक गंभीर समस्या को उजागर किया है यौन अपराधों में झूठे आरोप। न्यायमूर्ति कठपालिया ने अपने आदेश में कहा कि ऐसी झूठी शिकायतें न केवल आरोपी को सामाजिक और मानसिक क्षति पहुंचाती हैं, बल्कि समाज के भीतर यौन उत्पीड़न की वास्तविक पीड़िताओं के प्रति भी अविश्वास पैदा करती हैं। अदालत ने इस प्रवृत्ति पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी हरकतों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

सनोज मिश्रा को मार्च 2025 में दिल्ली पुलिस ने रेप केस में गिरफ्तार किया था। इससे पहले उनकी अग्रिम जमानत याचिका और बाद में ट्रायल कोर्ट में दायर नियमित जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी थी। उन्होंने हाईकोर्ट में पुनः याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने भी एक हलफनामा दाखिल कर कहा कि दोनों पक्ष समझौते पर पहुंच चुके हैं और बेल का विरोध नहीं किया गया।

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पुलिस की जांच में अब नए मोड़
इस मामले में एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब थाना नबी करीम के एसएचओ ने अदालत को बताया कि उन्होंने शिकायतकर्ता महिला और उन सभी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिन्होंने सनोज मिश्रा के खिलाफ झूठा रेप केस दर्ज कराने की साजिश रची। एसएचओ ने यह भी कहा कि जल्द ही पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। न्यायालय ने अपने आदेश की एक प्रति संबंधित डीसीपी को भेजने का निर्देश दिया ताकि इस मामले में कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। यह कदम झूठे मामलों पर पुलिस और न्यायपालिका की सजगता को भी दर्शाता है।

मीडिया और समाज पर असर
‘झूठा रेप केस’ जैसी घटनाएं मीडिया में सनसनी बन जाती हैं और आरोपित व्यक्ति को समाज में कठघरे में खड़ा कर देती हैं। ऐसे मामलों में जब आरोपी निर्दोष साबित होता है, तब भी समाज की नजरों में उसकी छवि को पूरी तरह से पुनः स्थापित करना मुश्किल होता है। फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा प्रयागराज महाकुंभ के दौरान वायरल हुई भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा को फिल्म ऑफर कर चुके हैं। वे अब तक कई स्वतंत्र फिल्मों और लघु श्रृंखलाओं का निर्देशन कर चुके हैं। उनके खिलाफ लगे इस झूठे आरोप से न केवल उनका करियर प्रभावित हुआ, बल्कि मानसिक तौर पर भी उन्हें गहरा आघात पहुंचा।

विधि विशेषज्ञों की राय
वरिष्ठ अधिवक्ता रंजन शर्मा का कहना है कि यौन अपराधों में यदि कोई शिकायतकर्ता हलफनामे के माध्यम से अपने आरोपों से पलटती है, तो यह गंभीर विषय होता है। अदालत को चाहिए कि ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए आरोप लगाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही शुरू करे। उन्होंने कहा कि ‘झूठा रेप केस’ सिर्फ एक व्यक्ति का निजी संकट नहीं होता, यह न्यायिक प्रणाली और सामाजिक संतुलन के लिए भी खतरा है। ऐसे मामलों में पुलिस और न्यायपालिका को त्वरित और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

सनोज मिश्रा को मिली बेल एक कानूनी राहत मात्र नहीं है, बल्कि यह देशभर में झूठे यौन आरोपों के दुष्परिणामों की एक चेतावनी भी है। झूठा रेप केस दर्ज कराने की प्रवृत्ति अगर यूं ही चलती रही, तो इसका असर ना केवल निर्दोषों की जिंदगी पर पड़ेगा, बल्कि वास्तविक पीड़ितों की न्याय प्राप्ति की राह भी कठिन हो जाएगी।

सनोज मिश्रा को दिल्ली हाईकोर्ट से झूठे रेप केस में जमानत मिली

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