-बीएचयू शिक्षक के कृत्य से छात्रों में नाराजगी,कार्यवाही की मांग,प्रधानमंत्री कार्यालय को ट्वीट कर दी जानकारी,शिकायत
वाराणसी (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के एक सहायक प्रोफेसर ने भगवान श्रीराम और सीता माता के चित्र में खुद की और अपनी पत्नी की तस्वीर लगा दी है। विश्वविद्यालय के छात्रों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई।
पीएमओ, मुख्यमंत्री, कुलपति को ट्वीट कर इसकी शिकायत की। छात्रों ने सहायक प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की हैं । विश्वविद्यालय के शोध छात्र पतंजलि पांडेय ने मंगलवार को कहा कि जिस प्रदर्शनी में भगवान श्री राम के आपत्तिजनक चित्र लगाए गए हैं। उसका उद्घाटन कुलपति ने ही किया था। छात्र ने आरोप लगाया कि बीएचयू प्रशासन ऐसे तत्वों को खुलकर संरक्षण दे रहा है। इस मामले में अगर विश्वविद्यालय प्रशासन कोई कारवाई नहीं करता है तो प्रतिरोध होगा।।
विश्वविद्यालय दृश्य कला संकाय में महीने भर तक चलने वाली कला प्रदर्शनी में विभाग के शिक्षकों समेत 46 कलाकारों की ओर से चित्रकला, मूर्तिकला, वस्त्र विन्यास, छायाचित्र, सिरामिक्स, ग्राफिक डिजाइन आदि पर आधारित कलाकृतियां लगाई गई हैं।
इस प्रदर्शनी में संकाय के सहायक प्रो. अमरेश कुमार की चित्र प्रदर्शनी भी लगी हैं । प्रदर्शनी में मुकुटधारी श्रीराम-सीता के एक चित्र में माता सीता की छवि काल्पनिक है, मगर उनके साथ खड़े प्रभु श्रीराम की मुखाकृति की जगह चित्रकार ने अपनी फोटो लगाई है। जिसमें वह चश्मा लगाए हुए हैं। वहीं एक अन्य चित्र में उन्होंने अपना और अपनी पत्नी दोनों की मुखाकृति लगाई है। हिंदी विभाग के शोध छात्र अभिषेक सिंह ने अमरेश कुमार से मिल कर तत्काल आपत्ति भी दर्ज कराई। इस चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन वसंत पंचमी के दिन कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने किया था। उद्घाटन के बाद उन्होंने चित्र का अवलोकन भी किया था। इस मामले में प्रो.अमरेश कुमार का कहना है कि यह चित्र पहली बार किसी प्रदर्शनी का हिस्सा नहीं बना है। वर्ष 2011 में दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय प्रदर्शनी में भी यह चित्र लगाया गया था। उनका कहना है कि हमारे शास्त्र श्रीराम के घट-घटव्यापी होने की बात कहते हैं। इस दृष्टि से प्रभु प्रत्येक प्राणी में हैं। जब एक चित्रकार को इसकी अभिव्यक्ति करनी होगी तो उसका प्रदर्शन भी ऐसा ही होगा। संकाय प्रमुख प्रो. हीरालाल प्रजापति ने कहा कि कोई भी कलाकार अपनी अभिव्यक्ति के लिए स्वतंत्र है। सहायक प्रोफेसर ने प्रभु श्रीराम की तस्वीर में अपनी तस्वीर लगाकर लोक अभिव्यक्ति के भावों को इस फोटो के माध्यम से प्रदर्शित किया है। एक कलाकार के रूप में ऐसा चित्र बनाने के पीछे शिक्षक की कोई गलत मंशा नहीं है।
श्रीधर
