Monday, September 21, 2026
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चीन-भारत सीमा विवाद के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए बीजिंग ने बनाया नया कानून

बीजिंग/नई दिल्ली (हि.स.)। भारत के पूर्वी लद्दाख और पूर्वोत्तर राज्यों से लगती सीमा पर लंबे विवाद के बीच चीन ने सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए नया कानून बनाकर अपनी सीमाओं को सुरक्षित और मजबूत करने के लिए नई साजिश रची है। चीन के इस कानून के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों को सुदृढ़ करने की बात कही गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन का नया कानून चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों को सीमावर्ती इलाकों के नागरिकों के साथ मिलकर काम करने वाली नीति को मजबूत बनाता है। उसके इस कानून से भारत, भूटान, नेपाल और तिब्बत के ग्रामीण इलाकों में पीएलए के जवान वहां के नागरिकों को इस्तेमाल करते हुए रक्षा के क्षेत्र में पहली पंक्ति के रूप में काम करेंगे।

चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, नए कानून में लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की बात कही गई है।

पिछले 17 महीने से भारत-चीन सीमा विवाद में उलझे हैं। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून 2020 को दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुए हिंसक झड़प के बाद से ही दोनों देशों के बीच सीमा विवाद बरकरार है। झड़प में भारतीय सेना के तकरीबन 20 सैनिक शहीद हो गए थे।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, चीनी संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) ने शनिवार को देश के सीमावर्ती क्षेत्रों के संरक्षण और शोषण पर नया कानून अपनाने के लिए नए कानून को पारित किया है, जो 1 जनवरी, 2022 से प्रभावी होगा। इस नए कानून के अनुसार, सरकार क्षेत्रीय अखंडता और जमीनी सीमाओं की रक्षा के लिए उपाय करेगा और क्षेत्रीय संप्रभुता और जमीनी सीमाओं को कमजोर करने वाले किसी भी कार्य से बचाव और मुकाबला करेगा।

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