Monday, September 21, 2026
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गाय के गोबर से बने दीपक की बढ़ी मांग, हाथों को मिला काम

लखनऊ (हि.स.)। अवधी बोली वाले व्यापक क्षेत्र में पूरे वर्ष गाय के गोबर के उपले, धूपबत्ती बनाने वाले गौसेवकों की व्यस्तता दीपावली के पर्व को देखते हुए बढ़ गयी है। गाय के गोबर का महत्व समझने वाले जनमानस में गोबर से बने दीपक की मांग बढ़ी है और गौसेवकों के हाथों को काम मिल रहा है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधि गौ सेवा ने लखनऊ में अपने कार्य को गति दी है और विभाग से लेकर भाग व नगर तक इकाईयां बनाने पर जोर दिया है। बीते दिनों तेजी से बढ़े कार्य में बहुत सारे गौसेवकों को जोड़ा गया है। इसी दौरान अयोध्या निवासी राजेन्द्र सिंह का नाम भी चर्चा में आया है, जो आजकल गाय के गोबर से बनने वाले दीपक को तैयार करने में व्यस्त है।

उन्होंने बताया कि उनके पास विभिन्न स्थानों से गाय के गोबर से बने दीपक खरीदने के लिए फोन आने शुरु हुए तो वह दीपक बनाने में व्यस्त है। अभी तक वह हजारों की संख्या में दीपक की बिक्री कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में दीपक की मांग है। वे निरंतर ही दीपक निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं।

उन्होंने बताया कि वैसे तो वह वर्ष के अन्य महीनों में गोबर से बनी मूर्ति, धूपबत्ती पर भी कार्य करते हैं, फिलहाल दीपावली पर वे पूरी तरह से गोमय दीपक बनाने में जुटे हैं। उनके पास दो रुपये पचास पैसे से लेकर 10 रुपये तक गोबर के दीपक मौजूद हैं।

लखनऊ के जानकीपुरम क्षेत्र में ओमप्रकाश, जो गौपालक व गौसेवक हैं, वे आजकल स्थानीय महिलाओं की मदद से गाय के गोबर से दीपक बनाने के कार्य में व्यस्त हैं। ओमप्रकाश ने बताया कि वह एक स्वयंसेवक हैं और उनके जीवन में गाय का विशेष महत्व है। गाय के गोबर से बनने वाली वस्तुओं के प्रति उनका आकर्षण हुआ, जिससे उनके जीवन में व्यस्तता बढ़ी है।

उन्होंने बताया कि दीपावली पर गोबर के दीपक की मांग है और लोगों को शुद्ध गोबर का महत्व समझ में आ रहा है। इसके कारण गोबर के दीपक पर वे निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनके पास रंग-बिरंगे दीपक उपलब्ध हैं, जो तीन रुपये लेकर आठ रुपये तक बिक्री के लिए तैयार हैं।

राजेन्द्र सिंह और ओमप्रकाश के अलावा अरुण, गणेश गुप्ता भी गौसेवक हैं और इन दिनों गोबर के दीपक बनाने में जुटे हुए हैं। ये समाज में गाय के गोबर का महत्व बता रहे हैं। उनका कहना है कि गाय का गोबर, जिसे हिन्दू धर्म में पवित्र व पावन माना गया है उससे बनने वाले दीपक या मूर्तियां पवित्रता के स्वरुप में देखी जाती है। हमारे यहां पूजा में भी गोबर के ही प्रतीकात्मक गणेश जी बन रहे हैं।

शरद

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