Saturday, June 6, 2026
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कुशीनगर की गुप्तकालीन सूर्य प्रतिमा को पर्यटन मानचित्र पर लाने की तैयारी, दिए 50 लाख

कुशीनगर (हि. स.)। कुशीनगर के तुर्कपट्टी में स्थित गुप्तकालीन नीलमणि पत्थर की सूर्य प्रतिमा को पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करने के लिए प्रदेश सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री पर्यटन सम्वर्द्धन योजना के तहत विकास के लिए योजना तैयार कर 50 लाख रुपए जारी किया गया है। 
नीलमणि पत्थर की निर्मित यह प्रतिमा उत्तर भारत में इकलौती सूर्य प्रतिमा है। लंबे समय से इस प्रतिमा को पर्यटन के नक्शे पर लाने की तैयारी चल रही थी। अब जाकर इसे मंजूरी मिल पाई है। खुदाई से प्राप्त प्रतिमा को लोगों द्वारा एक मंदिर का निर्माण कर स्थापित किया गया है। वर्तमान में प्रतिमा तक जाने के लिए ढंग का रास्ता भी नहीं है।उप्र पर्यटन की कार्यदाई संस्था कंस्ट्रक्शन एंड डिज़ाइन सर्विसेज ने यहां धर्मशाला जीर्णोद्धार, प्रसाधन, पेयजल,बाउंड्रीवाल जीर्णोद्धार, बैठने की व्यवस्था, परिसर का सुंदरीकरण, लाइटिंग आदि कार्य करने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया है। 
सूर्यग्रहण के दिन मिली प्रतिमा
31 जुलाई 1981 को सूर्य ग्रहण लगा था। उसी दिन तुर्कपट्टी के पूर्व ग्राम प्रधान मथुरा शाही के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सुदामा शर्मा नाम के व्यक्ति के बताए गए स्थान पर खुदाई की। सुदामा को स्वप्न में यहां प्रतिमा होने की संकेत मिला था। खुदाई में यहां दो प्रतिमाएं मिलीं। इनमें से एक बलुई मिट्टी की थी और दूसरी नीलमणि पत्थर की। इतिहासकारों ने इसे गुप्तकालीन बताया। 
अद्भुत है सूर्य प्रतिमा
तुर्कपट्टी में मिली भगवान सूर्य की प्रतिमा अद्भुत है। पुराणों में सूर्य के जो लक्षण वर्णित हैं वे इस मूर्ति में दिखते हैं। रथ में जुते सात घोड़े, सूर्य की रानियां और सारथी अरुण की छवि साफ दिखती है। प्रतिमा में राहु और केतु भी दिखते हैं। भगवान सूर्य के दोनों हाथों में कमल है। साथ ही किन्नर और गंधर्व सूर्य का गुणगान करते दिखते हैं। 
सुरक्षा का नहीं है इंतजाम
24 अप्रैल वर्ष 1998 की रात्रि में यहां से नीलमणि पत्थरवाली भगवान सूर्य की मूर्ति चोरी हो गई थी। काफी प्रयास के बाद मूर्ति तो मिली लेकिन उसके बाद भी सुरक्षा का कोई बंदोबस्त नहीं किया गया। कुछ दिन तक दो सिपाही तैनाती रही। साल 1985 में सूर्य महोत्सव का आयोजन हुआ था। प्रदेश के संस्कृति विभाग और स्थानीय लोगों के सहयोग से शुरू हुए इस महोत्सव से इस जगह को काफी प्रसिद्धि मिली। देशी-विदेशी पर्यटक भी आने लगे। 1992 में सूर्य महोत्सव बंद हुआ तो पर्यटकों ने भी यहां से नाता तोड़ लिया। इस सम्बंध में क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी गोरखपुर रविन्द्र कुमार ने जल्द सुंदरीकरण कार्य शुरू कराने की बात कही।

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