यमुनोत्री हादसा से मची अफरा-तफरी, 3 से 4 यात्रियों के दबे होने की आशंका
राज्य डेस्क
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के पवित्र यमुनोत्री धाम की यात्रा पर गए श्रद्धालुओं के लिए सोमवार की शाम यमुनोत्री हादसा के रूप में भयावह बन गई। पैदल मार्ग पर स्थित नौ कैंची बैंड के पास अचानक पहाड़ी दरकने से बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसमें तीन से चार तीर्थयात्रियों के दबने की आशंका जताई जा रही है। हादसे की सूचना पर प्रशासन और बचाव दलों में हड़कंप मच गया।
घटना शाम 4 बजकर 12 मिनट पर हुई जब यमुनोत्री पैदल मार्ग पर नौ कैंची बैंड के पास यमुनोत्री हादसा हुआ। इस स्थान पर अचानक पहाड़ टूटकर नीचे आ गिरा और यात्रियों को अपनी चपेट में ले लिया। विशेष बात यह रही कि दुर्घटना के समय इलाके में बारिश नहीं हो रही थी, बावजूद इसके भारी मात्रा में मलबा गिरा, जिससे यह गंभीर यमुनोत्री हादसा सामने आया।
यमुनोत्री हादसा की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें फौरन मौके के लिए रवाना हो गईं। उत्तरकाशी जिला सूचना अधिकारी के मुताबिक एक यात्री को मलबे से जीवित निकाला गया है और उसे तत्काल जानकीचट्टी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। डॉक्टर हरदेव सिंह पंवार ने बताया कि घायल खतरे से बाहर है। बाकी दो यात्रियों को भी लाने की कोशिश की जा रही है।
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घटना स्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि मलबे में अभी एक यात्री का शरीर नजर आ रहा है, जबकि बाकी की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। यमुनोत्री हादसा के बाद तत्काल प्रभाव से नौ कैंची बैंड के पास पैदल आवाजाही पर रोक लगा दी गई है ताकि किसी अन्य तीर्थयात्री को जोखिम न हो।
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत कुमार आर्या यमुनोत्री हादसा की लगातार निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने स्मार्ट कंट्रोल रूम के जरिए सभी संबंधित एजेंसियों को तत्काल राहत व बचाव कार्यों में लगने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल पहाड़ी मलबा हटाने का कार्य जारी है और मलबे की पूरी सफाई के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कुल कितने यात्री इसकी चपेट में आए।
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यमुनोत्री हादसा के कारण यात्रा मार्ग पर अफरा-तफरी मची हुई है। यात्रा पर आए श्रद्धालु सहमे हुए हैं और लगातार प्रशासन से मार्ग पुनः खोलने की अपील कर रहे हैं। फिलहाल सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका गया है।
हादसे के बाद SDRF के साथ ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हो गई हैं। राहत कार्यों में देरी न हो, इसके लिए मौके पर मशीनें और मेडिकल स्टाफ भी तैनात किया जा रहा है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से दूर रहें और केवल प्रशासनिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें।
यमुनोत्री हादसा ने एक बार फिर मानसून और पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा की जोखिमों की ओर ध्यान खींचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करते समय प्रशासन द्वारा जारी की गई सुरक्षा सलाह का पालन बेहद जरूरी है। साथ ही यात्रियों को यह भी समझना चाहिए कि बगैर पूर्व जानकारी या आपदा की स्थिति में आगे बढ़ना कितना खतरनाक हो सकता है।
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