Tuesday, September 15, 2026
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UP News : लोकगीतों में चौरी-चौरा : ‘काट गिराया थानेदार को, गई खबर हिंद में छाय’

गोरखपुर (हि.स.)। चौरी-चौरा कांड पर उस समय रचे गए लोकगीत और आल्हा आज भी जीवंत हैं। यह बात अलग है कि इस कांड के साथ तत्कालीन सरकार और इतिहासकारों ने न्याय नहीं किया। लेकिन लोक-गीतकारों और कलाकारों ने आज भी उस घटना की जीवंतता बनाये रखा है। इसी वजह से पूर्वांचल के लोकगीतों में वे आज भी जिंदा हैं। लोग आज भी रोमांचित हो रहे हैं।
चौरी-चौरा कांड पर आल्हा की रचना काफी लोकप्रिय रहा है। इसको सुनने वालों की संख्या भी काफी रही है। गांव-गांव में आल्हा गायन करने वालों को कभी कभी आज भी चौबारों पर बुला ही लिया जाता है। हाकांकि इनकी संख्या अब गिनी-चुनी ही रह गई है। हाव-भाव के साथ इनका गायन शुरू होने के बाद जैसे लोगों की आँखो के सामने चौरीचौरा कांड की हकीकत तैरने लगती हैं और लोग रोमांच में हिलकोरें लेने लगते हैं।
कुछ ऐसा है वीर रस का आल्हा‘भड़के अहीर गांव के सारे, दई थाने में आग लगाय।काट गिराया थानेदार को, गई खबर हिंद में छाय।खबर सुनी जब गांधी जी ने, दहशत गई बदन में छाय।फैली अशांति कुछ भारत में, आंदोलन को दिया थमाय।सोचा कुछ हो शायद उनसे, गलती गए यहां पर खाय।मौका मिली फेरि गोरों को, दीनी यहां फूट कराय।मची फूट फेरि भारत में, रक्षा करें भगवती माय।खूब लड़ाया हम दोनों को, मतलब अपना लिया बनाय।बने खूब हम पागल कैसे, जरा सोचना दिल में भाय।
‘कोमल मस्ताना’ पर भी बने हैं गीत 
चौरी-चौरा कांड को लोकगीतों में काफी स्थान मिला था। किसी जमाने में ‘कोमल वीर मस्ताना फुंकले चौरी-चौरा थाना’ बहुत लोकप्रिय था। कोमल को लेकर एक लोकगीत ‘सहुआकोल में कोमल तपले, फूंकले चौरीचौरा थाना’ कुछ लोगों को आज भी स्मरण है।

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