मेरठ (हि.स.)। फसलों की सिंचाई के संसाधनों में नहरों से सिंचाई को सबसे अच्छा तरीका माना गया है। नहरों का पानी भूमि से नहीं लिया जाता, बल्कि वर्षा के पानी को बांध बनाकर रोका जाता है। प्रदेश सरकार लगातार सिंचन क्षमता में बढ़ोतरी कर रही है। इस कारण प्रदेश का फसल उत्पादन भी बढ़ रहा है।
सिंचाई अधिकारियों का कहना है कि फसली सीजन में आवश्यकतानुसार बांध से पानी छोड़कर नहरों के माध्यम से किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाता है। नहर प्रणाली से कई लाभ होते हैं। नहरों के पानी से धरती में वाटर रिचार्ज होता रहता है। पशु-पक्षियों, वन्य जीवों को पीने का पानी मिलता रहता है। नहरों के किनारे वृक्षारोपण कर वनों का क्षेत्रफल बढ़ाया जाता है। मछली व अन्य जलीय जीवों की संख्या में वृद्धि होगी। किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलता है। इसीलिए विभिन्न लाभों को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश सरकार नहरों के सुधार, निर्माण सहित वांछित जल भण्डारण हेतु बांधों के निर्माण पर विशेष बल दिया है।
प्रधानमंत्री ने शुरू कराई परियोजना
बाणसागर नहर परियोजना उत्तर प्रदेश में वर्ष 1989-90 में प्रारम्भ हुई। वर्ष 2002 में नहर निर्माण का कार्य रूक गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की लम्बित परियोजनाओं का परीक्षण कराते हुए उत्तर प्रदेश की बाणसागर नहर परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में सम्मिलित किया। भारत सरकार ने 2014 में सिंचाई परियोजना के अनुमोदन के लिए वन एवं पर्यावरण नीति में संशोधन करते हुए अक्टूबर 2014 में स्वीकृति प्रदान कर दी। इसके बाद नहर निर्माण कार्य तेजी से शुरू हुआ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ली रुचिविन्घ्य रेंज एवं प्रयागराज के असिंचित क्षेत्रों के किसानों के फसला उत्पादन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाणसागर नहर परियोजना को शीघ्र पूर्ण करने के लिए खुद निगरानी शुरू की। सिंचाई विभाग ने 3420.24 करोड़ रुपए की वास्तविक लागत के इस परियोजना को वर्ष 2018 में पूरा कर दिया। नहर परियोजना पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री ने 15 जुलाई 2018 को इसका लोकार्पण किया। इस परियोजना से मिर्जापुर की 75309 हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा मिली। जबकि प्रयागराज के 74823 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई शुरू हुई। इससे फसल उत्पादन में भी बढ़ोतरी हो रही है।
1.70 लाख किसानों को मिला लाभबाण सागर नहर परियोजना के पूरा होने से 1.70 लाख से अधिक किसानों को सिंचाई सुविधा मिली। इससे फसल उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई। इससे केन्द्र सरकार के वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को मजबूती मिल रही है। राज्य सरकार सिंचाई प्रणालियों को अधिक से अधिक संसाधन उपलब्ध करा रही है। इससे प्रदेश की सिंचन क्षमता में बढ़ोत्तरी के साथ फसल उत्पादन भी बढ़ रहा है। पहले उत्पादित फसलों की अपेक्षा अब सिंचाई सुविधा होने से लगभग 5.50 लाख टन से अधिक अतिरिक्त फसल उत्पादन होने का अनुमान है। इससे किसानों की आय में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है और वे राष्ट्र निर्माण में सहभागी बन रहे हैं।
