Sunday, September 20, 2026
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UP News : बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली में दिखेगी राजस्थानी वास्तु शैली की झलक

-नक्काशीदार प्रवेश द्वार, छतरी, गुम्बज, बेंच बनाने की हो रही तैयारी 

कुशीनगर (हि.स.)। बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली के दर्शन को आने वाले देशी विदेशी सैलानियों को राजस्थानी वास्तु शैली की भी झलक देखने को मिलेगी। उद्यानों, पार्कों के प्रवेश द्वार, गुलाटी, पालकी, गुम्बज, छतरी, बेंच सभी राजस्थानी शैली के होंगे। इसके लिए नगरपालिका ने व्यापक कार्य योजना बनानी शुरू कर दी है। 
देवरिया की तरफ से कुशीनगर आने वाले मार्ग पर रामाभार पुल के समीप राजस्थानी कला कृति युक्त लाल पत्थर से प्रवेश द्वार बनाने की योजना है। पुल पर स्थित मोक्षधाम घाट पर नदी के दक्षिण तरफ राजस्थानी शैली में गुलाटी और उत्तर तरफ पालकी बनाकर इसके सौंदर्य को और निखार जाएगा। यहां साथ ही गुंबज और टी-हट के निर्माण का भी योजना है। 
कुशीनगर तिराहा के प्रवेश द्वार पर बुद्ध की प्रतिमा के ऊपर लगी छतरी हटाकर राजस्थानी कलाकृति का नक्काशी दार छतरी लगाई जायेगी। कसाडा के अभियंता व राजस्थानी शैली के वास्तुकार अभी स्थलीय सर्वेक्षण कर रहे हैं। 
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पूर्ण बोरा ने भी अधिशासी अधिकारी प्रेमशंकर गुप्त, अभियंता मनोज यादव, लेखपाल ब्रजेश मणि त्रिपाठी, हरिशंकर सिंह, कर निरीक्षक परवेज आलम को साथ लेकर योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। योजना व लागत तैयार कर स्वीकृति के लिए भेजी जायेगी। पूरी कवायद पर्यटकों के ठहराव के दिनों में वृद्धि करने के लिए की जा रही है। बीते दो दशकों में कुशीनगर आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में क्रमशः वृद्धि हो रही है। 
साल 2019 में यह संख्या 70 हजार दर्ज की गई थी। सैलानी यहां आते हैं लेकिन, एक दिन कम अवधि में ठहरते हैं। चार छह घण्टों में उनका दर्शन पूजन का कार्यक्रम समाप्त हो जाता है। प्रशासन की योजना दर्शनीय व घूमने फिरने योग्य स्थलों की संख्या में वृद्धि कर पर्यटकों के ठहराव के घण्टों में वृद्धि करने की है। इस सम्बंध में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन गया है। नगर को उसके अनुरूप विकसित करने की कोशिश की जा रही है। राजस्थानी शैली का समावेश होने से खूबसूरती और निखरेगी। 

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