Saturday, March 7, 2026
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UP News : दो प्रोफेसर भाइयों ने सुलतानपुर में जैविक खेती से लहरा दी चंदन की बगिया

-कोरोना काल में बंद हुए विद्यालय तो बीच में तैयार कर ली पपीते की फसल
-गुरु जी ने खेती को बनाया सफल प्रयोगशाला, हुनर सीखने आते हैं किसान 
सुलतानपुर (हि.स.)। कहते हैं कि जहां चाह वहां राह होती है। दो प्रोफेसर भाइयों ने मिलकर परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाकर जैविक खाद से चंदन की बगिया तैयार कर ली। आज इन चंदन के पौधों को तेजी से बढ़ता और हरा-भरा देख लोग आश्चर्यचकित हो रहे हैं। इस पर भी दोनों भाइयों ने चंदन की इस बगिया के बीच में नकदी फसल के लिए पपीते की फसल को लहरा दिया। अब दूर-दूर से लोग इनसे खेती के गुर सीखने पहुंच रहे हैं। 
जिला मुख्यालय से लगभग 20 किमी दूर कुड़वार क्षेत्र के पास सरैंयामाफी गांव है। इस गांव के दो सगे प्रोफेसर भाई डॉ. रवि प्रकाश तिवारी व डॉ. प्रफुल्ल नरायन तिवारी गनपत सहाय पीजी कालेज में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। दोनों ने कुछ नया करने का जज्बा लेकर खेती को अपनी प्रयोगशाला बना डाली है। कोरोना महामारी के बीच जब स्कूल बंद हो गए तो उस समय पूरा ध्यान दो प्रोफेसर भाइयों ने मिलकर खेत में लगा दिया। उन्होंने कुदाल और फावड़ा उठा लिया। कुछ अलग करने की चाहत में फसल के मुताबिक मिट्टी न होने के वावजूद जैविक खाद के बल पर चंदन की बगिया में पपीते की फसल तैयार कर ली।
डॉ. रवि कुमार तिवारी ने हिन्दुस्थान समाचार से विशेष बातचीत में बताया कि हमेशा कुछ नया करने का मन था। समय और परिस्थितयां साथ नहीं दे रही थी। जनवरी 2018 में चार सौ चंदन के पौधों का रोपण कर दिया। उसकी सुरक्षा के लिए खेत को लोहे के पोल में तार से चारों तरफ बंद कर दिया। उसमें सौर ऊर्जा की बैट्री से 12 वोल्ट का करंट दौड़ा दिया। यह करंट केवल झटका देता है। इसमें पानी की बचत के उदेश्य से सिंचाई के लिए टपक विधि का प्रयोग किया है। इससे एक तरफ पानी की बचत भी होती है तो वहीं दूसरी तरफ पौधों व फसलों को भी फायदा होता है। चंदन की फसल के बीच में नकदी के लिए दलहन में मटर, चना की फसल से लाभ मिला है। इसके बाद 1,500 पपीते लगाये, जिसमें 1,400 पौधे से फल मिलना शुरू हो गया है। इन फसलों में भी केवल जैविक खाद का प्रयोग किया गया है। 
-पौधों को देना पड़ता है भोजनडॉ. तिवारी ने बताया कि इन पौधों को भोजन देना पड़ता है। एक चंदन पौधे के भोजन के लिए पांच और पौधे लगाने पड़ते हैं। 12 फीट की दूरी पर चंदन के पौधे रोपे गए हैं। बीच की खाली जगह में भोजन के लिए मीठी नीम, कड़वी नीम, सहजन, केरोजोना, अरहर के पौधे लगाए हैं। समय-समय पर मटर, मसूढ़, चना, सेवा-मेथी की भी खेती करते हैं। इससे उनको नुकसान भी नहीं होता।
-पन्द्रह साल की होती है चंदन की खेतीडॉ. तिवारी ने बताया कि चंदन की फसल 12 साल में तैयार हो जाती है। इतने वर्षों में पौधा वृक्ष का रूप ले लेता और उस वृक्ष की जड़ें व डालें काफी मोटी हो जाती हैं। वर्तमान में हमारी बगिया में इसके पौधें तेजी से बढ़ रहे हैं और आने वाले समय में पेड़ की शक्ल ले लेंगे। हमारे देश में उपयोग का केवल दस प्रतिशत चंदन भारत में होता है, बाकी विदेश से आता है, जिससे इसकी काफी मांग है। 
-पुवाल एवं गोबर की खाद से खेत को करते हैं तैयार 13 बीघे में मुसम्मी, अमरूद, अदरक की खेती करने के लिए खेत की सुरक्षा के लिए तार से घेरा कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही गोबर की खाद, धान के पुवाल को सड़ा कर जैविक खाद से खेत को तैयार करेंगे। इसके बाद रोपण किया जाएगा।

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