Saturday, April 4, 2026
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UP news ; तनाव कम करने और मस्तिष्क को सतर्क रखने में सहायक है आयोडीन

हाथरस (हि.स.)। राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत मनाए जाने वाले विश्व आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस (21 अक्टूबर) के सम्बन्ध में अंतर्विभागीय बैठक का आयोजन सभागार कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हाथरस में किया गया। आयोडीन के महत्व को समझने और इसकी कमी से होने वाले विकारों के प्रति जागरूक करने के लिए 21 अक्टूबर को पूरे विश्व में आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस के रूप में मनाया जाता है ।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. बृजेश राठौर ने कहा कि आयोडीन एक प्राकृतिक तत्व है जिस पर हमारे शरीर की महत्वपूर्ण  क्रियाएं व थायरॉइड ग्रंथि निर्भर हैं, जो कि शक्ति का निर्माण करती है व हानिकारक कीटाणुओं को मारती है। आयोडीन मन को शांति प्रदान करता है तथा तनाव कम करता है और मस्तिष्क को सतर्क रखता है। यह बाल, नाखून, दांत और त्वचा को उत्तम स्थिति में रखने में मदद करता है। आयोडिन की कमी से गर्दन के नीचे अवटु (थाईराइयड) ग्रंथि की सूजन (गलगंड) हो सकती है और हार्मोन का उत्पादन बन्द हो सकता है, जिससे शरीर की सभी गतिविधियां अव्यवस्थित हो सकती हैं।
इसकी कमी से मन्द मानसिक प्रतिक्रियायें, धमनियों में सख्ती एवं मोटापा हो सकता है। आयोडीन शरीर व मस्तिष्क दोनों की सही वृद्धि, विकास व संचालन के लिए आवश्यक है। आयोडीन की कमी से घेंघा रोग हो सकता है। घेंघा रोग होने पर शरीर में चुस्ती-स्फूर्ति नहीं रहती। सुस्ती व थकावट महसूस होती है। सामान्य व्यक्ति के मुकाबले उसमें काम करने की ताकत भी कम हो जाती है। घेंघा रोग के अलावा बच्चों में मानसिक मन्दता, अपंगता, गूंगापन, बहरापन, गर्भपात, गर्भ में शिशु की मृत्यु हो सकती है।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मधुर कुमार ने कहा कि आयोडीन की कमी से नवजात शिशु के शरीर व दिमाग की वृद्धि व विकास में हमेशा के लिए रुकावट आ सकती है। छोटे बच्चों, नौजवानों व गर्भवती के लिए आयोडीन बहुत जरूरी है। मां के शरीर में आयोडीन की कमी के चलते पैदा होने वाले बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास बाधित हो सकता है। आयोडीन की कमी के कारण बहुत से बच्चे ऐसे पैदा होते हैं जिनकी सीखने की क्षमता कम होती है और मंद बुद्धि का शिकार हो जाते हैं।
उन्होंने बताया कि मानसिक और शारीरिक विकास के लिए आयोडीन एक महत्वपर्ण पोषक तत्व है। कोविड काल के चलते हमें यह जानना बड़ा जरूरी है कि अन्य विकारों के अलावा शरीर में आयोडीन की कमी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी प्रभावित करती है। चुस्त दुरुस्त रहने और बीमारियों से बचे रहने के लिए शरीर में आयोडीन की संतुलित मात्रा का होना जरूरी होता है। आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों के बचने के लिए आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना चाहिए। बुधवार को जनपद के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया,  जिसमें आशा और एएनएम को आयोडीन का महत्व और आयोडीन की कमी होने से गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है के बारे में बताया गया। गर्भपात तनाव और अवसाद की तरफ ले जा सकता है। बार-बार गर्भपात होना सही नहीं है। गर्भावस्था के दौरान सभी गर्भवती को आयोडीन की कमी दूर करने के लिए हेल्दी और आयोडीन से भरपूर भोजन का सेवन शुरू करना कर देना चाहिए। आयोडीन शिशु के संपूर्ण विकास के लिए भी जरूरी पोषक तत्व है।
आयोडीन की कमी के लक्षण- कमजोरी होना, वजन बढ़ना, थकान महसूस होना, त्वचा में रुखापन, बाल झड़ना, दम घुटना, नींद अधिक आना, माहवारी अनियमित होना, हृदय गति धीमी होना तथा याददाश्त कमजोर होना आदि।
आयोडीन की कमी से बचाव कैसे करें-
शरीर में आयोडीन की कमी न होने पाए, इसके लिए आयोडाइज्ड नमक का प्रयोग करें। एक वयस्क के लिए प्रतिदिन 150 माइक्रो ग्राम आयोडीन की आवश्यकता होती है। अधिक मात्रा में आयोडीन वाले आहार है मूली, शतावर (एस्पेरेगस रेसिमोसस), गाजर, टमाटर, पालक, आलू, मटर, खुंभी, सलाद, प्याज, केला, स्ट्राबेरी, समुद्र से प्राप्त होने वाले आहार, अंडे की जर्दी, दूध, पनीर और कॉड-लिवर तेल आदि।

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