कानपुर (हि.स.)। असत्य पर सत्य की विजय का पर्व दशहरा हर साल उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस पर्व पर रावण के पुतले के दहन करने की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। शहर व गांव के चौक-चौराहों पर युवा व बच्चे मिलकर रावण के पुतले का दहन करते हैं। इस खास अवसर के लिए रावण के पुतले की मांग बनी रहती है। शहर व गांव के कुछ कारीगर इस कार्य में निपुण हैं, जो रावण का पुतला बनाते हैं। पुतला तैयार करने वाले कारीगर इस साल मांग नहीं होने से निराश हैं। उन पर बेराजगारी का साया छा गया है।
जहां बीते वर्ष तक पुतला बनाने वाले कारीगरों को महीने भर पहले से दसियों आर्डर मिलना शुरू हो जाते थे। वहीं कोरोना काल के चलते इस बार संख्या कम हो गयी है। इस बार कारीगरों को इक्का दुक्का ही पुतला बनाने के आर्डर मिल पाए हैं। पुतला बनाने वाले कारीगरों को उम्मीद है अब जब कम ही दिन बचे है तो शायद आने वाले दिनों में लोग ऑर्डर लेकर पहुंचे। इस साल कोरोना वायरस के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना के कारण इस साल उत्सव फीका रहने की आशंका है।
मालूम हो कि, इस साल कोरोना वायरस संक्रमण ने सभी त्योहारों के उत्साह को फीका कर दिया है। सभी पर्व सादगी से मनाए जा रहे हैं। इस साल जिला प्रशासन ने भी पुतला दहन के लिए भी कड़े नियम जारी कर दिए हैं, जिसके तहत ही रावण के पुतले का दहन होगा। नगर के जीटी रोड किनारे रहकर पुतला बनाने का कार्य करने वाला परिवार अब छोटे पुतलों को तैयार करने में जुट गया है उन्हे उम्मीद है कि रावण मेघनाद व कुम्भकरण के पुतले बनवाने वाले उनके जीवन में थोड़ा सा उजाला अवश्य लेकर आएंगे।
