Tuesday, March 3, 2026
Homeउत्तर प्रदेशUp उपचुनाव: भाजपा-सपा की आमने-सामने टक्कर की उम्मीद, प्रचार थामा

Up उपचुनाव: भाजपा-सपा की आमने-सामने टक्कर की उम्मीद, प्रचार थामा

लखनऊ(हि. स.)। उत्तर प्रदेश में उपचुनाव के लिए मतदान की रविवार शाम से उल्टी गिनती शुरू हो गई है। प्रदेश में सात विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव में मतदाताओं के बीच प्रचार करने उतरी पार्टियों में भाजपा और सपा ने बाजी मार ली है। राजनीति विशेषज्ञों की मानें तो उपचुनाव में सपा और भाजपा के बीच ही टक्कर होने की उम्मीद है। 

 प्रचार के आखिरी दिन जहां हर पार्टी के बड़े नेताओं ने अपनी पूरी ताकत लगाकर प्रचार किया तो वहीं भाजपा और सपा के नेताओं ने प्रत्याशियों की जीत को पक्की करने के लिए पूरी तैयारी के साथ सभाएं भी की गई। 
 प्रचार के दौरान सपा की तरफ से युवा चेहरों के साथ ही बुजुर्ग नेताओं ने भी अपना-अपना दमखम दिखाया। समाजवादी पार्टी ने जातीय समीकरण को देखते हुए भी अपने नेताओं को विधानसभा क्षेत्रों में भेजा। मल्हनी विधानसभा सीट पर लकी यादव प्रत्याशी के प्रचार के लिए पूर्व विधायक अभय सिंह तक को पार्टी में प्रचार में उतार दिया। 
 भारतीय जनता पार्टी ने भी मल्हनी विधानसभा सीट पर पूरी ताकत के साथ अपने नेताओं को मैदान में प्रचार के लिए उतारा। हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े पदाधिकारियों ने भी हिन्दुत्व के एजेण्डा को धार दिया। वाहिनी के नेताओं ने भी भाजपा प्रत्याशी मनोज सिंह का जमकर प्रचार किया। प्रचार के दौरान अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर निर्माण का मुद्दा भी छाया रहा। कानपुर की घाटमपुर सीट और देवरिया की सदर सीट पर मंदिर मुद्दे को भाजपा के प्रचारकों को द्वारा चर्चा में रखा गया। मोदी व योगी सरकार में मंदिर निर्माण के कार्य को पूरा करने को लेकर मतदाताओं में खासा उत्साह दिखाई पड़ा। 
 समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा बसपा और भाजपा के अंदर से मिले होने की बात को भी उपचुनाव के प्रचार में तेजी से उठाया गया। समाजवादी पार्टी के नेताओं द्वारा अपनी सभाओं में इसे मुद्दा बनाकर प्रस्तुत किया गया। उन्नाव के बांगरमऊ सीट पर प्रचार के बीच में ही कांग्रेस के कद्दावर नेता पूर्व सांसद अन्नू टंडन के सपा में जाने की भी चर्चा ने जोर पकड़ा है, जिसका सीधा असर चुनाव पर दिखाई पड़ा। 
 गौरतलब है कि पिछली बार सातों विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में छह पर भाजपा और एक पर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा। इस बार भी दोनों पार्टियां अपना कब्जा बरकरार रखकर अन्य सीट जीतने पर पूरी ताकत लगाकर प्रचार की हैं।

RELATED ARTICLES

Most Popular