अवध संस्कृति उत्कर्ष समिति ने नौ विभूतियों को दिया ‘अवध संस्कृति सम्मान’
Tulsi Jayanti पर ऐतिहासिक संगोष्ठी, साहित्य-जगत की गरिमा को किया गया यादगार सम्मान
राज्य ब्यूरो
नई दिल्ली। गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यकाम भवन में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘सूकरखेत और गोस्वामी तुलसीदास’ ने साहित्य, इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र में एक नई चेतना का संचार किया। यह आयोजन Tulsi Jayanti को समर्पित था और इसमें देशभर के विद्वानों, साहित्यकारों, प्रशासकों तथा शिक्षाविदों ने सहभागिता कर विषय की गहनता को नई दृष्टि दी।
संगोष्ठी की अध्यक्षता गोंडा के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्रीनारायण तिवारी ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अधिष्ठाता प्रो. अनिल राय ने ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर गोंडा जिले के सूकरखेत क्षेत्र को गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह भूभाग अयोध्या से घाघरा घाट तक विस्तारित है और अनेक ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है।
Tulsi Jayanti पर दिल्ली विश्वविद्यालय के केन्द्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष राजेश सिंह ने भी इस क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तुलसीदास को रामकथा की दीक्षा उनके गुरु नरहरिदास जी द्वारा इसी क्षेत्र में दी गई थी, जिससे यह क्षेत्र तुलसी साहित्य की जन्मभूमि बन जाता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संत शरण त्रिपाठी ने किया और आयोजन के अंत में संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश कुमार सिंह ने सभी उपस्थितजनों के प्रति आभार जताया।
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इस विशेष अवसर पर Tulsi Jayanti के उपलक्ष्य में विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली 9 विभूतियों को ‘अवध संस्कृत सम्मान’ से नवाजा गया। सम्मानित हस्तियों में व्यापार, न्याय, प्रशासन, साहित्य और लोककला जगत के प्रतिनिधि शामिल रहे! सम्मानित होने वाले लोगों में ठाकुर अनूप सिंह (व्यापार), विनोद सोलंकी (पर्यावरण संरक्षण), मनोज सुलतानपुरी (रंगकर्म एवं लोकनाट्य), ऋषिपाल महाराज (अवधी साहित्य), डॉ. संत शरण त्रिपाठी (हिंदी साहित्य), एसीजेएम आनंद उपाध्याय (न्यायिक सेवा), सुरेंद्र नाथ तिवारी (प्रशासनिक सेवा), जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी फिरोजाबाद और मनोज कुमार सिंह (पुलिस सेवा) शामिल हैं!
Tulsi Jayanti के इस भव्य आयोजन में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव मिश्रा और उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने विशेष भागीदारी की। उन्होंने इस आयोजन को जनमानस को भारतीय संस्कृति और तुलसी साहित्य से जोड़ने वाला एक प्रेरक प्रयास बताया। कार्यक्रम में जितेंद्र शुक्ला, गौरव द्विवेदी, ठाकुर सूर्यकांत सिंह, संदीप सिंह, प्रधान दुर्जनपुर अशोक सिंह सहित सैकड़ों तुलसी-प्रेमियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।
Tulsi Jayanti के इस कार्यक्रम ने जहां गोस्वामी तुलसीदास की परंपरा को पुनर्स्मरण कराया। वहीं सूकरखेत क्षेत्र की ऐतिहासिक मान्यता को साहित्यिक विमर्श में पुनः स्थापित करने का भी मंच प्रदान किया।
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