सिक्किम में साथी को बचाते हुए शशांक तिवारी ने गंवाई जान
शशांक तिवारी की बहादुरी ने देश को गर्व और गम दोनों दिया
मनोज तिवारी
अयोध्या। रामनगरी के मझवां गद्दोपुर गांव के निवासी और भारतीय सेना के युवा लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी सिक्किम में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए। उन्होंने अपने साथी जवान की जान बचाने के लिए नदी में छलांग लगाई और खुद वीरगति को प्राप्त हो गए। उनकी इस असाधारण वीरता ने पूरे देश को स्तब्ध और गौरवान्वित कर दिया है।
शशांक तिवारी की शहादत से अयोध्या शोकाकुल
22 वर्षीय शशांक तिवारी ऑपरेशनल गश्त के दौरान सिक्किम की एक बर्फीली नदी में गिरे अपने साथी को बचाने उतरे। साथी तो बच गया, लेकिन शशांक तिवारी नदी के तेज बहाव में बह गए और उनकी जान नहीं बच सकी। यह हादसा गुरुवार की सुबह हुआ। शशांक तिवारी का पार्थिव शरीर सेना के विशेष विमान से सिलीगुड़ी के बागडोगरा एयरपोर्ट होते हुए अयोध्या लाया जाएगा। शनिवार को जमथरा घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
बचपन से ही था देशभक्ति का जज्बा
शशांक तिवारी बचपन से ही बेहद मेधावी और अनुशासित छात्र रहे। अयोध्या के जिंगल बेल स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और 2019 में जेबीए एकेडमी से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। उसी वर्ष उनका चयन एनडीए में हो गया। ट्रेनिंग के बाद 2023 में उन्हें भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त हुआ और सिक्किम में उनकी पहली तैनाती हुई।
रिश्तेदारों के अनुसार, शशांक तिवारी सेना में जाना ही चाहते थे और इसके लिए बचपन से ही तैयारी करते रहे। वे घर के इकलौते बेटे थे। अभी उनका विवाह नहीं हुआ था। उनकी बड़ी बहन दुबई में कार्यरत हैं और शोक की इस घड़ी में परिवार के साथ अयोध्या पहुंची हैं।
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माता को नहीं दी गई दुखद सूचना
शशांक तिवारी की मां नीता तिवारी हृदय रोग से पीड़ित हैं। उनकी नाजुक हालत को देखते हुए अभी तक उन्हें बेटे की शहादत की खबर नहीं दी गई है। पिता जंग बहादुर तिवारी मर्चेंट नेवी में कार्यरत हैं और अमेरिका में हैं। जैसे ही उन्हें सूचना मिली, वे तुरंत भारत रवाना हो गए और जल्द ही अयोध्या पहुंचेंगे। परिजन चाहते हैं कि पिता के आने के बाद ही मां को यह दुखद खबर दी जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की बड़ी घोषणा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शशांक तिवारी की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने अयोध्या पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी और घोषणा की कि शहीद की स्मृति में अयोध्या में एक भव्य स्मारक बनाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा किया।
पूरे गांव में शोक की लहर
अयोध्या के मझवां गद्दोपुर गांव में शशांक तिवारी की शहादत की खबर फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई। गांव के लोग उनके साहस पर गर्व कर रहे हैं लेकिन बेटे की मौत का ग़म भी असहनीय है। उनके घर के बाहर श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों की भीड़ लगी है। स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का सैलाब
सोशल मीडिया पर भी शशांक तिवारी को श्रद्धांजलि दी जा रही है। ट्विटर पर #ShashankTiwari शहीद ट्रेंड कर रहा है। सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं ने भी उनकी शहादत को नमन किया है।

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