समाज सुधार के लिए पंच परिवर्तन जरूरी, राष्ट्र निर्माण में RSS की अहम् भूमिका
वर्ष भर चलने वाले कार्यक्रमों में शाखा विस्तार से लेकर नागरिक कर्तव्यों तक की होगी पहल
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की है। संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने कहा कि आगामी विजय दशमी से लगातार एक वर्ष तक देशभर में सात प्रमुख प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें पथ संचलन, घर-घर सम्पर्क अभियान, हिंदू सम्मेलन, सामाजिक सद्भाव बैठकें, प्रमुख जन गोष्ठियां, युवा कार्यक्रम और शाखा विस्तार जैसे आयोजन शामिल होंगे।
उन्होंने जिला मुख्यालय स्थित संघ कार्यालय पर गुरुवार को संवाददाताओं से कहा कि RSS ने पिछले 100 वर्षों में अपने स्वयंसेवकों के माध्यम से व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा में सतत प्रयास किया है। वैचारिकी, शिक्षा, सेवा, सुरक्षा, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में सक्रिय योगदान के बाद अब संघ ने शताब्दी वर्ष के अवसर पर बड़े पैमाने पर समाज को जोड़ने का संकल्प लिया है।
सालभर चलने वाले RSS के कार्यक्रम
सुभाष जी ने बताया कि RSS द्वारा आयोजित किए जाने वाले सात प्रमुख कार्यक्रम चरणबद्ध रूप से पूरे देश में चलेंगे। दो अक्टूबर 2025 से 15 अक्टूबर 2025 तक गणवेशधारी स्वयंसेवकों का पथ संचलन होगा, जिससे समाज में अनुशासन का संदेश पहुंचेगा। इसके बाद 2 नवम्बर से 2 दिसम्बर 2025 तक घर-घर सम्पर्क अभियान चलेगा, जिसे अब तक का सबसे बड़ा सम्पर्क अभियान बताया गया है।
15 दिसम्बर 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर हिंदू सम्मेलन आयोजित होंगे। फरवरी 2026 में विभिन्न मत और पंथों के प्रतिनिधियों के साथ सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन किया जाएगा। अप्रैल 2026 में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को साथ लेकर RSS की प्रमुख जन गोष्ठियां आयोजित होंगी। अगस्त 2026 को युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 15 सितम्बर 2026 से 10 अक्टूबर 2026 तक शाखा विस्तार का कार्यक्रम चलेगा, जिसमें संघ की अधिक से अधिक शाखाओं का गठन और संचालन किया जाएगा।
पंच परिवर्तन: समाज सुधार का सूत्र
RSS ने समाज में व्यापक सुधार के लिए पंच परिवर्तन का नारा दिया है। इसके अंतर्गत पांच आयाम निर्धारित किए गए हैं – सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य।
सामाजिक समरसता के अंतर्गत जाति-भेद मिटाकर भाईचारे को बढ़ाने पर बल दिया गया है। अनुसूचित जाति-जनजाति के बंधुओं के साथ समानता, उनके घर जाकर सहभागिता और त्योहारों में परस्पर शामिल होना इस दिशा में विशेष पहल होगी।
कुटुंब प्रबोधन के तहत परिवार की एकता और संस्कारों के संवर्धन को प्राथमिकता दी गई है। सप्ताह में एक बार सामूहिक पूजा या महापुरुषों की चर्चा, बच्चों को संस्कारित व्यवहार सिखाना और नित्य मंगल संवाद को परिवार मजबूत बनाने का आधार माना गया है।
पर्यावरण संरक्षण तीसरा आयाम है, जिसके अंतर्गत जल बचाने, प्लास्टिक हटाने और हरियाली बढ़ाने की पहलें शामिल हैं। घर और आसपास पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया गया है।
‘स्व’ का बोध चौथा आयाम है। इसमें व्यक्ति के अस्तित्व और उसके कर्तव्यों की पहचान को महत्वपूर्ण बताया गया है। जब नागरिक जिम्मेदार बनते हैं, तो राष्ट्र स्वतः समृद्ध और उन्नत होता है।
पांचवां आयाम नागरिक कर्तव्य है, जिसमें कानून का पालन, कुरीतियों का उन्मूलन और सामाजिक बुराइयों से मुक्ति की बात की गई है। इसमें नशाबंदी, दहेज प्रथा और मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ अभियान चलाना भी शामिल है।
राष्ट्र निर्माण में RSS की भूमिका
सुभाष जी ने कहा कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्हें व्यवहार में लाकर समाज को संगठित करना है। उन्होंने कहा कि जब नागरिक, परिवार और समाज मिलकर इन मूल्यों का पालन करेंगे, तभी राष्ट्र बल और वैभव से सम्पन्न होकर विश्व को सुख और शांति का मार्ग दिखा सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पंच परिवर्तन का संदेश जन-जन तक ले जाना संघ के स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी होगी। आने वाले समय में शाखाओं के माध्यम से समाज के अभावग्रस्त वर्गों की सेवा और विभिन्न जनहितकारी गतिविधियों को भी जोड़ा जाएगा।
कार्यक्रमों की व्यापकता और चुनौतियां
RSS के प्रस्तावित कार्यक्रम केवल आयोजन भर नहीं हैं, बल्कि समाज में परिवर्तन का माध्यम माने जा रहे हैं। घर-घर सम्पर्क अभियान से लेकर सामाजिक सद्भाव बैठकों तक यह प्रयास है कि हर वर्ग, हर मत और हर पंथ के लोग राष्ट्रहित में जुड़ें। संघ का मानना है कि संगठन शक्ति और अनुशासन के बल पर इन चुनौतियों का समाधान संभव है। यदि पंच परिवर्तन के पांचों आयाम समाज में उतर जाते हैं, तो न केवल परिवार और समाज सशक्त होंगे, बल्कि देश भी वैभव सम्पन्न होकर विश्व को नया मार्ग दिखा सकेगा।
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