Tuesday, January 13, 2026
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रावण की नाभि में मंदोदरी ने लाकर रखवाया था अमृत!

आवास विकास कालोनी में आयोजित 11 दिवसीय श्रीराम कथा को मिला अंतिम विश्राम

अतुल भारद्वाज

गोंडा। अपने पति को अमर करने के लिए रावण की पत्नी मंदोदरी ने देवलोक से स्वयं अमृत लाकर नाभि में रखवाया था। इस बात की जानकारी अमृत को रखने वाले विभीषण और मंदोदरी के सिवा रावण को भी नहीं थी। यह बात अखिल भारतीय श्रीराम नाम जागरण मंच द्वारा आवास विकास कालोनी में आयोजित 11 दिवसीय श्रीराम कथा में रविवार को अन्तर्राष्ट्रीय कथावाचक रमेश भाई शुक्ल ने कही।
श्रीराम कथा के अंतिम दिन मेघनाद, कुंभकर्ण व रावण वध तथा भगवान श्रीराम की राजगद्दी की कथा सुनाते हुए कथावाचक ने कहा कि एक बार युद्ध के दौरान किष्किंधा के राजा बाली के मुक्के से आहत हुए रावण को देखकर उसकी पत्नी ने रावण को अमर बनाने का संकल्प लिया। इसके लिए उसने अपने पिता मय दानव की सहायता मांगी। उनके सहयोग से वह उड़कर देवलोक पहुंची और वहां कड़े सुरक्षा घेरे में होने के बावजूद अमृत की कुछ बूंदे अपने साथ लाने में सफल हो गई। लंका में आकर उसे विभीषण के सहयोग से रावण को बेहोश करके उसकी नाभि में स्थापित करवा दिया। विभीषण अपने समय का प्रसिद्ध शल्यक भी था। इस बात की जानकारी रावण को भी नहीं थी। राम-रावण युद्ध के दौरान भगवान द्वारा एक साथ छोड़े जा रहे 30 वाण जब व्यर्थ हो जा रहे थे, जब विभीषण ने उन्हें यह रहस्य बताते हुए 31 वाण एक साथ छोड़ने का अनुरोध किया था।

रावण वध कथा: रावण की नाभि में अमृत का रहस्य उजागर
रावण वध कथा: रावण की नाभि में अमृत का रहस्य उजागर

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श्रीराम कथा में शुक्ल ने कहा कि रावण के युद्ध भूमि में पहली बार सामने आने पर राम ने उसे प्रणाम किया। रावण ने प्रणाम करने का कारण पूछते हुए कहा-डर गए हो तो लौट जाओ। छोड़ दूंगा तुम्हें। इस पर राम ने जवाब दिया कि प्रणाम आपकी विद्वता को किया है और प्रहार करूंगा रावणत्व पर। अंततः उन्होंने एक साथ 31 वाणों का संधान करके रावण का वध कर दिया। लंका जीतने के बाद राम जब अशोक वाटिका से छाया सीता को लेकर अयोध्या के लिए चले, तो अग्नि परीक्षा के बहाने छाया सीता को अग्नि में समर्पित कर दिया तथा उससे निकली असली सीता को साथ लेकर चल पड़े। चूंकि 10 माह तक छाया सीता भगवान श्रीराम की पत्नी की भूमिका निभा चुकी थीं। इसलिए उनके मन में सर्वगुण सम्पन्न पति पाने की इच्छा जागृत हो गई। उन्होंने कठोर तपस्या की। ब्रम्हाजी के प्रकट होने पर छाया सीता ने पांच बार कहा-हमको पति दो, पति दो, पति दो। इस पर ब्रम्हा ने कहा कि तुम पुष्कर में जाकर तपस्या करो। द्वापर युग में पांचाल राज्य में तुम्हारा जन्म होगा। तब तुम्हारी मांग के अनुरूप तुम्हें पांच पति प्राप्त होंगे। इस प्रकार द्रोपदी पांडवो की पत्नी बनी।
अयोध्या में राम और भरत मिलाप की चर्चा करते हुए कथावाचक ने कहा कि कुशासन को जो दबाकर बैठ जाएगा, वही सुशासन कर पाएगा। ‘दुइ सुत सुंदर सीता जाए’ की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि देश में किसी को भी दो बच्चों से ज्यादा पैदा करने की छूट नहीं मिलनी चाहिए। इस मौके पर आयोजक निर्मल शास्त्री, हरिओम पांडेय, अपर जिला जज नम्रता अग्रवाल, एसएन मिश्र, केएम शुक्ल, सूबेदार शुक्ल, ईश्वर शरण मिश्र, आनंद ओझा, संजय मिश्र, आनंद सिंह, प्रभाशंकर मिश्र आदि उपस्थित रहे।

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