’प्रतापगढ़ कपल’ की तलाश में जुटी एसडीआरएफ-एनडीआरएफ टीम
’प्रतापगढ़ कपल’ समेत नौ पर्यटकों से भरा वाहन नदी में गिर गया था
शिवेश शुक्ल
प्रतापगढ़। जिले से सिक्किम हनीमून पर गया एक नवविवाहित ’प्रतापगढ़ कपल’ लापता हो गया है, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। घटनाक्रम ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। 29 वर्षीय कौशलेंद्र प्रताप सिंह और उनकी 26 वर्षीय पत्नी अंकिता सिंह का वाहन भारी बारिश के दौरान सिक्किम की तीस्ता नदी में गिर गया, जिसके बाद से वे लापता हैं। इस हादसे में उनके साथ सात अन्य लोग भी लापता हैं। इस पूरे मामले ने ’प्रतापगढ़ कपल’ को लेकर सोशल मीडिया से लेकर प्रशासन तक हर जगह बेचैनी फैला दी है।
दंपति के परिवार वालों ने बताया कि 5 मई को शादी के बाद 25 मई को दोनों ट्रेन से सिक्किम के लिए रवाना हुए थे। 26 मई को वे मंगन पहुँचे और फिर घूमने के उद्देश्य से लाचेन गए। 29 मई को जब वे लाचेन से लाचून लौट रहे थे, उसी दौरान यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि वाहन पर्यटकों से भरा हुआ था और भारी बारिश के बीच तीस्ता नदी में जा गिरा।
इस वाहन में ’प्रतापगढ़ कपल’ के अलावा सात अन्य पर्यटक सवार थे। इनमें से दो लोग उत्तर प्रदेश से, दो त्रिपुरा से और शेष चार ओडिशा से बताए जा रहे हैं। ड्राइवर भी लापता है। अधिकारियों के अनुसार अब तक किसी की भी लोकेशन या स्थिति की पुष्टि नहीं हो पाई है।
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’प्रतापगढ़ कपल’ की गुमशुदगी बनी रहस्य, होटल में मिला सामान
लापता कौशलेंद्र के फूफा दिनेश सिंह ने मीडिया को बताया कि सिक्किम में होटल से दंपति का सारा सामान बरामद कर लिया गया है। इससे यह तो स्पष्ट हुआ कि वे होटल से निकले थे, लेकिन यह प्रमाण अब तक नहीं मिला है कि वे तीस्ता नदी में डूबे हैं या किसी अन्य हादसे का शिकार हुए।
दिनेश सिंह के अनुसार, परिवार के कुछ सदस्य सिक्किम पहुंचे और वहां डीआईजी अक्षय सचदेवा, स्थानीय पुलिस अधीक्षक तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर मदद की गुहार लगाई है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें लगातार नदी में तलाशी अभियान चला रही हैं, लेकिन कोई निर्णायक सफलता अब तक हाथ नहीं लगी है।
’प्रतापगढ़ कपल’ की खोज में कोई ठोस सुराग नहीं
अधिकारियों के मुताबिक नदी का बहाव काफी तेज है, जिससे तलाशी अभियान में कई बाधाएं आ रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब ड्रोन और अन्य तकनीकी उपकरणों की सहायता से गहराई में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। परिजन इस असमंजस में हैं कि यदि कपल तीस्ता नदी में बह गया होता तो अब तक कोई न कोई सुराग जरूर मिल गया होता। वहीं, प्रशासनिक अधिकारी इस संभावना से इनकार नहीं कर रहे कि हादसे में सभी लोग बह चुके हों। लेकिन जब तक कोई शव या साक्ष्य नहीं मिलता, तब तक परिजन उम्मीद का दामन थामे हुए हैं।
’प्रतापगढ़ कपल’ की तलाश से उठे कई सवाल
इस घटना ने प्रशासनिक लापरवाही और मौसम चेतावनी प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका के बावजूद पर्यटकों को जोखिम भरे रास्तों पर क्यों जाने दिया गया? स्थानीय प्रशासन पर यह भी आरोप लग रहा है कि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। परिवार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय से अपील की है कि खोज अभियान को उच्च प्राथमिकता दी जाए और जरूरत पड़ी तो सेना की मदद भी ली जाए।
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