Tuesday, January 13, 2026
Homeविज्ञान एवं तकनीकParaspeak: लकवे के मरीजों के लिए है वरदान!

Paraspeak: लकवे के मरीजों के लिए है वरदान!

गुरुग्राम के शिव नाडर स्कूल में पढ़ने वाले छात्र ने तैयार किया एआई टूल

अस्पष्ट भाषण का हिंदी में अनुवाद कर सकता है एआई आधारित डिवाइस Paraspeak

तकनीक डेस्क

गुरुग्राम (हरियाणा)। तकनीक और मानवीय संवेदना जब एक साथ मिलती हैं, तो वे न केवल समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती हैं, बल्कि समाज को नई दिशा भी देती हैं। ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है गुरुग्राम के शिव नाडर स्कूल में पढ़ने वाले 11वीं कक्षा के छात्र प्रणेत खेतान ने, जिन्होंने Paraspeak नामक एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डिवाइस विकसित किया है। यह डिवाइस लकवे से ग्रस्त मरीजों की अस्पष्ट आवाज को पहचानकर उसे स्पष्ट रूप में अनुवाद करता है।

Paraspeak भारत का पहला ऐसा ओपन-सोर्स ऑटोमैटिक स्पीच रिकग्निशन (ASR) सिस्टम है, जो डिसअर्थ्रिया से प्रभावित हिंदी भाषा की आवाजों को समझने और ट्रांसलेट करने में सक्षम है। डिसअर्थ्रिया एक ऐसा मोटर स्पीच डिसऑर्डर है, जो लकवे, पार्किंसन, सीओपीडी (COPD) और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के चलते उत्पन्न होता है। यह रोग व्यक्ति के मस्तिष्क को नहीं, बल्कि आवाज़ उत्पन्न करने वाली मांसपेशियों को प्रभावित करता है।

प्रणेत खेतान बताते हैं कि Paraspeak डिवाइस का विचार उन्हें तब आया जब उन्होंने देखा कि इन रोगों से पीड़ित मरीज संवाद में कितनी कठिनाई महसूस करते हैं। हालांकि उनका मानसिक स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य होता है, लेकिन आवाज़ स्पष्ट नहीं होने से वे अपनी बात दूसरों को समझा नहीं पाते। हिंदी भाषा में इस दिशा में कोई शोध या कार्य नहीं हुआ था, इसलिए प्रणेत ने खुद पहल करते हुए 28 मरीजों से 42 मिनट की रिकॉर्डिंग तैयार की और उसे डेटा ऑगमेंटेशन तकनीक से 20 घंटे तक विस्तारित किया।

यह भी पढें: बहुपति प्रथा: दो भाइयों ने एक ही युवती से रचाई शादी

Paraspeak डिवाइस ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर पर आधारित है, जो ChatGPT और Claude जैसे बड़े भाषा मॉडल्स की तकनीक के समान है। इसका कार्य बेहद सरल है – मरीज डिवाइस में बोलता है, उसकी अस्पष्ट आवाज क्लाउड सर्वर पर पहुंचती है, जहां एआई मॉडल्स उसे प्रोसेस करके स्पष्ट रूप में वापस आउटपुट देते हैं। यह डिवाइस इतना कॉम्पैक्ट है कि इसे गले में पहनकर इस्तेमाल किया जा सकता है, ठीक किसी वेबकैम की तरह।

खास बात यह है कि Paraspeak को बेहद कम बजट में डिजाइन किया गया है। खेतान के अनुसार, इस डिवाइस को तैयार करने की लागत महज ₹2,000 है और इसके संचालन के लिए ₹200 मासिक का डेटा शुल्क पर्याप्त है। यह शुल्क टेलीकॉम सेवा प्रदाता के इंटरनेट पैक के लिए होता है। इस डिवाइस की किफायती प्रकृति इसे आम लोगों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

Paraspeak: लकवे के मरीजों के लिए है वरदान!
लकवे के मरीजों के लिए वरदान बना एआई टूल Paraspeak

प्रणेत बताते हैं कि आरंभ में डिवाइस भारी-भरकम और तारों से भरा हुआ था, लेकिन कस्टम प्रिंटेड सर्किट बोर्ड डिज़ाइन कर उसे छोटा और स्मार्ट बना दिया गया। वह कहते हैं, “मैंने अपने खुद के कस्टम प्रिंटेड सर्किट बनाए हैं, ताकि यह एक स्मार्टफोन की तरह कॉम्पैक्ट और कार्यक्षम हो सके।”

Paraspeak कोई कल्पना मात्र नहीं है, बल्कि एक व्यवहारिक समाधान है। खेतान ने इसे सात अलग-अलग मरीजों पर परीक्षण किया, जिनमें से तीन के वीडियो भी बनाए गए। इन मरीजों में जन्मजात विकार, पक्षाघात, पार्किंसन और सीओपीडी जैसी गंभीर स्थितियां थीं। परीक्षण के दौरान सभी मरीजों ने इस डिवाइस की कार्यक्षमता पर संतुष्टि जताई।

यह भी पढें: जगदीप धनखड़ का इस्तीफाः हाईकमान के दबाव में देर रात लिया फैसला!

इस नवाचार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। Paraspeak को 2025 में ओहायो, अमेरिका में आयोजित Regeneron International Science and Engineering Fair (ISEF) में मान्यता मिली है। साथ ही भारत के IRIS National Fair में भी इसे पहचान मिली है।

डिसअर्थ्रिया जैसी स्थिति आज पार्किंसन के 75% से अधिक मरीजों और एएलएस (एम्योट्रॉफिक लेटरल स्क्लेरोसिस) के अंतिम चरण के लगभग सभी रोगियों में पाई जाती है। ऐसे में Paraspeak जैसे एआई उपकरण उनके लिए आशा की किरण बन सकते हैं। खेतान बताते हैं कि अब तक इस स्थिति के लिए कोई भी बाजार-तैयार समाधान उपलब्ध नहीं था, जिससे यह तकनीक और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

जब उनसे पूछा गया कि तकनीक में उन्हें सबसे ज्यादा क्या उत्साहित करता है, तो खेतान का उत्तर स्पष्ट था, “मैं सहायक तकनीक को लेकर बेहद उत्साहित हूं। टेक्नोलॉजी में इतनी संभावनाएं हैं कि हम बहुत से लोगों के जीवन को बेहतर बना सकते हैं। सबसे प्रभावी समाधान वही हैं, जिनसे किसी के जीवन में तुरंत फर्क दिखाई दे।”

Paraspeak सिर्फ एक डिवाइस नहीं, बल्कि तकनीक और करुणा का संगम है। यह दिखाता है कि जब युवा पीढ़ी समाज की समस्याओं को समझकर समाधान खोजती है, तो तकनीक मानवता की सेवा में सबसे बड़ा साधन बन सकती है। खेतान का यह प्रयास भविष्य की सहायक तकनीकों के लिए एक आदर्श उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

यह भी पढें: योगी-बृजभूषण मुलाकात पर अटकलों को विराम, नेता जी ने बताई अंदर की बात!

पोर्टल की सभी खबरों को पढ़ने के लिए हमारे वाट्सऐप चैनल को फालो करें : https://whatsapp.com/channel/0029Va6DQ9f9WtC8VXkoHh3h अथवा यहां क्लिक करें : www.hindustandailynews.com

नम्र निवेदन: सुधी पाठकों, आपको अवगत कराना है कि आपके द्वारा प्रेषित अनेक खबरें ‘हिंदुस्तान डेली न्यूज’ पोर्टल पर प्रकाशित की जाती हैं; किंतु सभी खबरों का लिंक ग्रुप पर वायरल न हो पाने के कारण आप कई बार अपनी तथा अन्य महत्वपूर्ण खबरों से वंचित रह जाते हैं। अतः आपसे अनुरोध है कि आप सीधे www.hindustandailynews.com पर जाकर अपनी खबरों के साथ-साथ पोर्टल पर प्रकाशित अन्य खबरें भी पढ़ सकते हैं। पोर्टल को और अधिक सूचनाप्रद तथा उपयोगी बनाने के लिए आपके सुझावों का स्वागत है। जानकी शरण द्विवेदी, संपादक-हिंदुस्तान डेली न्यूज, मो. 9452137310

RELATED ARTICLES

Most Popular