Tuesday, January 13, 2026
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Pahalgam Attack : आधी रात क्यों आया अमेरिकी मंत्री का फोन?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने Pahalgam Attack को लेकर साफ कर दी अपनी मंशा

बातचीत के तुरंत बाद एक्स पर Pahalgam Attack को लेकर विदेश मंत्री ने क्या लिखा?

नेशनल डेस्क

नई दिल्ली। Pahalgam Attack को लेकर भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत ने दक्षिण एशिया की कूटनीतिक गतिविधियों को तीव्र कर दिया है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हालिया फोन वार्ता इस हमले के बहाने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता का संकेत बनी। इस बातचीत में पहलगाम आतंकी हमले के अपराधियों को सजा दिलाने की प्रतिबद्धता जताई गई। भारत ने इस हमले को सीमा पार आतंकवाद से जोड़ते हुए पाकिस्तान पर अप्रत्यक्ष रूप से कठोर टिप्पणी की।

इस वार्ता के कुछ ही घंटे बाद एस जयशंकर ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया कि Pahalgam Attack के दोषियों, समर्थकों और योजनाकारों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। उनका यह बयान स्पष्ट रूप से पाकिस्तान को लक्षित करता है, जिससे भारत-पाक के तनावपूर्ण संबंधों में और ठंडक आने की आशंका है।

Pahalgam Attack के बाद अमेरिका की सख्ती
Pahalgam Attack को लेकर अमेरिका भी स्पष्ट रुख में नजर आया। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस हमले पर भारत के साथ संवेदना जताने के साथ-साथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी फोन पर बात की। रुबियो ने पाकिस्तान से कहा कि वह भारत के साथ तनाव कम करे और सीधे संवाद की प्रक्रिया को बहाल करे। अमेरिका ने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़ा रहेगा।
रुबियो की यह बातचीत इस बात का संकेत है कि अमेरिका अब आतंकवाद के मामलों में तटस्थ रहने के बजाय भारत के दृष्टिकोण को प्राथमिकता दे रहा है, खासकर जब मामला सीमा पार से प्रायोजित हिंसा का हो।

Pahalgam Attack पर विदेश मंत्रियों की बातचीत
Pahalgam Attack पर भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों के बीच हुई रणनीतिक बातचीत

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भारत की कूटनीतिक आक्रामकता
Pahalgam Attack के बाद भारत ने सिर्फ बयानबाजी नहीं की, बल्कि विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान में रह रहे भारतीय नागरिकों को तुरंत लौटने की सलाह दी। यह कदम न केवल पाकिस्तान के लिए चेतावनी था बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए भी यह संकेत था कि भारत अब ‘रणनीतिक चुप्पी’ की नीति छोड़ चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी फोन किया और Pahalgam Attack की निंदा करते हुए भारत को हर संभव सहयोग का भरोसा दिया। भारत के लिए यह समर्थन न केवल नैतिक था, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी लाभकारी है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव में पाकिस्तान
Pahalgam Attack की पूरी घटनाक्रम में सबसे अधिक दबाव में पाकिस्तान दिखाई दे रहा है। एक ओर भारत की ओर से लगातार बयानबाजी, दूसरी ओर अमेरिका की सख्त अपीलों ने पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति को कमजोर किया है। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को Pahalgam Attack की जांच में भारत का सहयोग करना चाहिए।
भारत ने यह भी संकेत दिया है कि यदि पाकिस्तान अपनी ज़मीन का दुरुपयोग रोकने में असफल रहता है, तो भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसका विरोध जारी रखेगा।

Pahalgam Attack पर वार्ता करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर
Pahalgam Attack पर वार्ता करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर

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Pahalgam Attack के बहाने वैश्विक समीकरण
Pahalgam Attack ने एक बार फिर भारत की विदेश नीति को केंद्र में ला दिया है। भारत अब सिर्फ जवाब नहीं दे रहा, बल्कि रणनीतिक रूप से हमलों को वैश्विक मंचों पर उठाकर न केवल पाकिस्तान को घेर रहा है, बल्कि खुद को आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक नेता के रूप में स्थापित कर रहा है।

निष्कर्ष
Pahalgam Attack सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं रही, बल्कि इसके बहाने भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिका को अपना मजबूत साझेदार साबित किया है। अमेरिका की स्पष्ट स्थिति और प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप की सीधी बातचीत से स्पष्ट है कि भारत अब वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है। पाकिस्तान के लिए यह घटनाक्रम किसी चेतावनी से कम नहीं।

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