Monday, March 2, 2026
Homeजानकारीकभी भारत के कब्जे में रहा रहस्यमय द्वीप Katchatheevu island, अब श्रीलंका...

कभी भारत के कब्जे में रहा रहस्यमय द्वीप Katchatheevu island, अब श्रीलंका के पास

‘Katchatheevu island’ की रहस्यमयी उत्पत्ति

मछुआरों के लिए बना ‘Katchatheevu island’ जीवन-मृत्यु का प्रश्न

पौराणिकता, राजनीति और पीड़ा—’Katchatheevu island’ के कई रंग

नालेज डेस्क

कच्चातीवु नाम (Katchatheevu island) का यह छोटा-सा द्वीप एक बार फिर सुर्खियों में है। यह कभी भारत का हिस्सा रहा और आज श्रीलंका के कब्जे में हैं। 14वीं सदी में ज्वालामुखी के विस्फोट से बने इस रहस्यमय द्वीप को 1974 में भारत ने श्रीलंका को सौंप दिया था। अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थाईलैंड दौरे के बाद श्रीलंका पहुंचने वाले हैं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस द्वीप से जुड़े विवाद को प्रधानमंत्री के सामने रखने की अपील की है। उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले पर उचित अवसर पर वार्ता अवश्य करेंगे, इसके लिए उन पर दक्षिण राज्यों की तरफ से दबाव है।

कभी भारत के कब्जे में रहा रहस्यमय द्वीप Katchatheevu island, अब श्रीलंका के पास

Katchatheevu island बना है सियासी विषय

स्टालिन ने कहा कि कच्चातीवु का मुद्दा तमिलनाडु के मछुआरों के लिए जिंदगी और मौत का सवाल बन चुका है। उन्होंने पीएम मोदी से आग्रह किया कि श्रीलंका के राष्ट्रपति और अधिकारियों से इस मामले पर गंभीर बातचीत की जाए।

कभी भारत के कब्जे में रहा रहस्यमय द्वीप Katchatheevu island, अब श्रीलंका के पास

यह भी पढें: यूरोपीय संघ के दूतों से मिले राजा भैया

स्टालिन का क्या है तुक

स्टालिन ने आरोप लगाया कि जब से यह द्वीप श्रीलंका को सौंपा गया है, तब से तमिलनाडु के मछुआरे लगातार श्रीलंकाई नौसेना की कार्यवाही का शिकार हो रहे हैं। उन्हें गिरफ़्तार किया जाता है, उनकी नावें जब्त की जाती हैं और उनके रोजगार पर सीधा असर पड़ता है।

कभी भारत के कब्जे में रहा रहस्यमय द्वीप Katchatheevu island, अब श्रीलंका के पास

क्या है इस द्वीप का इतिहास

कच्चातीवु द्वीप पाल्क स्ट्रेट में स्थित है और ऐतिहासिक रूप से भारत और श्रीलंका के बीच की सीमा पर मछुआरों के पारंपरिक इलाके में आता है। लेकिन 1974 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसे एक समझौते के तहत श्रीलंका को सौंप दिया था। तब से लेकर आज तक यह भारत और श्रीलंका के रिश्तों में एक विवाद का कारण बना हुआ है।

कभी भारत के कब्जे में रहा रहस्यमय द्वीप Katchatheevu island, अब श्रीलंका के पास

यह भी पढें: जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी में बगावत

कहां है कच्चतीवू?

कच्चतीवू 285 एकड़ में फैला एक निर्जन द्वीप है, जो भारत और श्रीलंका के बीच स्थित पाल्क स्ट्रेट में आता है। यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम से 12 मील और श्रीलंका के डेल्फ्ट द्वीप से 10.5 मील की दूरी पर है। इस द्वीप पर पीने के पानी की एक बूंद तक नहीं है, लेकिन हर साल सेंट एंटनी चर्च में दो दिन का मेला लगता है जिसमें दोनों देशों के मछुआरे हिस्सा लेते हैं। सेंट एंटनी को मछुआरों का रक्षक माना जाता है।

कभी भारत के कब्जे में रहा रहस्यमय द्वीप Katchatheevu island, अब श्रीलंका के पास

श्रीलंका से हुई थी डील

14वीं सदी में ज्वालामुखी से बने इस द्वीप पर कभी रामनाथपुरम के जमींदार राजा का हक था। लंबे समय तक इसपर कोई अंतरराष्ट्रीय दावा नहीं था। लेकिन 1974 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और श्रीलंका की राष्ट्रपति सिरिमावो भंडारनायके के बीच एक समझौते में इसे श्रीलंका को सौंप दिया गया। इसके बदले भारत को कन्याकुमारी के पास वाज बैंक क्षेत्र मिला, जो समुद्री जैवविविधता के लिए जाना जाता है।

कभी भारत के कब्जे में रहा रहस्यमय द्वीप Katchatheevu island, अब श्रीलंका के पास

तब भी हुआ था विरोध

इस समझौते का तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने विरोध किया था, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे दरकिनार कर दिया। 1976 में समुद्री सीमाएं फिर से तय की गईं और भारत ने वाज बैंक को अपने अधिकार में ले लिया।

कभी भारत के कब्जे में रहा रहस्यमय द्वीप Katchatheevu island, अब श्रीलंका के पास

यह भी पढें: BIMSTEC में भारत की भूमिका अब अपरिहार्य

पोर्टल की सभी खबरों को पढ़ने के लिए हमारे वाट्सऐप चैनल को फालो करें : https://whatsapp.com/channel/0029Va6DQ9f9WtC8VXkoHh3h अथवा यहां क्लिक करें : www.hindustandailynews.com

कलमकारों से: तेजी से उभरते न्यूज पोर्टल www.hindustandailynews.com पर प्रकाशन के इच्छुक कविता, कहानियां, महिला जगत, युवा कोना, सम सामयिक विषयों, राजनीति, धर्म-कर्म, साहित्य एवं संस्कृति, मनोरंजन, स्वास्थ्य, विज्ञान एवं तकनीक इत्यादि विषयों पर लेखन करने वाले महानुभाव अपनी मौलिक रचनाएं एक पासपोर्ट आकार के छाया चित्र के साथ मंगल फाण्ट में टाइप करके हमें प्रकाशनार्थ प्रेषित कर सकते हैं। हम उन्हें स्थान देने का पूरा प्रयास करेंगे : जानकी शरण द्विवेदी (प्रधान संपादक) मोबाइल- 9452137310 E-Mail : hindustandailynews1@gmail.com

RELATED ARTICLES

Most Popular