विश्वविद्यालय के चांसलर प्रो. वसीम अख्तर ने प्रो. सिद्दीकी को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर दी बधाई
संवाददाता
लखनऊ। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार एवं कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय के डीन, प्रोफेसर मोहम्मद हारिस सिद्दीकी ने एक बार फिर अपनी शानदार उपलब्धियों से पूरे देश में राष्ट्रीय पुरस्कार की धूम मचा दी है। कृषि शिक्षा, अनुसंधान और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह राष्ट्रीय पुरस्कार उन्हें नई दिल्ली में आयोजित 16वें एग्रीकल्चर लीडरशिप कॉन्क्लेव 2025 के दौरान एग्रीकल्चर टुडे ग्रुप द्वारा प्रदान किया गया।
इस अवसर पर देश के जाने-माने कृषि एवं ग्रामीण विकास विशेषज्ञ और कई वरिष्ठ अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. मनोज नारदेव सिंह, महासचिव, अफ्रीकन एशियन रूरल डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (AARDO) थे। अध्यक्षता इंडियन चैंबर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर (ICFA), नई दिल्ली के चेयरमैन डॉ. एम. जे. खान ने की।
राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में भारत के ‘बांस मैन’ के नाम से मशहूर पाशा पटेल, हरियाणा के पूर्व कृषि मंत्री ओपी धनखड़ और भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति पी. सदाशिवम समेत कई प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल रहीं। इस आयोजन में प्रो. सिद्दीकी के राष्ट्रीय पुरस्कार को लेकर इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में जबरदस्त खुशी का माहौल है।
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इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के कृषि समुदाय में राष्ट्रीय पुरस्कार की घोषणा होते ही उत्साह की लहर दौड़ गई। विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं चांसलर प्रो. सैयद वसीम अख्तर ने प्रो. सिद्दीकी को बधाई देते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय पुरस्कार न केवल प्रो. सिद्दीकी की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि इंटीग्रल यूनिवर्सिटी की शिक्षा गुणवत्ता और समाज के प्रति उसकी गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण भी है।
चांसलर ने आगे कहा कि इंटीग्रल यूनिवर्सिटी हमेशा समाज और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध रही है और यह राष्ट्रीय पुरस्कार हमारे मिशन को और अधिक मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय इस दिशा में और भी दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा।
प्रो. सिद्दीकी का राष्ट्रीय पुरस्कार इस बात का प्रतीक है कि कैसे एक शिक्षक और वैज्ञानिक समाज में परिवर्तन लाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनका यह योगदान केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों और कृषि नवाचार के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
कृषि शिक्षा और अनुसंधान में उनका समर्पण तथा लगातार किए गए प्रयासों के कारण ही उन्हें यह राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। कृषि विकास की दिशा में उनका कार्य आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देगा और उन्हें विज्ञान एवं तकनीकी शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।
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