राज्य डेस्क
हैदराबाद। हैदराबाद अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है। रविवार सुबह चारमीनार के पास गुलजार हाउस की एक इमारत में भीषण आग लगने से 17 लोगों की जान चली गई। मरने वालों में आठ मासूम बच्चे भी शामिल हैं। यह हादसा न सिर्फ भयावह था, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की ओर भी इशारा करता है।
हैदराबाद अग्निकांड की शुरुआत सुबह 6 बजे
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस अधिकारियों के अनुसार हैदराबाद अग्निकांड की शुरुआत रविवार सुबह करीब 6 बजे हुई, जब शॉर्ट सर्किट के कारण इमारत में आग लग गई। अग्निशमन विभाग को सुबह 6ः30 बजे फोन किया गया, लेकिन जब तक दमकल दल मौके पर पहुंचा, तब तक स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी थी।
दमकल विभाग की कमी ने बढ़ाया हादसे का दर्द
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दमकल विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे। भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें मौके पर बताया गया कि दमकल विभाग पूरी तरह सुसज्जित नहीं था। उन्होंने इस संबंध में केंद्र सरकार से बात करने का आश्वासन दिया।

हैदराबाद अग्निकांड में एक ही परिवार के 17 लोग फंसे
हैदराबाद अग्निकांड की एक और भयावह सच्चाई यह है कि आग की चपेट में आए 17 मृतकों में से कई एक ही परिवार के सदस्य थे। कांग्रेस सांसद अनिल कुमार यादव ने बताया कि एक ही परिवार के 17 लोग इस हादसे में फंस गए थे। कुछ को बचा लिया गया, जबकि कई को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया।
पीएम मोदी ने जताया शोक, किया मुआवजे का एलान
हैदराबाद अग्निकांड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताया है। पीएमओ द्वारा जारी बयान में कहा गया कि मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, घायलों को 50,000 रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। प्रधानमंत्री की इस संवेदनशीलता को पीड़ित परिवारों के लिए एक राहत के रूप में देखा जा रहा है।
20 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती
हैदराबाद अग्निकांड में सिर्फ मौतें ही नहीं हुईं, कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हैं। एआईएमआईएम के एक विधायक ने बताया कि लगभग 20 से अधिक लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। राज्य सरकार की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाए।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भी हुए भावुक
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने भी इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राहत और बचाव कार्यों में किसी प्रकार की कोताही न हो। मुख्यमंत्री लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
हैदराबाद अग्निकांड से उठे कई सवाल
इस हैदराबाद अग्निकांड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ऐतिहासिक और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम हैं? क्या दमकल विभाग के पास पर्याप्त संसाधन हैं? क्या प्रशासन ने पहले से इस इमारत की जांच की थी? इन सवालों का जवाब अब सरकार और प्रशासन को देना होगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और केंद्र सरकार की निगरानी
हैदराबाद अग्निकांड को लेकर कांग्रेस, भाजपा और एआईएमआईएम जैसे प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता मौके पर पहुंचे। केंद्र सरकार के मंत्री जी. किशन रेड्डी, कांग्रेस के अनिल यादव, और अन्य नेताओं ने न सिर्फ बचाव अभियान की निगरानी की बल्कि पीड़ितों से भी मुलाकात की। यह दर्शाता है कि घटना की गंभीरता को राजनीतिक स्तर पर भी समझा गया है।

हैदराबाद अग्निकांड चेतावनी है या प्रशासनिक विफलता?
हैदराबाद अग्निकांड कोई सामान्य दुर्घटना नहीं है। यह एक चेतावनी है कि शहरी क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा के उपायों की गंभीर समीक्षा होनी चाहिए। यदि प्रशासन सतर्क होता, यदि संसाधन पूरे होते, तो शायद 17 की जगह 0 मौत होती। अब वक्त आ गया है कि सरकार और स्थानीय निकाय इस पर एक्शन लें, नहीं तो ऐसे हादसे फिर से दोहराए जाएंगे।
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