Sunday, February 8, 2026
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Hospital tragedy: निजी अस्पताल में दो नवजातों की दर्दनाक मौत

ताला बंद कर अस्पताल संचालक और चिकित्सक फरार, Hospital tragedy से सनसनी

अतुल भारद्वाज

गोंडा। Hospital tragedy ने जिले को झकझोर कर रख दिया है। बृहस्पतिवार को नगर कोतवाली क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित एक निजी अस्पताल में दो नवजात शिशुओं की मौत हो गई। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया, जबकि परिजनों ने पुलिस में तहरीर देकर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. जेएम चिश्ती ने बताया कि सतईपुरवा निवासी मोहित कुमार की पत्नी मनीषा का प्रसव पांच सितंबर को महिला चिकित्सालय में हुआ था। नवजात की तबीयत बिगड़ने पर उसे बुधवार को बहराइच रोड पर भाजपा कार्यालय के निकट संचालित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन बृहस्पतिवार को बच्चे की मौत हो गई।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने उन्हें सादे कागज पर 54,482 रुपये का बिल थमा दिया, जबकि वे पहले ही करीब 45 हजार रुपये जमा कर चुके थे। शेष राशि जमा किए बिना नवजात का शव देने से मना कर दिया गया। मोहित ने पुलिस और प्रशासन से लिखित शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। आरोप यह भी है कि महिला चिकित्सालय में तैनात एक डॉक्टर द्वारा ही इस निजी अस्पताल में अवैध रूप से नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) संचालित की जा रही थी।

इसी बीच अस्पताल में भर्ती एक अन्य नवजात ने भी दम तोड़ दिया। कटरा बाजार क्षेत्र के कोटिया मदारा निवासी विनय सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी किरन सिंह का प्रसव 10 सितंबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटरा बाजार पर हुआ था। नवजात की हालत गंभीर होने पर उसे भी इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां गुरुवार देर शाम करीब छह बजे मौत हो गई।

लगातार दो नवजातों की मौत के बाद अस्पताल परिसर में हंगामा मच गया। मौके पर पहुंचे पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मरीजों को सरकारी अस्पतालों में शिफ्ट कराया और अस्पताल के एनआईसीयू को ताला बंद कर दिया।

कोतवाली नगर प्रभारी निरीक्षक विवेक त्रिवेदी ने बताया कि मोहित और विनय ने लिखित तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि दोनों परिजनों ने नवजातों का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। फिलहाल मामले की जांच मिश्रौलिया चौकी प्रभारी को सौंपी गई है।

इस hospital tragedy ने जिले में अवैध अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन अस्पताल संचालक और चिकित्सकों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, जबकि स्थानीय लोग भी इस तरह की घटनाओं पर कड़ी निगरानी की मांग कर रहे हैं।

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