Tuesday, March 3, 2026
Homeदेवीपाटन मंडलगोंडाGonda News: सर्दी के मौसम में ऐसे करें शिशु की देखभाल

Gonda News: सर्दी के मौसम में ऐसे करें शिशु की देखभाल

शिशु के सिर, पैर और छाती को ढ़ककर रखें

ठंड और कुपोषण से बचाव के लिए शिशु को दें ‘कंगारू मदर केयर’

जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। हर मां-बाप अपने बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहते हैं। नवजात शिशु को लेकर यह चिंता और भी ज्यादा रहती है। उत्तर भारत में सर्दियों का मौसम आ चुका है। ऐसे में शिशुओं की खास देखभाल बेहद जरूरी है। शिशु को सर्दी से बचाव के लिए उसकी छाती को दो या तीन मोटे ऊनी कपड़ों से ढक देते हैं लेकिन उसके पैरों व सिर को नहीं ढकते। लोगों में भ्रामकता रहती है कि शिशु को ठंड छाती के जरिये जल्दी लगती है। जबकि इसके उल्टे पैरों व सिर से सर्दी ज्यादा लगती है। यह कहना है जिला महिला अस्पताल के नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राम लखन का। डॉ राम लखन के अनुसार, शिशु की छाती के साथ-साथ सर व पैर भी ढककर रखना जरूरी है। खासकर कम वजन के बच्चो में ब्राउन फैट की मात्रा कम होती है, जिसकी वजह से उन्हें ठंड लगने की सम्भावना अधिक होती है। ऐसे में उन्हें ठंड से बचाने के लिए पूरे शरीर को ढकना आवश्यक होता है।
डॉ राम लखन कहते हैं कि दुनिया में 30 प्रतिशत शिशुओं की मौत का कारण दस्त, निमोनिया व सांस की बीमारी से होती है। हमारे देश में शिशुओं में होने वाली मौत का यह आंकड़ा 40 प्रतिशत तक है। उन्होंने कहा कि पोलियो उन्मूलन, रक्तदान, एड्स सहित अनेक बीमारियों को लेकर तो लोग जागरुक हुए हैं, लेकिन शिशुओं की इन गंभीर बीमारियों को लेकर अभी भी जागरूकता की बेहद कमी है। उनका कहना है कि सर्दी में शिशुओं की देखभाल के लिए उनके शरीर को तीन भागों में विभाजित करके समझना होगा। पेट से नीचे का भाग ज्यादा संवेदनशील होती है, इसलिए बच्चे चाहे चलने लगे या नहीं उनके पैरों को ढंक कर रखना चाहिए। उनकी छाती के भाग को उतना ही ढकना चाहिए, जितनी जरूरत हो तथा तीसरा भाग है सिर। सिर से शिशु को ठंड ने लगे इसके लिए उसे ऊनी टोपी पहनाकर रखनी चाहिए। कपड़ा ऐसा होना चाहिए कि शिशु को पर्याप्त ऑक्सिजन मिलती रहे। इसके अलावा शिशु को बदलते तापमान में नहीं ले जाना चाहिए। जैसे की हीटर वाले कमरे में रहने के बाद बाहर के मौसम में ले जाना। शिशु को ऐसी परिस्थिती से बचाना चाहिए। शिशु की देखभाल के लिए अपने डॉक्टर से समय-समय पर सलाह लेते रहना चाहिए।
डॉ राम लखन के अनुसार, कम वजन के जन्मे शिशुओं को हाइपोथर्मिया के आलावा अन्य बीमारियों का भी खतरा बना रहता है। कंगारू मदर केयर नवजात शिशुओं के वजन में वृद्धि के साथ-साथ उन्हें हाइपोथर्मिया और कई अन्य बीमारियों से भी सुरक्षा प्रदान करती है। इस विधि में नवजात शिशु को कंगारू की तरह माँ अपने सीने से इस प्रकार लगा कर रखती है कि माँ की त्वचा से शिशु की त्वचा का सम्पर्क बना रहे। त्वचा के संपर्क से शिशु को गर्माहट मिलती है जो उसके विकास में सहायक होता है, बच्चे का वजन बढ़ता है और उसे सांस लेने में आसानी होती है। इस विधि से माँ और शिशु के बीच लगाव बढ़ने के साथ स्तनपान को भी बढ़ावा मिलता है।

RELATED ARTICLES

Most Popular