योग्य दम्पतियों को परिवार नियोजन के साधन अपनाने के लिए किया गया प्रेरित
जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। गर्भनिरोधक उपायों के प्रति जागरूकता लाने और युवाओं को सही उम्र में प्रजनन का निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए जिले भर में उत्सव के रूप में खुशहाल परिवार दिवस मनाया गया। इस मौके पर जिला महिला अस्पताल समेत समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर स्टाल लगाकर गर्भ निरोधक संसाधनों के बारे में योग्य दम्पतियों को जागरूक किया गया और परिवार नियोजन के अस्थायी संसाधनों का वितरण तथा स्थायी साधनों की सेवायें प्रदान की गयीं। इस मौके पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ मलिक आलमगीर ने कहा कि हमारे संसाधन सीमित हैं, ऐसे में आबादी को भी सीमित रखना बहुत ही जरूरी है। दो बच्चों के जन्म के बीच कम से कम तीन साल का अंतर रखना चाहिए ताकि महिला का शरीर पूरी तरह से दूसरे गर्भधारण के लिए तैयार हो सके। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी व्यापक सुधार लायी जा सकती है!
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इसके अलावा उन्होंने नव दम्पतियों को शादी के दो साल बाद ही बच्चे के बारे में सोचने के प्रति जागरूक करने की बात कही, क्योंकि पहले जरूरी है कि पति-पत्नी एक-दूसरे को अच्छी तरह से समझें, परिवार को समझें और अपने को आर्थिक रूप से इस काबिल बना लें कि अच्छी तरह से बच्चे का लालन-पालन कर सकें, तभी बच्चा पैदा करने की योजना बनाएं। साथ ही कहा कि पुरुषों को परिवार नियोजन के साधन अपनाने के लिए स्वयं पहल करनी चाहिए। अधिक बच्चों को पैदा करना मर्दानगी की निशानी नहीं है। इससे परिवार और समाज पर आर्थिक तंगी का अधिक प्रभाव पड़ता है। वहीं सीएचसी कर्नलगंज के अधीक्षक डॉ सुरेश चंद्रा ने कहा कि अगर बच्चों की संख्या और उनके पैदा होने के समय पर नियंत्रण है, तो महिला अधिक स्वस्थ रहेगी। फिर भी, यह निर्णय लेना कि वह परिवार नियोजन का प्रयोग करना चाहती है कि नहीं, उसका अधिकार होना चाहिए क्योंकि उसके शरीर को ही गर्भ का बोझ व बच्चों को पालने दृपोसने की जिम्मेदारी सहन करनी पड़ती है। बीसीपीएम सुरेन्द्र यादव ने बताया कि खुशहाल परिवार दिवस के अवसर पर सीएचसी करनैलगंज में 48 कंडोम एवं 12 माला-एन का वितरण तथा 6 पीपीआईयूसीडी की सेवा प्रदान की गयी। इस दौरान काफी संख्या में लाभार्थी मौजूद रहे।
परिवार नियोजन साधन अपनाने पर मिलती है प्रोत्साहन राशि :
लाभार्थियों को परिवार कल्याण कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए डीपीएम अमरनाथ ने बताया कि प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में परिवार नियोजन की महती भूमिका है। इसी के साथ इसमें लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है, जो इस प्रकार है-नसबंदी कराने वाले परूषों और महिलाओं को क्रमशः 3000 और 2000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा पोस्ट पार्टम स्टर्लाईजेशन (प्रसव के तुरंत बाद नसबंदी) कराने वाली महिलाओं को 3000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, जबकि अस्थायी विधियों में प्रसव पश्चात आईयूसीडी एवं गर्भपात (स्वतः व सर्जिकल) उपरांत आईयूसीडी, जिसको सरल भाषा में कॉपर-टी कहा जाता है, के लिए लाभार्थी को 300 (2 फ़ॉलो अप पर), अंतरा इंजेक्शन लगवाने पर 100 रुपये प्रति डोज की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
नसबन्दी विफल होने पर मिलती है क्षतिपूर्ति राशि :
डिस्ट्रिक्ट फेमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक मैनेजर सलाहुद्दीन लारी ने बताया कि नसबंदी फेल होने पर दंपति को परिवार नियोजन इंडेमिनिटी योजना के तहत 60 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है। इसके अलावा नसबंदी के बाद अस्पताल या घर में सात दिन के अंदर लाभार्थी की मृत्यु होने पर आश्रित को चार लाख रुपये तथा 8 से 30 दिन के भीतर मृत्यु हो जाने पर एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान किये जाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि बढ़ती हुयी आबादी पर अंकुश लगाने और समुदाय के प्रजनन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य आंकड़ों को बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किया जा रहा है। जिला अस्पताल के सर्जन डॉ वीके गुप्ता के अनुसार, पुरुष नसबंदी, बिना चीरा-टांका वाली एक आसान प्रक्रिया है और परिवार नियोजन का स्थायी उपाय है। इस प्रक्रिया मे शुक्राणु नलिका बंद कर दी जाती है और महिला को गर्भ नहीं ठहरता। इसे वह सभी पुरुष अपना सकते हैं जो 22 वर्ष से 60 वर्ष के बीच मे हों और जिनका कम से कम एक बच्चा एक वर्ष का हो।
इस भ्रांतियों पर न दें ध्यान :
नसबंदी पुरुष की यौन क्षमताओं को प्रभावित कर देती है। पुरुष का अंडकोष निकाल दिया जाता है। नसबंदी पुरुष को शारीरिक रूप से कमजोर कर देती है। नसबंदी करवाने के बाद भूंख नहीं लगती। पुरुष नसबंदी केवल जाड़े मे ही करनी चाहिए क्योंकि संक्रमण हो सकता है।
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