राहत एवं बचाव कार्य को युद्ध स्तर पर चलाने का निर्देश
डीएम ने सदर तहसील में एसपी संग वितरित किया खाद्य सामग्री
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बरसात तथा बनबसा बैराज से छोड़े गए पानी के कारण जिले की सदर तहसील इस बार बाढ़ से ज्यादा प्रभावित हुई है। घाघरा नदी खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जिले की तीन तहसीलों के 106 गांव बाढ़ से प्रभावित है। कर्नलगंज, तरबगंज और सदर के 460 मंजरों में पानी भरा हुआ है। वहीं 4500 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि और 7300 मवेशी भी प्रभावित हुए हैं। एक अनुमान के अनुसार 53 कच्चे-पक्के मकान और झोपड़ियां भी क्षतिग्रस्त हुईं हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने 27 बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है और 194 नावें भी लगाई हैं। प्रशासन ने 24 मेडिकल टीमें की उतार दी हैं। जिलाधिकारी डॉ उज्ज्वल कुमार ने सोमवार को तहसील सदर के अंतर्गत विकास खंड रुपईडीह में बाढ़ से प्रभावित ग्राम कुरासी, लोनियन पुरवा, मझौवा आदि का निरीक्षण कर ग्रामीणों से मुलाकात की तथा राहत सामग्री वितरित किया। उन्होंने ग्रामीणों को होने वाली समस्याओं की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से प्रभावित ग्रामों का सभी संबंधित अधिकारी बराबर निरीक्षण करते रहें, ताकि किसी भी ग्रामवासी को कोई दिक्कत न होने पाये। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर, उप जिलाधिकारी सदर विनोद कुमार सिंह, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत राजेश चौधरी, जिला पूर्ति अधिकारी कृष्ण गोपाल पांडेय, बीडीओ रुपईडीह वर्षा सिंह सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

लाल निशान से 80 सेमी ऊपर बह रही घाघरा
इसके साथ ही जिले की दो अन्य तहसीलें कर्नलगंज व तरबगंज में भी बाढ़ का प्रभाव देखा जा रहा है। तरबगंज तहसील के 70 मजरों में बाढ़ के अलावा कर्नलगंज के कई गांवों के 30 मजरों में बाढ़ का पानी भर गया है। सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। सोमवार को बनवबस बैराज से साढे़ सात लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़े जाने की सूचना है। इस पानी के मंगलवार दोपहर तक एल्गिन बांध तक पहुंचने पर हालात बेकाबू हो सकते हैं। वहीं, एल्गिन चरसड़ी बांध की हालत भी खस्ता हो चुकी है। लगातार मूसलाधार बारिश से बालू से बना बांध जगह-जगह कट गया है। जिले में बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। गांवों में करीब छह फीट तक पानी भरा है, जिससे छप्पर व फूस के तमाम घर डूब चुके हैं। करीब दो दर्जन से अधिक गांव ऐसे हैं जो बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। जिले का गांव नकहरा सबसे ज्यादा बाढ़ से प्रभावित है। इस ग्राम पंचायत में करीब 30 मजरे हैं। सोमवार को नदी का जलस्तर करीब 90 सेंटीमीटर ऊपर था और नदी तेजी से बढ़ रही थी। सरयू के किनारे बसे गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से भरने लगा है। सरयू घाट पर सभी सीढ़ियां डूब चुकी हैं। इससे घाट पर अंतिम संस्कार करने के लिए आने वाले लोगों को दिक्कत होने लगी है। इसके अलावा ग्राम सकरौरा ग्रामीण, नारायन पुर मांझा, बसेहिया, कचनापुर, झिंगही तथा नारायन पुर मांझा के मजरा गोंडियन पुरवा, छगड़िहन पुरवा, चाइन पुरवा, बोडन पुरवा, भठियारन पुरवा बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।

एसडीएम व डीपीआरओ ने किया क्षेत्र भ्रमण
एसडीएम कर्नलगंज हीरा लाल तथा जिला पंचायत राज अधिकारी लालजी दुबे ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण करके राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। एसडीएम ने बताया कर्नलगंज तहसील के तीन गांवों के 15 मजरे बाढ़ से प्रभावित हैं। नकहरा के नौ मजरे जिसमें राधेपुरवा, तीरथराम पुरवा, पुहिल पुरवा, बसंतलाल पुरवा, मोछारन पुरवा, दुलारे पुरवा, छंगूलाल पुरवा, संभर पुरवा, देवकिशुन पुरवा शामिल हैं। वहीं चंदापुर किटोली के नाऊपुरवा, बिचलापुरवा व धुसवा भी बाढ़ की चपेट में हैं। पसका के दो मजरे इकनिया मांझा व गोड़ियन पुरवा में बाढ़ का पानी भर चुका है। ऐसे में सैकड़ों ग्रामीण बांध पर ही फूस का मकान बनाकर व तिरपाल तानकर अपना ठिकाना बनाए हैं। एसडीएम ने बताया बाढ़ पीड़ितों को राशन वितरित किया जा चुका है। सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है, जहां वितरण के लिए भोजन बन रहा है।

गो आश्रय केन्द्रां पर सतर्क दृष्टि रखें अधिकारी-डीएम
इस बीच जिलाधिकारी जनपद में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अनेक जिला स्तरीय अधिकारियों से लेकर ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारियों को बाढ़ क्षेत्र में सतर्क रहकर राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने का निर्देश दिया है। डीआरडीए के परियोजना निदेशक चन्द्रशेखर ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार विकास पूल से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियां को सतर्क कर दिया गया है। उन्हें क्षेत्र में निरन्तर भ्रमणशील रहकर बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने तथा राहत कार्यों में सहयोग करने को कहा गया है। सभी कर्मचारियों से क्षेत्र भ्रमण के दौरान अपनी फोटो भी भेजने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी ने जन हानि के साथ ही पशु हानि रोकने के उद्देश्य से सभी खण्ड विकास अधिकारियों व एडीओ पंचायत को गो आश्रय केन्द्रों का भ्रमण कर व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने को कहा है। डीएम ने निर्देश दिया है कि सभी ग्राम पंचायतों में संबंधित गांव के प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक, पंचायत सहायक व सफाई कर्मी अलर्ट मोड में काम करेंगे। वे किसी भी प्रकार की घटना एवं आम जनता से जुड़ी परेशानी का निवारण स्थानीय स्तर पर तत्काल कराएंगे। बीडीओ बाढ़ आपदा से पीड़ित परिवार की मदद एवं उनकी समस्या का समाधान कराने के लिए स्थानीय स्तर पर अपनी एक टीम तैयार कर लें। सभी कर्मचारी ब्लॉक, तहसील या जनपद के कंट्रोल रूम से नियमित संपर्क में रहें। साथ ही उन्हें किसी प्रकार की मदद या सहयोग की आवश्यकता हो, तो तत्काल सूचित करें। डीएम ने कहा है कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अपने तैनाती स्थान से अनुपस्थित पाया जाएगा, तो बहुत ही प्रतिकूल संज्ञान लिया जाएगा। अधिकारी गण अपने क्षेत्रों के स्कूल, आंगनबाड़ी केन्द्रों, कम्युनिटी किचन, गौशाला व जल निकासी की व्यवस्था आदि का निरीक्षण कर नियमित रिपोर्ट प्रेषित करेंगे।

डीएम के निर्देश के क्रम में हलधरमऊ के खण्ड विकास अधिकारी राजेन्द्र यादव ने सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) सत्येन्द्र प्रताप सिंह ने देवी तिलमहा में क्षतिग्रस्त पंचायत भवन व मैजापुर गो आश्रय केन्द्र का निरीक्षण किया।

वजीरगंज के खण्ड विकास अधिकारी विजय कांत मिश्र ने गेडसर स्थित गोशाला का निरीक्षण किया तथा ग्राम प्रधान व सचिव को गोशालाओं में समुचित व्यवस्था कराने का निर्देश दिया। उन्हांने कहा कि बरसात के कारण जानवरों को चारे की कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।

इटियाथोक के एडीओ पंचायत परमात्मा दीन ने रानीपुर तथा कंचनपुर गो आश्रय केन्द्र का निरीक्षण किया।

कटरा बाजार के एडीओ पंचायत सुभाष पाण्डेय ने सेहरिया व नदावा कला आदि गांवों का भ्रमण कर जरूरत मंद लोगों को राहत पहुंचाने का निर्देश दिया।

छपिया के एडीओ पंचायत संजय जायसवाल ने ग्राम प्रधान व सचिव के साथ रानीपुर गोशाला का निरीक्षण किया तथा समुचित प्रबंध कराए जाने को कहा।


रुपईडीह की बीडीओ वर्षा सिंह ने एसडीएम सदर वीके सिंह, नायब तहसीलदार धर्मेन्द्र कुमार व नेहा राजबंशी के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर पीड़ितों को लंच पैकेट व खाद्य सामग्री, फल, चना, गुड़ आदि का वितरण कराया।

मुजेहना के खण्ड विकास अधिकारी विकास मिश्रा ने बताया कि ग्राम पंचायत रैगांव को जाने वाली सड़क एक किलोमीटर पानी में डूब गई है। साथ ही गांव के कुछ घरों में पानी भर जाने की सूचना पर वह तत्काल मौके पहुंचे तथा स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि पानी घर के बाहर भरा है किन्तु घर पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने रोजगार सेवक व सचिव को जलभराव पर नजर रखने तथा जलभराव होने पर तत्काल सूचना देने व पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यहां के एडीओ पंचायत दुर्गा प्रसाद मिश्र ने रुद्रगढ़ नौसी स्थित गोशाला केन्द्र का निरीक्षण किया।

डीसी एनआरएलएम एनवी सविता तथा जिला विकास अधिकारी दिनकर कुमार विद्यार्थी ने कटरा विकास क्षेत्र के कई ग्राम पंचायतों का भ्रमण किया। उन्होंने गौरवा कला पहुंचकर क्षतिग्रस्त मकान का जायजा लिया। पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

नवाबगंज के खंड विकास अधिकारी ने सोमवार को ग्राम पंचायत चौखड़िया में स्थापित बाढ़ चौकी का निरीक्षण किया तथा बाढ़ पीड़ितां को राहत सामग्री वितरित किया। इस मौके पर ग्राम प्रधान व सचिव भी मौजूद थे। उन्हें बाढ़ पर नजर रखने तथा आवश्यकतानुसार राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने का निर्देश दिया। बाद में उन्होंने कटरा भोगचन्द में स्थापित बाढ़ चौकी का भी निरीक्षण किया।

बेलसर के खण्ड विकास अधिकारी प्रणय कृष्ण ने सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) गिरजेश पटेल के साथ दोहरी जोत में स्थापित गौशाला का निरीक्षण किया गया तथा सचिव को बाढ़ से जानवरां के बचाव हेतु व्यवस्था करने हेतु निर्देशित किया। दोनों अधिकारियों ने बाढ़ग्रस्त ग्राम पंचायत गढ़ी में सचिव द्वारा जाकर लंच पैकेट का वितरण किया। विकास खंड झंझरी के मृतुन्जय यादव ने झंझरी विकास खण्ड के खोरहंसा पहुंचकर बाढ़ कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्राम पंचायत गिर्द गोंडा तथा बभनी कानूनगो में पहुंचकर जलभराव की निकासी कराया।
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जानकी शरण द्विवेदी
सम्पादक
