धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक षडयंत्र के मामले में नहीं मिली अग्रिम जमानत
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। जिले की एक अदालत ने धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक षड़यंत्र और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज कराए गए अभियोग में सह आरोपी महिला का अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र बुधवार को निरस्त कर दिया। अभियोजन की तरफ से मुख्य अभियुक्त के अन्य साथियों के भी बराबर के दोषी होने की बात कहते हुए अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध किया गया था। विशेष लोक अभियोजक अजय कुमार तिवारी ने बताया कि जिले के छपिया थाने में क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक चंदन कुमार की तरफ से 31 जनवरी 2021 को ग्राम पंचायत मुबारकपुर ग्रंट के कोटेदार चन्द्र प्रकाश तिवारी तथा ग्राम निगरानी समिति के सदस्य सालिक राम, श्रीमती चन्द्रावती व श्रीमती गुड़िया के विरुद्ध भादवि की धारा 420, 467, 468, 471, 120बी, 409 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत अभियोग दर्ज कराया था। इनके विरुद्ध आरोप था कि कोटेदार ने माह दिसम्बर 2017 से अगस्त 2018 के मध्य कार्डधारकों को खाद्यान्न का वितरण नहीं किया। एक माह में ज्यादा मूल्य पर कम खाद्यान्न दिया गया। घटतौली व सम्पूर्ण वितरण किए बिना बचे खाद्यान्न का गबन किया गया तथा फर्जी वितरण रजिस्टर तैयार करके उसे वितरित दिखाया गया। ग्राम सभा के निर्वाचित सदस्य के रूप में खाद्यान्न वितरण निगरानी समिति के सदस्य नामित किए गए सालिक राम, श्रीमती चन्द्रावती व श्रीमती गुड़िया ने कोटेदार द्वारा तैयार किए गए फर्जी वितरण रजिस्टर को सही मानकर वितरण प्रमाण पत्र प्रदान करके उनको आर्थिक लाभ पहुंचाने में सहयोग किया। इससे पूर्व ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक खाद्य प्रकोष्ठ लखनऊ द्वारा विभागीय निरीक्षक से कराई गई जांच में इन चारों लोगों को आरोपी बनाया गया था। बाद में डीएम की अनुमति से पूर्ति निरीक्षक ने अभियोग दर्ज कराया था।
थाने में दर्ज अभियोग की विवेचना स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है। दर्ज अभियोग में गिरफ्तारी से बचने के लिए श्रीमती चन्द्रावती (63) की तरफ से अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। विचारण अदालत के समक्ष बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि घटना दिसम्बर 2017 से अगस्त 2018 के बीच की बताई गयी है, जबकि प्रथम सूचना रिपोर्ट 31.01.2021 को अर्थात् काफी विलम्ब से पंजीकृत कराया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि उचित दर विक्रेता द्वारा खाद्यान्न का वितरण ग्राम प्रधान व उप्र सरकार द्वारा नामित प्रतिनिधि की उपस्थिति में होता है। इस प्रकार आपराधिक षड़यंत्र समेत किसी भी प्रकार के अपराध में अभियुक्ता की कोई भूमिका नहीं है। इसके अलावा वह 63 वर्ष की वृद्धा है तथा बीमार भी रहती हैं। उनकी नियमित दवा चल रही है। उसे इस बात की आशंका है कि स्थानीय पुलिस उसे दौरान विवेचना गिरफ्तार कर जेल भेज सकती है, जिससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल होगी। अभियुक्ता का कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। विशेष लोक अभियोजक अजय तिवारी के अनुसार, उन्होंने राज्य की तरफ से अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्ता ने उचित दर विक्रेता द्वारा गबन किए गए खाद्यान्न का फर्जी वितरण रजिस्टर तैयार किए जाने पर ग्राम का निवासी होने के कारण सब कुछ जानते हुए कोटेदार को आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सही वितरण प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। आपराधिक षड़यंत्र में मुख्य अभियुक्त का साथी भी बराबर का ही दोषी होता है। साथ ही किसी का अधिक उम्र होना, उसका बीमार रहना तथा दवा चलना भी उसे दोषमुक्त नहीं करता है। इस प्रकार अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त किया जाना चाहिए। प्रकरण पर सुनवाई करते हुए न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ/विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट) डा. पल्लवी अग्रवाल ने अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।
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