जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। अपनों से बिछुड़कर अनाथ आश्रम में अपना बचपन बिता रहे मासूम बच्चों के उन्नयन के लिए गीत-संगीत का प्रशिक्षण दिया जाना बहुत ही नेक कार्य है। इससे समाज की मुख्य धारा से अलग रहकर अपने उत्कृष्ट जीवन के लिए संघर्ष करने वाले बच्चों में खुशियों का संचार हुआ है। यह बात बाल गृह (शिशु) एवं विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण के मुख्य समन्वयक उपेन्द्र श्रीवास्तव ने उप्र संगीत नाटक अकादमी एवं दीप सामाजिक संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में चल रहे ग्रीष्म कालीन लोकनृत्य कार्यशाला के समापन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि संस्थान में रहने वाले बच्चों के उन्नयन के लिए यह एक सराहनीय प्रयास रहा है। कार्यशाला की संयोजक व दीप सामाजिक संस्थान की अध्यक्ष उर्मिला पाण्डेय ने बताया कि संगीत नाटक अकादमी के सौजन्य से एक पखवारे तक चलने वाले लोकनृत्य कार्यशाला में संस्थान में रहने वाले एक दर्जन से अधिक बच्चे बच्च्यिं ने प्रतिभाग किया। युवा प्रशिक्षक नैना सिन्हा ने सभी बच्चों को अवधी, गढ़वाली, घूमर नृत्य के साथ ही योग पर नृत्य करना सिखाया। सभी बच्चों ने बहुत ही उत्साह के साथ कार्यशाला में प्रतिभाग किया। इस मौके पर श्रीमती अर्चना, सुश्री सपना, प्रियंका उपाध्याय, आंचल गुप्ता, मंजू पाण्डेय समेत संस्थान के सभी कर्मचारी व बच्चे उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण विकास समिति चारू द्वारा संचालित इस संस्था में देवीपाटन मण्डल के सभी चार जिलों के लावारिश बच्चों को किशोर कल्याण अधिनियम में निहित प्रावधानों के तहत रखा जाता है और उनके परिजनों को तलाश करके नियमानुसार उन्हें सौंप दिया जाता है। अभिभावकों की तलाश न हो पाने पर यहां के बच्चों को इच्छुक दम्पती को कानूनी प्रावधानों के अनुसार गोद भी दिया जाता है।

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जानकी शरण द्विवेदी
सम्पादक
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