संवाददाता
गोंडा। साहित्यकार शिक्षक रघुनाथ पाण्डेय के संपादन में ‘पूर्वोत्तर की भाषा सम्पदा’ नामक शोध ग्रंथ का विमोचन पूर्वोत्तर भारत के स्कॉटलैण्ड कहे जाने वाले शिलांग शहर स्थित श्री राजस्थान विश्राम भवन में किया गया। पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के तत्वावधान में प्रकाशित उक्त शोधग्रंथ का विमोचन मेघालय के पुलिस महानिदेशक एलआर बिश्नोई और उद्योगपति विमल बजाज ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर आयोजित विशाल समारोह में उपस्थित देशभर के 122 साहित्यकारों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एल आर विश्नोई ने कहा पूर्वोत्तर भारत में लगभग 200 से अधिक भाषाएं जीवित है किंतु इनका विकास अवरुद्ध है असमिया नेपाली बांग्ला भाषा को छोड़कर शेष भाषा से पूरा भारत परिचित नहीं है। अपने राज में भी इनके बोलने वालों की संख्या अत्यल्प ही है। ज्यादातर भाषाएं या तो संकटग्रस्त हैं अथवा लुप्तप्राय होने की स्थिति में है। विदेशी भाषा अंग्रेजी इनको लील लेने को आतुर है। इन भाषाओं के रक्षार्थ देवनागरी लिपि का संरक्षण मिलना चाहिए। विमोचन के दौरान अकादमी के सचिव डॉ डॉक्टर अकेला भाई ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के भाषाई परिदृश्य का गहन अध्ययन किए जाने के उद्देश्य से इस पुस्तक का संपादन और प्रकाशन किया गया है। पुस्तक में भारतीय भाषा परिवार की विभिन्न शाखाओं समेत पूर्वोत्तर भारत के सभी आठों राज्यों की भाषाओं का राज्यवार विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है, जिससे पूर्वोत्तर भारत की भाषाओं का अध्ययन करने वाले छात्रों, शोधार्थियों और प्राध्यापकों को इस पुस्तक में एक ही जगह समस्त सामग्री उपलब्ध हो जाएगी। निखिल प्रकाशन आगरा से मुद्रित 200 पृष्ठ की इस पुस्तक में कुल 38 आलेख हैं, जिनमें से ज्यादातर आलेख पूर्वोत्तर भारत के लेखकों, विद्वानों द्वारा ही लिखे गए हैं, इसलिए आलेख में दिए गए तथ्य और संदर्भ भौतिक रूप से प्रामाणिक होने के साथ-साथ सटीक भी हैं। पद्मश्री डॉ विद्याबिन्दु सिह, डॉ मनोज पाण्डेय, डॉ वीरेन्द्र परमार, डॉ सुनील कुमार, डॉ राजवीर सिह, डॉ दीपक पाण्डेय, प्रो मोहसिन खान, प्रो सुखदा पाण्डेय, डॉ पण्डित बन्ने, डॉ प्रदीप त्रिपाठी, डॉ दिनेश साहू, डॉ छुकी भूटिया, डॉ जोराम यालाम, मोर्जुम लोई, छुकी लेप्चा आदि राष्ट्र स्तरीय विद्वानों, साहित्यकारों ने पुस्तक को उत्कृष्टता प्रदान करने में डॉ रघुनाथ पाण्डेय और डॉ दिलीप अवस्थी के संपादकीय श्रम की सराहना की है। पुस्तक की भूमिका अकादमी के सचिव डॉ अकेला भाई ने लिखी है।
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महत्वपूर्ण सूचना
गोंडा जिले के युवा जिलाधिकारी डा. उज्ज्वल कुमार और नवागत सीडीओ गौरव कुमार की अगुवाई में जिले में बड़े बदलाव की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं। दोनों युवा अधिकारी Transforming Gonda के नारे के साथ जिले के चाल, चरित्र और चेहरे में आमूल चूल परिवर्तन लाना चाहते हैं। जिले के विकास के लिए शुरू की गई अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं इसी दिशा में किए जा रहे कोशिशों का परिणाम है। आगामी 21 जून को जब पूरा विश्व योग दिवस मना रहा होगा, तब योग के प्रणेता महर्षि पतंजलि की जन्म स्थली पर इन दोनों अधिकारियों ने कुछ विशेष करने का निर्णय लिया है। लक्ष्य है कि जिले की बड़ी आबादी को उस दिन योग से जोड़ा जाय। इस क्रम में अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस को सफल बनाने के लिए जनपद के ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए YOGA DAY GONDA नाम से एक फेसबुक पेज बनाया गया है। जिला प्रशासन की तरफ से जरूरी सूचनाएं, गतिविधियों आदि की जानकारी व फोटोग्राफ इत्यादि इसी पेज पर शेयर किए जाएंगे। कृपया आप इसका महत्वपूर्ण हिस्सा बनते हुए इससे जुड़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पेज को LIKE करें तथा अपने परिचितों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें।
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