Filariasis ignored तो खतरनाक नतीजे, दवा सेवन से ही रुक सकती है लाइलाज बीमारी
अतुल द्विवेदी
गोंडा। Filariasis आज भी दुनिया के 72 देशों में 85.60 करोड़ से अधिक लोगों को प्रभावित कर रहा है। भारत के 328 जिलों में यह बीमारी फैल चुकी है और केवल उत्तर प्रदेश के 51 जिलों में इसका असर स्पष्ट दिखाई देता है। गोंडा जनपद भी इससे अछूता नहीं है, जहां 2065 मरीज फिलहाल पंजीकृत हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को चेताया है कि एक बार लक्षण आने के बाद यह बीमारी जीवनभर के लिए लाइलाज समस्या बन जाती है और मरीज को विकलांगता व आर्थिक बोझ झेलना पड़ता है।
जिला मलेरिया विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. सी.के. वर्मा ने कहा कि Filariasis से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करना। यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रमाणित है। उन्होंने कहा कि जो लोग अभी तक दवा लेने से चूक गए हैं, वे तुरंत आशा कार्यकर्ताओं या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से दवा प्राप्त कर लें।
अभियान की अवधि बढ़ाई गई
प्रदेश के 27 जिलों के 195 ब्लॉकों में सरकार द्वारा चलाए जा रहे 10 दिवसीय सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान में गोंडा के 12 ब्लॉक भी शामिल हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि अब तक जिले में 19.37 लाख से अधिक लोगों ने दवा खा ली है। त्यौहार और छुट्टियों को देखते हुए अभियान की अवधि 28 अगस्त के बजाय 31 अगस्त तक बढ़ा दी गई है।
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा कि यह अवसर वर्ष में केवल एक बार मिलता है। यदि दवा नहीं खाई गई तो लोग न केवल खुद को बल्कि अपने पूरे परिवार को Filariasis जैसी लाइलाज बीमारी के खतरे में डाल देंगे।
दवा सेवन के लाभ और नियम
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि Filariasis मच्छरों से फैलता है और इसका संक्रमण किसी को भी हो सकता है। साल में एक बार दवा खाने से बीमारी का खतरा लगभग समाप्त हो जाता है। जब सामूहिक रूप से सभी लोग दवा लेते हैं तो रोग का प्रसार पूरी तरह रुक सकता है।
दवा सेवन संबंधी मुख्य निर्देश इस प्रकार हैं:
निर्धारित मात्रा एक साथ लें। दो वर्ष से ऊपर के सभी लोग दवा अवश्य खाएं। गर्भवती महिलाएं, गंभीर रोगी और दो साल से छोटे बच्चे दवा न लें। दवा खाली पेट न खाएं।
हल्की प्रतिक्रिया सामान्य
डॉ. सी.के. वर्मा ने स्पष्ट किया कि दवा सेवन के बाद हल्की चक्कर, थकान या उल्टी जैसी प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं, लेकिन यह दुष्प्रभाव नहीं हैं। यह संकेत है कि शरीर में छिपे सूक्ष्म कृमि नष्ट हो रहे हैं। कुछ घंटों में यह समस्या स्वतः खत्म हो जाती है। उन्होंने कहा कि यदि लोग दवा नहीं खाते तो आगे चलकर निश्चित रूप से Filariasis का खतरा बढ़ जाता है। गंभीर समस्या होने पर चिकित्सक और रैपिड रेस्पॉन्स टीम मदद के लिए उपलब्ध रहेंगे।
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