Tuesday, January 13, 2026
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फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर प्रशिक्षण पर आया युवक गिरफ्तार

पुलिस लाइन में अभिलेख सत्यापन के दौरान हुआ फर्जी नियुक्ति का खुलासा

थाना कोतवाली नगर में फर्जी नियुक्ति का अभियोग दर्ज, आरोपी हुआ गिरफ्तार

जानकी शरण द्विवेदी

गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद में चल रहे जेटीसी प्रशिक्षण के दौरान एक फर्जी नियुक्ति मामले ने पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है। पुलिस लाइन परिसर में चल रहे भर्ती प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान एक युवक खुद को कैडेट बताते हुए सोमवार को फर्जी नियुक्ति पत्र के जरिए ज्वाइन करने पहुंच गया। दस्तावेजों के गहन सत्यापन में उसकी धोखाधड़ी उजागर हो गई। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।

फर्जी नियुक्ति पत्र से ज्वाइनिंग करने पहुंचा था युवक
घटना पुलिस लाइन गोंडा में चल रहे जेटीसी प्रशिक्षण के दौरान सामने आई। प्रशिक्षण में सम्मिलित सभी कैडेट्स के व्यक्तिगत दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा था। इस क्रम में शुभम सिंह पुत्र उदयभान सिंह, निवासी जलालपुर घई, पोस्ट सुल्तानपुर बढईया, थाना गदागंज, जनपद रायबरेली द्वारा प्रस्तुत नियुक्ति पत्र संदिग्ध प्रतीत हुआ।

जब दस्तावेजों की विधिवत जांच की गई तो सामने आया कि शुभम सिंह द्वारा प्रस्तुत नियुक्ति पत्र पूरी तरह से फर्जी था। यह न तो किसी आधिकारिक प्रक्रिया के तहत जारी किया गया था, न ही उसका कोई वैध रिकॉर्ड उपलब्ध था। इससे स्पष्ट हो गया कि युवक ने फर्जी नियुक्ति के जरिए पुलिस विभाग को धोखा देने की कोशिश की थी।

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प्रशिक्षण प्रभारी की तहरीर पर दर्ज हुआ मुकदमा
घटना की सूचना मिलते ही जेटीसी प्रशिक्षण प्रभारी ने आरोपी युवक के खिलाफ तहरीर दी। तहरीर के आधार पर थाना कोतवाली नगर में संबंधित धाराओं में प्राथमिकी पंजीकृत की गई। युवक को तत्काल हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और फिर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है।

फर्जी नियुक्ति मामले से उभरे कई सवाल
यह फर्जी नियुक्ति मामला कई अहम सवाल खड़ा करता है। आखिर कैसे एक युवक बिना वैध नियुक्ति पत्र के पुलिस लाइन तक पहुंच गया? क्या इस प्रकरण के पीछे कोई संगठित नेटवर्क है? या फिर यह एक अकेली घटना है? जांच अधिकारियों का कहना है कि मामले की तह तक पहुंचने के लिए विस्तृत जांच जारी है। अगर किसी प्रकार की साजिश या गिरोह की भूमिका सामने आती है, तो आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

भर्ती और प्रशिक्षण की प्रक्रियाओं की निगरानी पर उठे सवाल
घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि भर्ती और प्रशिक्षण प्रक्रिया की निगरानी को लेकर और अधिक सख्ती की जरूरत है। फर्जी नियुक्ति जैसे मामले पुलिस बल की प्रतिष्ठा पर आघात करते हैं और विभाग के पारदर्शिता व भरोसे को कमजोर करते हैं। प्रशिक्षण प्रभारी की सतर्कता ने इस मामले को समय रहते उजागर कर दिया, लेकिन यह भी आवश्यक है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए नियुक्ति सत्यापन की प्रक्रिया को और कड़ा व तकनीकी बनाया जाए।

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