Wednesday, January 14, 2026
Homeराष्ट्रीयCDS को मिलीं नई शक्तियां, रक्षा मंत्रालय का साहसिक कदम

CDS को मिलीं नई शक्तियां, रक्षा मंत्रालय का साहसिक कदम

नेशनल डेस्क

नई दिल्ली! भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा निर्णय लेते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान को एक ऐतिहासिक जिम्मेदारी सौंपी है। अब से CDS अनिल चौहान तीनों सेनाओं थल सेना, नौसेना और वायुसेना को एकीकृत संयुक्त आदेश देने में सक्षम होंगे। यह फैसला देश की सुरक्षा संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

संयुक्त आदेश देने की मिली वैधानिक स्वीकृति
अब तक जिन मामलों में दो या अधिक सेनाओं की भागीदारी होती थी, उनमें प्रत्येक सेना अपने-अपने स्तर पर अलग-अलग निर्देश देती थी, जिससे निर्णय प्रक्रिया जटिल हो जाती थी। लेकिन 24 जून 2025 को रक्षा मंत्रालय ने जो पहला संयुक्त आदेश जारी किया, उसके बाद से अब CDS अनिल चौहान सैन्य मामलों के विभाग (DMA) के सचिव के रूप में तीनों सेनाओं को एकीकृत निर्देश और आदेश देने में पूर्णतः सक्षम हो गए हैं।

बदलाव की दिशा में यह कदम कितना असरदार?
यह आदेश ‘संयुक्त निर्देशों और आदेशों की स्वीकृति, प्रसार और क्रम निर्धारण’ प्रक्रिया को सरल बनाएगा। इससे दोहराव और विसंगतियां कम होंगी, और एकजुट, पारदर्शी तथा प्रभावी निर्णय प्रणाली स्थापित होगी। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह एक ऐसा संस्थागत बदलाव है, जो भविष्य की सैन्य रणनीतियों में समन्वय और प्रभावशीलता बढ़ाने में मदद करेगा।

यह भी पढें: Birthday Special: करिश्मा कपूर को नहीं मिला मुकम्मल प्यार

CDS अनिल चौहान की भूमिका में आया अभूतपूर्व परिवर्तन
2019 में जब भारत सरकार ने CDS का पद और DMA की स्थापना की थी, तब इसका उद्देश्य सशस्त्र बलों में तालमेल, संसाधनों का बेहतर उपयोग, और संचालन के ढांचे में एकरूपता लाना था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस भूमिका की सीमाएं भी चर्चा में थीं। अब इस फैसले के साथ CDS अनिल चौहान को वह अधिकार मिल गया है, जिसकी कल्पना इस पद के निर्माण के समय की गई थी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का निर्णायक निर्णय
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा लिया गया यह निर्णय न केवल प्रशासनिक रूप से बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद साहसिक और दूरदर्शी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सशस्त्र बलों में ‘ज्वाइंटनेस’ की भावना को बढ़ावा मिलेगा और एकीकृत लड़ाकू सिद्धांतों को लागू करने में आसानी होगी।

यह भी पढें: जेंडर चेंज विवाह: सोनू बना सोनिया, प्रेमी संग लिए 7 फेरे

तीनों सेनाओं में संयुक्तता की नई शुरुआत
इस फैसले के बाद अब सैन्य अभ्यास, योजना निर्माण, प्रशिक्षण, और संसाधनों के उपयोग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में CDS अनिल चौहान की भूमिका निर्णायक होगी। इससे थल सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच परंपरागत अंतर कम होंगे और वे एक साझा उद्देश्य की ओर समन्वित प्रयास कर सकेंगे।

विश्लेषकों की राय में यह बदलाव ऐतिहासिक
रक्षा विशेषज्ञों और पूर्व सैन्य अधिकारियों का मानना है कि यह कदम भारत की सैन्य संरचना में एक ऐतिहासिक सुधार है। इससे न केवल युद्धकालीन निर्णय तेज होंगे, बल्कि शांति काल में भी योजनाएं अधिक प्रभावशाली और व्यावहारिक बनेंगी।

भारतीय सैन्य तंत्र में बदलाव की बयार
CDS अनिल चौहान को संयुक्त आदेश देने की अनुमति मिलना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि यह भारतीय सैन्य तंत्र में एक बदलाव की बयार है। इससे CDS की भूमिका प्रभावशाली बनेगी और तीनों सेनाओं के बीच एक नया सामंजस्य स्थापित होगा। रक्षा मंत्री के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि अब भारत सैन्य सुधारों के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

यह भी पढें: बुलडोजर अभियानः UP के 3 जिलों में 500 मदरसे बंद, 60 ढहाए गए

RELATED ARTICLES

Most Popular