एक ही परिवार के 10 सदस्यों की मौत से गांव में मातम, अयोध्या में किया गया अंतिम संस्कार
Bolero नहर हादसा ने छीनी मासूम रचना की जिंदगी, जिद पूरी न हुई तो बच गयी रागिनी की जिन्दगी
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। जिले में रविवार को हुए Bolero नहर हादसा में लापता सात वर्षीय बालिका रचना का शव बरामद होने के साथ ही इस दुर्घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर अब 12 हो गई है। इस बीच गृह स्वामी प्रहलाद ने बीती रात अयोध्या में परिजनों का अंतिम संस्कार कर दिया। श्रद्धालुओं से भरी बोलेरो के सरयू नहर में गिरने की भीषण दुर्घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है।
पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने बताया कि रविवार को इटियाथोक थाना क्षेत्र के बेलवा बहुता गांव के पास हुए Bolero नहर हादसा के बाद 11 शव बरामद किए गए थे और चार लोगों को बचा लिया गया था। लेकिन बोलेरो में सवार एक मासूम बालिका रचना की तलाश जारी थी। सोमवार को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में चले खोज अभियान के दौरान दोपहर बाद मनकापुर थाना क्षेत्र के कुड़ासन गांव के पास उसका शव बरामद कर लिया गया।
घटना के बाद से Bolero नहर हादसा को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया था और एसडीआरएफ की टीम को तत्काल बुलाया गया था। रविवार को देर शाम तक चले सघन तलाशी अभियान के बावजूद जब सफलता नहीं मिली, तो सोमवार सुबह एक बार फिर अभियान शुरू किया गया। सरयू नहर में करीब 30-35 किलोमीटर दूर जाकर बालिका का शव बरामद हुआ।
यह वही मासूम रचना थी, जिसकी बहन पिंकी Bolero नहर हादसा में बाल-बाल बच गई थी। पिंकी, जो वाहन की अगली सीट पर चालक के साथ बैठी थी, हादसे के समय गाड़ी का दरवाजा खुलते ही नहर में कूद पड़ी और किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रही। देर रात जब देवीपाटन मंडल के आयुक्त शशिभूषण लाल सुशील पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, तो पिंकी ने हाथ जोड़कर अपनी बहन की तलाश कराने की भावुक गुहार लगाई थी।

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Bolero नहर हादसा की यह त्रासदी यहीं नहीं थमी। हादसे में मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार देर रात अयोध्या में किया गया, जहां गृहस्वामी प्रहलाद ने सभी विवाहित मृतकों को मुखाग्नि दी। अविवाहित बच्चों को गोंडा में ही दफनाया गया। यह हादसा प्रहलाद के पूरे परिवार को निगल गया! पत्नी, छोटे भाई, बहू-बेटी और अन्य संबंधियों समेत कुल 10 लोग उनके आंखों के सामने काल के गाल में समा गए।
Bolero नहर हादसा की इस घड़ी में भी किस्मत ने एक करिश्मा कर दिखाया। प्रहलाद के सबसे छोटे भाई रामरूप की बेटी रागिनी, जो मंदिर जाने को तैयार थी, उसे गाड़ी में जगह न होने के कारण यह कहकर रोक लिया गया था कि वह पापा के लिए खाना बना ले और अगली बार मंदिर चली जाए। यह ‘ना’ उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी ‘हां’ बन गई। रागिनी की मां, भाई और बहन हादसे में मारे गए, लेकिन वह घर पर होने के कारण बच गई।
गृहस्वामी प्रहलाद गुप्ता का कहना है कि काश वह भी बोलेरो में होता तो मर जाता लेकिन अपने परिवार को इस तरह जलता नहीं देखता। उन्होंने कहा—अब किसके लिए जिऊं? उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे।

हादसे के वक्त बोलेरो चला रहे सीता शरण ने बताया कि गाड़ी अनियंत्रित होते ही उसने गेट खोलकर छलांग लगाई। उसके साथ आगे बैठे दो अन्य लोग भी बाहर आ गए। पीछे खड़ी रचना भी शायद झटके में बाहर गिर गई और तेज बहाव में बह गई थी।
Bolero नहर हादसा में जान गंवाने वाले सभी लोग मोतीगंज थाना क्षेत्र के सीहागांव निवासी प्रहलाद गुप्ता के परिजन थे, जो पृथ्वीनाथ मंदिर जलाभिषेक के लिए निकले थे। बोलेरो में कुल 16 लोग सवार थे, जिनमें से 12 की मौत हो गई और चार लोग किसी तरह बच पाए।
यह हादसा न सिर्फ एक परिवार, बल्कि पूरे गांव के लिए ऐसा जख्म बन गया है जो शायद ही कभी भर सके। Bolero नहर हादसा ने जहां पूरे जिले को मातमी माहौल में डुबो दिया, वहीं प्रशासन और नागरिक समाज के सामने एक बार फिर सुरक्षा और सतर्कता की अहमियत को उजागर किया।
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