Tuesday, January 13, 2026
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भारत विभाजन की पीड़ा को समझना जरूरी: प्रो. संजय द्विवेदी

विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस पर केन्द्रीय संचार ब्यूरो द्वारा संगोष्ठी आयोजित

वक्ताओं ने जताई चिंता, कहा-नहीं मिट सकी भारत विभाजन विभीषिका की टीस, इतिहास से सबक लेने पर जोर

राज्य डेस्क

भोपाल। भारत विभाजन की विभीषिका भारतीय स्वतंत्रता का वह बदरंग पन्ना है, जिसकी पीड़ा आज भी लोगों के दिलों में गहरे घाव की तरह मौजूद है। 1947 में हुए इस बंटवारे ने न केवल लाखों परिवारों को उजाड़ा, बल्कि सांप्रदायिक हिंसा और रक्तपात की ऐसी घटनाएं छोड़ दीं, जिन्हें भूल पाना असंभव है। विभाजन की यह टीस समय के साथ कम होने के बजाय पीढ़ी दर पीढ़ी यादों में ज़िंदा है।

इसी पृष्ठभूमि में केन्द्रीय संचार ब्यूरो द्वारा आयोजित ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि भारत विभाजन की पीड़ा को समझना और उससे सबक लेना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में देश को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के पूर्व महानिदेशक और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संजय द्विवेदी ने कहा कि बंटवारे के समय हम रक्तपात रोकने में नाकाम रहे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि हम सतर्क रहते तो भारत विभाजन टल सकता था। आजादी की लड़ाई के दौरान भी हमारे बीच मतभेद मौजूद थे, जिन्हें अंग्रेजों ने भुनाया।

उन्होंने कहा कि हमें अपनी कमजोरियों को स्वीकार करना होगा और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा, ताकि देश की एकता और अखंडता बनी रहे। उन्होंने कहा कि हम सतर्क होते तो बंटवारा नहीं होता। द्विवेदी ने जोर दिया कि भारत बोध और राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत युवा ही राष्ट्र को सुरक्षित रख सकते हैं।

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जनसंपर्क विभाग के पूर्व संचालक लाजपत आहूजा ने कहा कि भारत विभाजन उनके परिवार के लिए एक व्यक्तिगत त्रासदी था, क्योंकि उन्होंने इसे करीब से जिया है। उन्होंने विभाजन के दौरान हुए अत्याचारों, खासतौर से महिलाओं और युवतियों के साथ हुई हुई दुष्कर्म की घटनाओं का उल्लेख किया और कहां किसी त्रासदी के पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया।

उन्होंने कहा कि अपने ही देश के लोगों को शरणार्थी कहे जाने की पीड़ा आज भी चुभती है। आहूजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस की घोषणा को सराहनीय बताया और कहा कि इस पहल से पीड़ितों को अपना दर्द बांटने का अवसर मिला है।

पत्र सूचना कार्यालय एवं केंद्रीय सूचना ब्यूरो के अपर महानिदेशक प्रशांत पाठराबे ने स्वतंत्रता संग्राम और भारत विभाजन स्मृति दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस अवसर पर मध्य प्रदेश के कई जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय अग्रवाल, पत्र सूचना कार्यालय के निदेशक मनीष गौतम और केंद्रीय संचार ब्यूरो के उपनिदेशक शारिक नूर ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक पराग मांदले ने किया। इस अवसर पर सहायक निदेशक करिश्मा पंत, अजय उपाध्याय, समीर वर्मा सहित बड़ी संख्या में छात्राएं और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

वक्ताओं का मत था कि भारत विभाजन से उपजे जख्म समय के साथ भरने के बजाय इतिहास की चेतावनी के रूप में आज भी हमारे सामने हैं। यदि हम अपने अतीत की गलतियों से सबक लेकर भविष्य की राह तय करें, तभी देश एकजुट और सशक्त रह सकेगा।

भारत विभाजन की पीड़ा को समझना जरूरी: प्रो. संजय द्विवेदी
संगोष्ठी में उपस्थित कालेज की छात्राएं, शिक्षक और गणमान्य नागरिक!

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