– लोकसभा सांसद दानिश अली ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को लिखा पत्र
– हज कमेटी में 23 की जगह केवल 11 सदस्यों की घोषणा को हज एक्ट का उल्लंघन बताया
नई दिल्ली(हि.स.)। हज कमेटी आफ इंडिया एक बार फिर विवादों में घिर गई है। कमेटी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर लोकसभा सांसद दानिश अली ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को पत्र लिखकर 22 अप्रैल को कमेटी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए होने वाली चुनाव प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि 1 अप्रैल को 11 सदस्यीय हज कमेटी का ऐलान किया गया है, जो कि असंवैधानिक है। उनका कहना है कि कानून के मुताबिक 23 सदस्यीय हज कमेटी के गठन का ऐलान किया जाना चाहिए था लेकिन महज 11 सदस्यों की घोषणा की गई है। यह हज एक्ट 2002 का खुला उल्लंघन है।
दानिश अली का कहना है कि हज कमेटी के सभी सदस्यों का जब तक चुनाव नहीं हो जाए, तब तक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को रद्द कर देना चाहिए। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को लिखे पत्र में इस बात पर आपत्ति जताई गई है कि सदस्यों के चुनाव में हज कमेटी के एक्ट का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। हज कमेटी ऑफ इंडिया में 23 सदस्य होते हैं। लेकिन 1 अप्रैल को सरकार के जरिए जारी की गई अधिसूचना में मात्र 11 सदस्यों की घोषणा की गई है। उनका कहना है कि कमेटी में 19 सदस्य गैर सरकारी होते हैं और 4 सदस्य सरकारी होते हैं, जिन्हें कमेटी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में वोट डालने का अधिकार नहीं होता है।
बताया कि हज कमेटी के 19 सदस्यों के जरिए ही हमेशा से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाता रहा है और इसी परंपरा को आगे भी जारी रखा जाना चाहिए। सांसद दानिश अली ने नकवी से अनुरोध किया है कि हज कमेटी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव हज अधिनियम 2002 के अनुसार ही किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि 9 दिसंबर, 2021 को लोकसभा में उनके जरिए हज कमेटी के पुनर्गठन का मुद्दा उठाया गया था।
हज कमेटी ऑफ इंडिया के पूर्व सदस्य हाफिज नौशाद अली ने भी केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी से 22 अप्रैल को आयोजित होने वाली हज कमेटी ऑफ इंडिया की बैठक को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जब तक 23 सदस्यीय हज कमेटी का पुनर्गठन नहीं हो जाता है तब तक कमेटी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को डाल देना चाहिए। उनका कहना है कि अगर सरकार की तरफ से ऐसा नहीं किया जाता है तो यह हज एक्ट 2002 का उल्लंघन होगा।
एम ओवैस/दधिबल
