Saturday, April 4, 2026
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विश्व रक्तदाता दिवस 14 जून पर विशेष : अपने रक्त से खींच रहे लोगों की ’सांसों की डोर’

मेरठ (हि.स.)। ’रक्तदान’ का नाम सुनकर अनेक लोग पीछे हट जाते हैं, लेकिन राष्ट्रवाद की शपथ लेकर निकली मतवाले युवाओं की टोली जरूरतमंदों की सांसों की डोर को कटने से बचाने निकली हुई है। देश के किसी भी शहर में एक काॅल पर रक्त की सुविधा मुहैया कराकर लोगों की जान बचाते हैं। रक्तदान करने वाले ये अधिकांश युवा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नर्सरी से निकले हैं और दिन-रात की परवाह किए बिना दूसरों को ’जीवनदान’ देने में जुटे हैं। 

बजरंग दल के रक्तदान शिविर से मिली प्रेरणाबुलंदशहर निवासी हेमंत सिंह इन जोशीले युवाओं की अगुवाई कर रहे हैं। स्कूली समय में आरएसएस के स्वयं सेवक बने हेमंत बाद में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए। इसके बाद बजरंग दल में कार्य करने लगे। हेमंत बताते हैं कि रक्तदान की प्रेरणा उन्हें अयोध्या में श्रीराम मंदिर आंदोलन में अपना जीवन होम करने वाले कारसेवकों के बलिदान दिवस पर आयोजित रक्तदान शिविर से मिली। इसके बाद तो रक्तदान उनके जीवन का मिशन बन गया है। इन मिशन में दो हजार से अधिक युवा जुटे हैं और पूरे देश में जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराते हैं।
कई राज्यों में काम कर रहा ’राष्ट्र चेतना मिशन’ हेमंत ने रक्तदाताओं को जोड़ने के लिए राष्ट्र चेतना मिशन संस्था का गठन किया। दस वर्षों में यह संस्था उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड आदि राज्यों में रक्तदाताओं को अपने साथ जोड़ चुकी है। रक्तदान की काॅल आने पर राष्ट्र चेतना मिशन के वहां मौजूद अपने स्वयंसेवक से रक्तदान कराती है। जबकि दूसरे शहरों में अन्य रक्तदान कराने वाली संस्थाओं से समन्वय करके लोगों की नि:स्वार्थ सेवा की जाती है। पूरे देश के किसी भी शहर में राष्ट्र चेतना मिशन लोगों को सहायता उपलब्ध करा रही है।
बुलंदशहर में नहीं होती खून की कमी से किसी की मौतराष्ट्र चेतना मिशन के संरक्षक सीए मनीष मांगलिक का कहना है कि बुलंदशहर में अब किसी भी व्यक्ति की खून की कमी से मौत नहीं होती। पता चलते ही संस्था के स्वयंसेवक दिन-रात रक्तदान करने पहुंच जाते हैं। फोन और सोशल मीडिया के सहारे लोगों की रक्त की मांग आती रहती है। इस कार्य में संस्था के सचिव स्वदेश चौधरी, कोषाध्यक्ष उमेश कुमार, विकास सिंह, विशाल गिरि, विशाल त्यागी, कपिल राणा, गौरी शंकर, पिंटू आदि जुटे हैं।
कोरोना काल में उपलब्ध कराया प्लाज्माकोरोना काल में भी हजारों लोगों को स्वयंसेवकों ने प्लाज्मा उपलब्ध कराया। प्लाज्मा की मांग आते ही संस्था के स्वयंसेवक कोरोना को मात दे चुके लोगों को समझाकर उन्हें प्लाज्मा दान करने के लिए तैयार करते थे। इससे कई लोगों की जान बच पाई। इस कार्य में बहुत समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। संस्था साल में कई बार रक्तदान शिविर का भी आयोजन करती है। सबसे ज्यादा मांग नेगेटिव ग्रुप के खून की होती है।
दूसरों की जान बचाकर मिलती है आत्मसंतुष्टिपेशे से शिक्षक हेमंत बताते हैं कि रक्तदान करने से उन्हें दूसरों की जान बचाने की आत्मसंतुष्टि मिलती है। लोगों को भी रक्तदान करने के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उनकी संस्था के माध्यम से पुलिसकर्मी, अधिवक्ता, शिक्षक आदि जरूरतमंदों की मदद के लिए रक्तदान करने के लिए आगे आते रहते हैं।
जरूरतमंद के परिजनों से लेते हैं मदद का वचनअधिकांश बार ऐसा होता है कि जरूरतमंद व्यक्ति के परिजन खुद रक्तदान ना करके संस्था के स्वयंसेवकों को काॅल करते हैं। ऐसे में स्वयंसेवक उन परिजनों को रक्तदान के फायदे बताकर इसके लिए प्रेरित करते हैं। जरूरतमंदों की मदद करने के बाद उनके परिजनों से दूसरों की मदद करने का वचन भी लिया जाता है, लेकिन इनमें से लगभग 80 प्रतिशत लोग बाद में रक्तदान से मुकर जाते हैं। लगभग 20 फीसदी लोग इस मिशन से जुड़ जाते हैं। इस प्रकार से यह यात्रा अनवरल चल रही है।
रक्तकोषों में बचा बहुत कम रक्तकोरोना काल में ब्लड बैंकों में भी रक्त की कमी हो गई। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डाॅ. कौशलेंद्र ने बताया कि 800 यूनिट की क्षमता वाले ब्लड बैंक में केवल 130 यूनिट रक्त बचा है। इसी तरह से 800 यूनिट की क्षमता वाले मेडिकल काॅलेज के ब्लड बैंक में बहुत कम रक्त उपलब्ध है। इसकी पूर्ति के लिए स्वास्थ्य अधिकारी अब रक्तदान शिविर आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं।
राष्ट्र चेतना मिशन के साथ ही कई युवा भी रक्तदान में जुटे है। मेरठ के हरमिंदर सिंह, पंजाब के संजीव मेहता छिब्बर, सौरभ, शशांक, अभिषेक, सुनील शर्मा आदि लगातार जरूरतमंद लोगों की मदद करने में जुटे हैं।

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