Wednesday, February 11, 2026
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रायबरेली : रक्त देकर डॉक्टर ने मरीज की बचाई जान, शिक्षक ने रक्तदान को बनाया मूलमंत्र

विश्व रक्तदान दिवस(14 जून) पर विशेष
रायबरेली(हि.स.)। जीवन के लिये रक्त सबसे जरूरी है और इसका कोई विकल्प नहीं है। रक्तदान करके ही जीवनदान दिया जा सकता है। इसीलिए रक्तदान को महादान कहा गया है, समाज में कई ऐसे दानी हैं जिन्होंने अपना रक्त देकर औरों के जीवन को बचाया है। 
 विश्व रक्तदान दिवस पर हिन्दुस्थान समाचार कई ऐसे दानवीरों की कहानियां साझा कर रहा है जो समाज में दूसरों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।
डॉक्टर ने रक्त देकर बचाई मरीज की जान 
रायबरेली जिला अस्पताल में भर्ती मो. समीर को एबी पॉजिटिव ब्लड की जरूरत थी और अस्पताल में इस ग्रुप का खून नहीं था। डॉक्टरों ने गंभीर होती मरीज की हालत को देखते हुए रेफर कर दिया। जब जिला अस्पताल में तैनात डॉ रोशन पटेल को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने मरीज के परिजनों को फोन किया और रक्त देने की बात कही,उन्होंने तुरंत अपना रक्त देकर उसकी जान बचा ली। डॉ रोशन पटेल इसके पहले भी कई बार मरीजों को अपना रक्त दे चुके हैं। उनका कहना है कि इसकी प्रेरणा उन्हें तब मिली जब उनके बीमार पिता को एक अनजान शख्श ने अपना रक्त दिया था। तब से वह जरूरतमंदों को ब्लड देते हैं। 
शिक्षक ने रक्तदान को बनाया जीवन का मंत्र
महराजगंज के शिक्षक शिवचरण सिंह ने रक्तदान को अपने जीवन का मूलमंत्र बना लिया है। 52 वर्षीय शिक्षक अब तक 50 बार अपना रक्त जरूरतमंदों को दे चुके हैं। यही नहीं इस काम में उनके बेटे और बेटी भी बराबर के सहभागी हैं। उनकी बेटी अंजली ने बारह बार, बेटे शिवेन्द्र और रवींद्र ने चार चार बार अपना ब्लड दान कर चुके हैं। 
 शिवचरण सिंह कहते हैं कि रक्त की जब किसी को जरूरत होती है तो ज्यादातर अपने सामने नहीं आते अनजान ही अपना रक्त देकर लोगों का जीवन बचाते है।उनके भाई जब बीमार थे तब ही ऐसा हुआ,उसी समय से उन्होंने तय कर लिया कि अब रक्त का अभाव किसी को नहीं होने देंगे और यही अब उनका मूलमंत्र बन चुका है। 
टीम बनाकर कर रहे हैं मदद
जरूरमंद मरीजों को समय से रक्त की उपलब्धता हो सके इसके लिए शहर के रहने वाले मो मुस्तकीम ने दोस्तों और परिचितों की टीम बना ली है। इसके माध्यम से वह अब तक करीब 300 लोगों को रक्तदान करके मदद कर चुके हैं। ब्लड डोनर्स रायबरेली के नाम से बनी इस टीम का अपना फ़ेसबुक पेज और व्हाट्सएप ग्रुप है,जैसे ही उन्हें मदद की जानकारी होती है उनकी टीम सक्रिय होकर लोगों को रक्त उपलब्ध कराती है। 
 मो. मुस्तकीम का कहना है कि उनके भाई दिल्ली के एम्स में भर्ती थे जब उन्हें खून की जरूरत हुई तो कई अनजान लोग अस्पताल पहुंच गए, हालांकि वह अपने भाई को नहीं बचा सके लेकिन उन्होंने खून के अभाव में किसी की मौत न हो, इसी संकल्प के साथ यह काम कर रहे हैं।

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