रायबरेली(हि.स.)। कांग्रेस ने अपने किले रायबरेली में इस बार संगठन को तवज्जो देते हुए पार्टी के साथ खड़े रहने वालों को तरजीह दी है। रायबरेली से अभी तक केवल दो ही उम्मीदवारों को घोषणा हुई है, जिनमें एक भी महिला नहीं है। बाकी बची चार सीटों में कितनी महिलाओं को जगह मिलेगी, यह अगले कुछ दिनों में स्पष्ट हो सकेगा। हालांकि यह स्पष्ट है कि रायबरेली में कांग्रेस नए नेताओं पर भरोसा करके आगे बढ़ रही है।
कांग्रेस स्थानीय बड़े चेहरों की कमी के बाद इस नई लीडरशिप के साथ आगे बढ़ना चाह रही है, जो उसे 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए फायदेमंद साबित हो सके। कांग्रेस को अपने ही किले में मिल रही चुनौतियों को देखते हुए रायबरेली के महराजगंज से प्रदेश कांग्रेस महासचिव सुशील पासी को टिकट दिया गया है।
सुशील पूर्व मंत्री और सपा नेता आरके चौधरी के काफ़ी नजदीकी माने जाते हैं। 2007 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी से बछरावां से चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2017 में उन्होंने इसी सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे और 27 हज़ार से ज्यादा वोट हासिल किए। प्रियंका वाड्रा की पहल पर वह कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी के साथ संगठन की गतिविधियों में सक्रिय रहे। प्रियंका की ही पहल पर उन्हें प्रदेश कांग्रेस के महासचिव पद पर नियुक्त किया गया था।
इसके अलावा रायबरेली और अमेठी संसदीय क्षेत्र की अहम विधानसभा सलोन में भी युवा उम्मीदवार के रूप में संगठन को ही तरजीह मिली है। अमेठी जिला युवक कांग्रेस के अध्यक्ष अर्जुन पासी को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है। अर्जुन सलोन से जिला पंचायत सदस्य हैं और वर्तमान में अमेठी के युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भी हैं। प्रियंका वाड्रा की रैलियों में वह ख़ासा सक्रिय रहे हैं। हालांकि सलोन से कई अन्य प्रमुख दावेदार जरूर रहे हैं, लेकिन संगठन और युवा चेहरे पर कांग्रेस ने दांव लगाकर अपनी नई राजनीतिक पीढ़ी तैयार करने की दिशा में शुरुआत जरूर कर दी है।
रजनीश
