– फूलों व रंगीन झालरों से सजे धर्म नगरी चित्रकूट के मठ-मंदिर
चित्रकूट (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध पौराणिक तीर्थ के रूप में विख्यात भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में देश भर से आये लाखों आस्थावानों ने धर्म नगरी के आराध्य मनोकामनाओं के पूरक भगवान श्री कामतानाथ के दर्शन-पूजन के बाद कामदगिरि पर्वत की पंचकोसीय परिक्रमा लगाकर नूतन वर्ष का भव्यता के साथ स्वागत किया। नव वर्ष के उपलक्ष्य पर धर्म नगरी के सभी प्रमुख मठ-मंदिरों को फूलों एवं रंगीन झालरों से दिव्य सजावट की गई है। आस्थावानों का मानना है कि भगवान कामतानाथ के दर्शन के साथ नये वर्ष की शुरूआत होने से पूरा साल सूख-समृद्वि की भरमार रहती है।
वनवास काल में साढ़े 11 वर्षों तक भगवान श्रीराम की तपोभूमि रही धर्म नगरी चित्रकूट में वैसे तो साल भर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। लेकिन नव वर्ष के स्वागत के लिए पूरे देश से लाखों की संख्या में आस्थावानों का जमावड़ा लगता है। नये साल के शुरू होने से एक दिन पहले ही उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार और दिल्ली समेत देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु धर्म नगरी चित्रकूट पहुंचते है।
इसके बाद नूतन वर्ष के उपलक्ष्य पर सर्वप्रथम माता सती अनुसुईया के तपोबल से निकली मां मंदाकिनी गंगा में आस्था की डूबकी लगाने के बाद रामघाट तट पर भगवान ब्रह्मा द्वारा सृष्टि रचना से पूर्व स्थापित भगवान शिव की प्राचीन मूर्ति स्वामी मत्स्यगयेंद्र नाथ का जलाभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित करते है। इसके बाद मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान श्री कामतानाथ के दर्शन-पूजन के बाद एवं कामदगिरि पर्वत की पंचकोसीय परिक्रमा कर नूतन वर्ष की शुरुआत करते है। इसके अलावा परिक्रमा पथ पर बैठें भिक्षुकों को दान-दक्षिणा कर नूतन वर्ष का भव्यता के साथ स्वागत करते है।
कामतानाथ प्राचीन मुखार बिंद मंदिर के प्रधान पुजारी भरत शरण दास महाराज पौराणिक तीर्थ चित्रकूट की महिमा का बखान करते हुए बतातेे है कि भगवान श्रीराम ने वनवास काल का सर्वाधिक साढे 11 वर्ष का समय चित्रकूट के कामदगिरि पर्वत पर व्यतीत किया था।चित्रकूट से जाते समय भगवान श्रीराम ने चित्रकूट गिरि को कामदगिरि यानि मनोकामनाओं के पूरक होनेे का वरदान दिया था।जिसकी महिमा के प्रताप से जो भी भक्त कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा लगाता है,उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।बताया कि नव वर्ष के उपलक्ष्य पर तपोभूमि चित्रकूट के अराध्य भगवान श्रीकामतानाथ के मंदिर पर फूलों से विशेष सजावट की गई है। नूतन वर्ष के अवसर पर होने वाली भगवान की महाआरती में हजारों श्रद्धालु शामिल होकर अपने जीवन का धन्य करते है।
रामायणी कुटी के महंत रामहृदय दास महाराज एवं भरत मंदिर के महंत दिव्य जीवन दास महाराज ने बताया कि मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के माता जानकी और अनुज लक्ष्मण के साथ बनवास काल के सर्वाधिक साढ़े 11 वर्ष व्यतीत करने की वजह से धर्म नगरी चित्रकूट का समूचे विश्व में अलग ही महत्व है। इसीलिए उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तराखंड समेत देश भर से प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु चित्रकूट पहुंचकर भगवान कामतानाथ के दर्शन और पूजन कर नये वर्ष की शुरूआत करते है।
इसके अलावा भगवान कामतानाथ के दर्शन को आये भक्त सुनील द्विवेदी,महेश प्रसाद जायसवाल, महेंद्र जायसवाल, मटटू साहू आदि ने बताया कि वह प्रतिवर्ष अपने परिवार के साथ धर्म नगरी चित्रकूट से ही नये वर्ष का शुरूआत करते है। ऐसा करने से भगवान कामतानाथ उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते है।
रतन
