Thursday, August 20, 2026
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योगी सरकार वामपंथी-लोकतांत्रिक कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न कर रही – माले

– पार्टी ने कृषि कानूनों पर अस्थायी सुप्रीम रोक का स्वागत किया पर इसे नाकाफी बताया

लखनऊ (हि.स.)। भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने कहा है कि योगी सरकार वामपंथी-लोकतांत्रिक कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न कर रही है।

पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने मंगलवार को कहा कि यूपी में असहमति की आवाज दबाने के लिए खासतौर से वाम-लोकतांत्रिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें चुप कराने को उन पर गुंडा एक्ट की धाराएं लगाई जा रही हैं। जिला बदर करने के लिए नोटिसें थमाई जा रही हैं। दबाव बनाने के लिए परिजनों तक को नहीं बख्शा जा रहा है। चंदौली, बनारस, सीतापुर आदि जिलों की घटनाएं इसका प्रमाण हैं।

कामरेड सुधाकर ने कहा कि किसान आंदोलन से डरी सरकार सामान्य लोकतांत्रिक गतिविधियों को भी बाधित करने का हर संभव उपाय कर रही है। निषेधाज्ञा लगाने से लेकर नेताओं-कार्यकर्ताओं को नजरबंद-पाबंद-गिरफ्तार करने तक की कार्रवाइयों से प्रदेश में आपातकाल जैसे हालात हैं।

राज्य सचिव ने कहा कि चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र में गरीबों के हक के लिए संघर्ष करने वाले भाकपा (माले) और अखिल भारतीय ग्रामीण व खेत मजदूर सभा (खेग्रामस) के नेता कामरेड विदेशी राम का पहले उत्पीड़न किया गया और अब उनके 19 वर्षीय पुत्र को जिला प्रशासन द्वारा गुंडा एक्ट की नोटिस भेजी गई है। बनारस में लोकतांत्रिक कार्यकर्ता रामजनम यादव समेत वाम दलों के नेताओं को भी गुंडा एक्ट की नोटिसें जारी करने की सूचना मिली है। 

सीतापुर में एनएपीएम के कार्यकर्ता के विरुद्ध उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की गई है। माले नेता ने वाम लोकतांत्रिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न की कड़ी निंदा की और इनके विरुद्ध जारी गुंडा एक्ट की नोटिसें निरस्त करने की मांग की।

इस बीच, माले राज्य सचिव ने कृषि कानूनों पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अस्थायी रोक लगाने का स्वागत किया, लेकिन इसे नाकाफी बताया। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा किसान-विरोधी और कारपोरेट परस्त तीन कृषि कानूनों की वापसी का है। अदालत ने इन कानूनों पर रिपोर्ट देने के लिए कमेटी बनाई है। जबकि निरस्तीकरण का अधिकार मूलतः सरकार व संसद के पास है। इसलिए तीनों काले कानून वापस होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

 

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