Friday, March 20, 2026
Homeउत्तर प्रदेशयोगी सरकार केवल जनता का कर रही गुमराह-अजय लल्लू

योगी सरकार केवल जनता का कर रही गुमराह-अजय लल्लू

लखनऊ । प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से पूछा है कि यूपी में आक्सीजन के 300 प्लान्ट किस तारीख तक लगकर तैयार हो जाएंगे? और मुख्यमंत्री जी को यह भी बताना चाहिए कि किस तारीख से इन आक्सीजन प्लान्टों से गंभीर मरीजों को आक्सीजन सरकार उपलब्ध कराना शुरू कर देगी? उन्होने कहा कि सदन से लेकर अब तक दिये गये उनके बयान व घोषणाएं मात्र घोषणाएं ही साबित हुई हैं। उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री ने सदन में बयान दिया था और दावा किया था कि डेढ़ लाख बेड तैयार हैं। आज वह बेड कहां हैं यह मुख्यमंत्री के अलावा किसी को पता नहीं है। सरकार की कोरोना महामारी से निपटने में गंभीरता दिखाने के बजाए केवल प्रदेश की जनता को गुमराह करने तक सीमित है। मानवता हाहाकार कर रही है। आकाश में कोरोना घना होता जा रहा है। सरकार के जनता के साथ संकटकाल में खड़े होने के अब तक के समस्त दावे पूरी तरह से निराधार व खोखले साबित हुए हैं। जिस कारण हर तरफ मौतों का सन्नाटा है और संक्रमण की रफ्तार सरकारी नियंत्रण के बाहर हो चुकी है।
कांग्रेस अध्यक्ष अजय लल्लू ने मंगलवार को यहां बयान जारी कर कहा कि आक्सीजन प्लान्ट लगाने और आक्सीजन कन्सन्ट्रेटर्स खरीदने की घोषणाएं करने वाले मुख्यमंत्री व उनकी तत्कालीन टीम 11 पिछले 14 महीने तक कोरोना महामारी के पीक की पूर्व चेतावनी के बाद क्या करती रही? उन्होंने कहा कि रोजाना मुख्यमंत्री एवं उनके नामित बयानवीरों द्वारा प्रदेश में आक्सीजन, बेड और जीवनरक्षक दवाओं की कोई कमी न होने का दावा किया जा रहा है किन्तु प्रदेश मंे हो रही मौतें बदस्तूर जारी हैं। क्योंकि कहीं पर भी सरकारी दावे जमीन पर नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के शहरों के साथ ही अब गांव-गांव में सभी जनपदों में महामारी तेजी के साथ फैल चुकी है। कहीं भी आरटी-पीसीआर जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पतालों में बेड, आक्सीजन, जीवन रक्षक दवाओं एवं चिकित्सकों व चिकित्सीय सुविधाओं की कमी के चलते लोग अस्पतालों की सीढ़ि़यों पर दम तोड़ रहे हैं। प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह दम तोड़ चुकी है लोग आक्सीजन की कमी से मर रहे हैं और मुख्यमंत्री आम जनता को गुमराह करने के लिए नित नये सैंकड़ों की तादाद में आक्सीजन प्लान्ट के लगाये जाने का शिगूफा छोड़ रहे हैं, जो बहुत ही दुर्भाग्यूपूर्ण है।

RELATED ARTICLES

Most Popular