नेशनल डेस्क
नई दिल्ली। भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में चार वर्ष की सेवा के उपरान्त 75 फीसद युवाओं को एकमुश्त राशि देकर सेवा से निकाले जाने का बिहार में व्यापक विरोध होने के बाद भाजपा शासित राज्यों की सरकारों ने अपने राज्यों में इस योजना के संभावित विरोध को देखते हुए निपटने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा शासित राज्यों की इन सरकारों ने ऐलान किया है कि चार वर्ष सेना में नौकरी करने के बाद वापस आने पर हम उन्हें सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देंगे।
हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान
हरियाणा सरकार ने बुधवार को घोषणा करते हुए कहा है, ‘मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को धन्यवाद करता हूं, उन्होंने अनूठी अग्निपथ योजना शुरू की है। देश की सेना को सशक्त बनाने के लिए इस योजना में चार साल के लिए 17-21 वर्ष के युवाओं को भर्ती कर ट्रेनिंग कराई जाएगी।’ खट्टर ने कहा, ‘चार वर्ष बाद स्थायी नौकरी के लिए वॉलेंटरी तौर पर अप्लाई करना होगा। 25 फीसद को स्थायी नौकरी मिलेगी, 75 फीसद सेना की सेवा से वापस आकर समाज के कामों में लगेंगे। मैं हरियाणा सरकार की ओर से विश्वास दिलाता हूं कि जो 75 फीसद सैनिक वापस आकर सरकारी नौकरी चाहते हैं उनको वरीयता दी जाएगी।“ हरियाणा सीएम ने कहा, “मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि यदि वे एक चाहते हैं तो 75 फीसद अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी। अन्य नौकरियों में भी उन्हें प्राथमिकता देने की इसी तरह की योजनाएं बनेंगी।“
यूपी पुलिस भर्ती में अग्नि वीरों को मिलेगी प्राथमिकता
भारतीय सेना में अग्निपथ योजना के तहत काम कर चुके युवाओं को हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश सरकार भी नौकरियों में प्राथमिकता देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को यह घोषणा की। योगी ने कहा कि भारतीय सेना में सेवा देने के बाद अग्निवीरों को यूपी पुलिस और उससे जुड़ी अन्य सेवाओं में प्राथमिकता दी जाएगी। यूपी सीएम ने ट्वीट कर कहा कि इन युवाओं को यूपी पुलिस भर्ती और इससे संबंधित अन्य सेवाओं में प्राथमिकता दी जाएगी।
मध्य प्रदेश में भी अग्निवीरों को प्राथमिकता
मध्यदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय सेना में अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए सैनिकों को मध्यप्रदेश पुलिस की भर्ती में वरीयता दी जाएगी। चौहान ने इस योजना का स्वागत करते हुए कहा, ‘ऐसे जवान जो अग्निपथ योजना में सेवाएं दे चुके होंगे, उन्हें मध्यप्रदेश पुलिस की भर्ती में प्राथमिकता दी जाएगी।’
उत्तराखंड भी अग्निवीरों पर बड़ा ऐलान
एक अन्य भाजपा शासित राज्य उत्तराखंड में भी अग्निवीरों को प्राथमिकता देने का ऐलान किया गया है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अग्निवीरों को राज्य पुलिस भर्ती में प्राथमिकता मिलेगी। सीएम धामी ने कहा कि अग्निवीरों को चार साल की नौकरी के बाद उत्तराखंड पुलिस और संबंधित सेवाओं में प्राथमिकता दी जाएगी।
अग्निवीरों को सीएपीएफ भर्ती में वरीयताः अमित शाह
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अग्निवीरों को सीएपीएफ और असम राइफल्स में प्राथमिकता देने का फैसला लिया। सशस्त्र बलों में चार साल की सेवा के बाद अग्निपथ रंगरूटों के भविष्य पर सवाल उठाए जाने के साथ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को घोषणा की कि उन्हें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में नियुक्ति के लिए वरीयता मिलेगी।
क्या है अग्निवीर योजना
योजना’ के तहत युवाओं को चार साल की अवधि के लिए सेना में शामिल होने का मौका मिलेगा। साढ़े 17 साल से 21 साल के युवा लड़के और लड़कियां इसके लिए पात्र होंगे। इसके लिए 10वीं से लेकर 12वीं तक के छात्र आवेदन कर सकेंगे। इसकी शुरुआत 90 दिन के भीतर हो जाएगी। इस साल 46 हजार अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। पहली भर्ती प्रक्रिया में युवाओं को छह महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग का समय भी चार साल में शामिल होगा।
सेवानिधि पैकेज क्या है?
हर अग्निवीर को भर्ती के साल 30 हजार महीने तनख्वाह मिलेगी। इसमें से 70 फीसदी यानी 21 हजार रुपये उसे दिए जाएंगे। बाकी 30 फीसदी यानी नौ हजार रुपये अग्निवीर कॉर्प्स फंड में जमा होंगे। इस फंड में इतनी ही राशि सरकार भी डालेगी। दूसरे साल अग्निवीर की तनख्वाह बढ़कर 33 हजार, तीसरे साल 36.5 हजार तो चौथे साल 40 हजार रुपये हो जाएगी। चार साल में उसकी कुल बचत करीब 5.02 लाख रुपये होगी। वहीं सरकार की ओर से भी इतनी ही रकम जमा की जाएगी। नौकरी पूरी होने के बाद उसे ये रकम ब्याज सहित मिलेगी। जो करीब 11.71 लाख रुपये होगी। ये रकम टैक्स फ्री होगी। सेवा के दौरान शहीद होने या दिव्यांग होने पर आर्थिक मदद का प्रावधान भी है। अगर कोई अग्निवीर देश सेवा के दौरान शहीद हो जाता है तो उसे सेवा निधि समेत एक करोड़ से ज्यादा की राशि ब्याज समेत दी जाएगी। इसके अलावा बची हुई नौकरी का वेतन भी दिया जाएगा। अगर कोई जवान ड्यूटी के दौरान डिसेबिल यानी दिव्यांग हो जाता है तो उसे 44 लाख रुपये तक की राशि दी जाएगी और बची हुई नौकरी का भी वेतन दिया जाएगा। चार साल की नौकरी के बाद युवाओं को सेवा निधि पैकेज दिया जाएगा। जो 11.71 लाख रुपए होगा।
क्या अब सेना की नियमित भर्तियां बंद हो जाएंगी?
नई योजना मौजूदा खुली भर्ती की जगह ही लाई गई है। अभी जनरल ड्यूटी के अलावा, क्लर्क, स्टोर कीपर, ट्रेडमैन, नर्सिंग असिस्टेंट जैसे पदों के लिए खुली भर्ती होती है। इसमें चयनित होने वाले युवा करीब साढ़े 17 साल सेना में सेवाएं देते हैं। सेवा समाप्त होने के बाद इन्हें पेंशन भी मिलती है। अब इन पदों पर केवल चार साल के लिए भर्ती होगी। इन अग्निवीर को कोई पेंशन नहीं मिलेगी। सेवाकाल समाप्त होने के बाद उन्हें एकमुश्त राशि ही मिलेगी।
चार साल के बाद सेवा मुक्त हुए जवानों का क्या होगा?
चार साल के सेवाकाल के बाद 75 फीसदी जवानों की सेवाएं समाप्त हो जाएंगी। अधिकतम 25 फीसदी को रेगुलर काडर में जगह मिलेगी। इसके लिए सेवाकाल पूरा होने के बाद ऐच्छिक आधार पर रेगुलर काडर के लिए आवेदन करना होगा। जिन जवानों को सेवा से मुक्त किया जाएगा, उन्हें सशस्त्र बल व अन्य सरकारी नौकरियों में वरीयता मिलेगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि चार साल के सेवाएं देने वाले अग्निवीर को कई राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों में आने वाली नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी। रक्षा मंत्री के एलान के बाद राज्यों के ओर से इस तरह की घोषणाएं भी होने लगी हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस में अग्निवीर जवानों को भर्ती में प्राथमिकता दी जाएगी।
सेना में भर्ती के लिए क्या होगा बदलाव?
नई योजना में भर्ती की प्रक्रिया पहले की ही तरह रहेगी। चयनित होने के बाद छह महीने के कठिन ट्रेनिंग होगी। इसके बाद तैनाती होगी। नई योजना से सेना में युवाओं को ज्यादा मौके मिलेंगे। अभी सेना की औसत आयु 32 साल है। योजना लागू होने के बाद अगले छह से सात साल में ये घटकर 24 से 26 साल हो जाएगी।
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महत्वपूर्ण सूचना
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