Saturday, August 22, 2026
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महंत नरेंद्र गिरि की मौत मामले में केस वापसी की खबर से संत अचंभित

हरिद्वार (हि.स.)। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की मौत का मामला फिर से एकाएक सुर्खियों में आ गया है। नरेंद्र गिरि के मौत के मामले में मुख्य आरोपित आनंद गिरि के नाम से दर्ज एक मुकदमे को वापस ले लिया गया है। इस पर श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के महंत रविंद्र पुरी महाराज ने आश्चर्य व्यक्त किया है। वे मामले की जानकारी करने प्रयागराज रवाना हो गए हैं।

इस मामले में महंत रविंद्र पुरी महाराज का कहना है कि मामले में हमारे दो संतों ने मुकदमा दर्ज कराया था। पता चला है कि उन्होंने एफआईआर वापस ले ली है। अभी उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है, लेकिन वो तत्काल प्रयागराज जा रहे हैं। जहां वे खुद जानकारी जुटाएंगे कि क्यों एफआईआर वापस ली गई? उन्होंने कहा कि हमारे इतने बड़े महाराज की हत्या हुई है और मामला सभी के सामने हैं। ऐसे में एफआईआर वापस लेने का कोई मतलब नहीं है।

रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि उन संतों को एफआईआर वापस लेने का कोई अधिकार नहीं है। वह उन संतों से पूछेंगे कि उन्होंने ऐसा क्यों किया और उसके पीछे क्या चाल है? किसका हाथ है और क्या साजिश है? उनका मानना है कि वहां पर कुछ लोग आरोपित आनंद गिरि को छुड़ाना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होगा। कानून अपना कार्य करेगा। एफआईआर वापस लेने से कुछ नहीं होगा, जिन संतों ने ऐसा काम किया है, उनके ऊपर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह लोग पैसा लेकर एफआईआर वापस ले रहे हैं। नरेंद्र गिरि के सुसाइड में किसका हाथ था, उसकी सीबीआई जांच हो रही है, लेकिन संतों ने केस वापस ले लिया है। ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई कि अखाड़े का कोई संत एफआईआर वापस ले।

बीते साल 20 सितंबर को प्रयागराज में महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। सुसाइड के लिए उकसाने के मामले में आनंद गिरि, आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को आरोपित बनाया गया है। सीबीआई की चार्जशीट में तीनों के खिलाफ साजिश रचने के साथ ही आत्महत्या के लिए उकसाने का भी आरोप लगा है। तीनों आरोपितों के खिलाफ मामला चल रहा है।

रजनीकांत

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