Tuesday, April 7, 2026
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मथुरा में विजयदशमी पर आज भी होती है रावण की पूजा

-रावण की बड़ी बहन रहती थी मथुरा में, मथुरा और लंका में गहरा ताल्लुक

  -लंकेश भक्त मंडल ने शिव की पूजा के बाद विधि-विधान से दशानन को पूजा

 -रावण पुतला दहन का किया विरोध, पुतला दहन भ्रम हत्या से कम नहीं
मथुरा (हि.स.)। शहर के यमुना नदी के किनारे बने प्राचीन शिव मंदिर में विजयदशमी के दिन भगवान शिव के साथ रावण की भी विधि-विधान से पूजा की जाती है। सारस्वत समाज के ब्राह्मण आज भी रावण की पूजा करते हैं। ये लोग रावण का पुतला जलाने का विरोध करते हैं। दशकों से चली आ रही परंपरा आज भी कायम है।
इनका कहना है कि हिंदू रीति-रिवाज में मरे हुए व्यक्ति का एक ही बार दहन किया जाता है न कि बार-बार पुतला जलाया जाता है। रविवार दोपहर यमुना किनारे शिव मंदिर पर सारस्वत समाज के लोगों ने महाराज दशानन की आरती की, लंकेश भक्तों के द्वारा दशानन पूजा कर देश भर में पुतला दहन को रोकने की मांग की गई। पुतला दहन की परंपरा को शास्त्र और संविधान अनुमति नहीं देता।

रावण का मथुरा से नाता
दशानन यानी लंकापति रावण का मथुरा से बड़ा गहरा ताल्लुक है। रावण के छह भाई, दो बहन थीं। रावण की बड़ी बहन कुंभनी मथुरा के राजा मधु राक्षस की पत्नी और लवणासुर की मां थी। रावण ब्राह्मणों में सारस्वत गोत्र से थे।
जय लंकेश का गूंजा नारा 
लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत के द्वारा मथुरा में रविवार दोपहर यमुना किनारे यमुनापार क्षेत्र में पुल के नीचे प्राचीन शिव मंदिर पर विगत वर्षों की भांति दशानन की पूजा अर्चना की गई। पूजा अर्चना के दौरान शिव एवं शक्ति की उपासना करनी वाले कुलदीप अवस्थी ने दशानन का स्वरूप धारण किया और उनके द्वारा पहले भगवान शिव की आराधना और पूजा अर्चना की गई बाद में लंकेश भक्तों के द्वारा जय लंकेश जय शंकर की नारों की जय घोष की गई। लंकेश भक्तों के द्वारा महाराज दशानन की आरती उतारी गई। 
राम ने भी रावण के विद्वता का लोहा माना थालंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष सोमवीर सारस्वत ने कहा कि जब भगवान राम ने प्रकांड विद्वान रावण का उनकी विद्वता में लोहा माना था और उन्हें लंका पर विजय के लिए पूजा अर्चना करने के लिए स्वयं आमंत्रित किया था। रावण की वैधता एवं उनके पराक्रम की शक्ति अपार थी। उन्होंने स्वयं अपने आप पर विजय पाने का आशीर्वाद सेतुबंध रामेश्वरम की स्थापना के समय भगवान राम को दिया था रावण जैसा प्रकांड विद्वान स्वयं जानकी जी को लंका से साथ लेकर गया और भगवान राम के साथ पूजा कराने के बाद उन्हें लंका लेकर आया। इसके अलावा भगवान राम ने जब दशानन अंतिम समय पर विष्णु लोक को अपना शरीर त्याग कर जा रहे थे उसी समय उन्होंने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को राजनीति की शिक्षा लेने भेजा था और प्रकांड विद्याओं को नमन किया था। भगवान राम ने कहा था रावण प्रकांड विद्वान एवं ब्राह्मण है उससे हमें सीख लेनी चाहिए। 

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